औरंगाबाद में अब खेल-खेल में पढ़ेंगे कमजोर बच्चे, शिक्षकों को मिला खास प्रशिक्षण; बिहार शिक्षा परियोजना की नई पहल

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कार्यक्रम का शुभारंभ करते डीईओ व अन्य

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बिहार शिक्षा परियोजना, औरंगाबाद में शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसका उद्देश्य कक्षा चार से आठ तक के कमजोर बच्चों को उनकी कक्षा के अनुरूप दक्ष बनाना है. प्रशिक्षण खेल और गतिविधियों पर केंद्रित है ताकि बच्चे रुचि के साथ सीख सकें.

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औरंगाबाद में कक्षा चार से आठ तक पढ़ने, लिखने और गणना में कमजोर बच्चों को उनकी कक्षा के अनुरूप दक्ष बनाने के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है. बिहार शिक्षा परियोजना, औरंगाबाद के तत्वावधान मेंअनुग्रह इंटर स्कूल में चार दिवसीय गैर आवासीय प्रशिक्षण की शुरुआत हुई.

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प्रशिक्षण में प्रखंड स्तर पर कार्यरत मास्टर ट्रेनर्स को टीचिंग ऐट द राइट लेवल की गतिविधियों और तकनीकों की जानकारी दी जा रही है. प्रशिक्षण का उद्घाटन जिला शिक्षा पदाधिकारी दयाशंकर सिंह, समग्र शिक्षा के डीपीओ संतोष कुमार, एपीओ सर्वेश कुमार सिंह और प्रथम संस्था के प्रतिनिधि राकेश गुप्ता ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.

प्रशिक्षण मंगलवार से शनिवार तक चलेगा. इस दौरान कमजोर बच्चों की पहचान, उनके वर्तमान शैक्षिक स्तर का आकलन और उसी के आधार पर समूह बनाने की प्रक्रिया समझायी जा रही है.

आकलन के बाद बच्चों को स्तर के अनुसार मिलेगा प्रशिक्षण

प्रशिक्षण में विभाग की ओर से विकसित टूल्स के माध्यम से बच्चों का आकलन करने की जानकारी दी जा रही है. आकलन के बाद बच्चों को उनके शैक्षिक स्तर के अनुसार अलग-अलग समूहों में बांटने और समूह के अनुरूप शिक्षण गतिविधियां कराने का अभ्यास कराया जा रहा है.

शिक्षकों को बच्चों को बोझिल तरीके से पढ़ाने के बजाय खेल और गतिविधियों के माध्यम से सीखने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया. प्रशिक्षण के दौरान ऐसे तरीकों की जानकारी दी जा रही है, जिससे बच्चे रुचि के साथ पढ़ाई कर सकें.

परिश्रम से बदलेगा कमजोर बच्चों का शैक्षिक स्तर

प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी दयाशंकर सिंह ने कहा कि कमजोर बच्चों को आगे लाने के लिए शिक्षकों को कक्षा में विशेष मेहनत करनी होगी. शिक्षक जितना बेहतर प्रयास करेंगे, बच्चों का सीखने का स्तर उतना ही मजबूत होगा. उन्होंने कहा कि बच्चों के शैक्षिक विकास में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है. प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, इसके लिए शिक्षकों को पूरे मनोयोग से काम करना चाहिए.

समग्र शिक्षा के डीपीओ ने कहा कि बच्चों को बेहतर ढंग से पढ़ाने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि वे किस स्तर पर हैं. आकलन के बाद बच्चों को उनके स्तर के अनुसार समूह में रखकर गतिविधियां करायी जानी चाहिए.

व्यावहारिक गतिविधियों का कराया जा रहा अभ्यास

प्रथम संस्था की सीआईएम डॉली गुप्ता और मास्टर ट्रेनर डीआरपी डॉ. राजीव रंजन सिंह, डॉ. शशि भूषण सिंह, यशवंत कुमार सिंह एवं धर्मेंद्र कुमार प्रशिक्षण दे रहे हैं.

प्रशिक्षुओं को अनुभव आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने की विधि बतायी जा रही है. साथ ही बच्चों के शैक्षिक स्तर का आकलन करने और कमजोर बच्चों के समूहीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले टेस्टिंग टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है.

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