औरंगाबाद में बाल श्रम के खिलाफ सघन जांच, होटल और भोजनालय से 4 बाल श्रमिक मुक्त; हर बच्चे को मिले ₹3,000
मुक्त कराये गये बाल श्रमिक | Prabhat Khabar Network
औरंगाबाद को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत, होटलों और भोजनालयों से 4 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया है. मुक्त कराए गए हर बच्चे को 3,000 रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता दी गई है.
Aurangabad News: जिले को बाल श्रम मुक्त बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा के निर्देश पर श्रम विभाग द्वारा लगातार जांच एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है. इसी कड़ी में श्रम अधीक्षक अंजू कुमारी के निर्देशानुसार गठित विशेष धावा दल ने बुधवार को औरंगाबाद सदर एवं कुटुंबा प्रखंड के विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, होटलों और ढाबों में सघन जांच अभियान चलाया. छापेमारी के दौरान दो अलग-अलग खान-पान प्रतिष्ठानों से कुल चार बाल श्रमिकों को काम करते हुए पाया गया, जिन्हें टीम ने तत्काल मुक्त करा लिया.
अंबा और सदर बाईपास के होटलों से रेस्क्यू
धावा दल ने गुप्त सूचना और औचक निरीक्षण के आधार पर कार्रवाई करते हुए बच्चों को रेस्क्यू किया:
- शिव शक्ति होटल (अंबा, कुटुंबा): कुटुंबा प्रखंड अंतर्गत हरिहरगंज मुख्य मार्ग स्थित शिव शक्ति होटल में दबिश देकर एक बाल श्रमिक को विमुक्त कराया गया.
- कृति भोजनालय (सदर बाईपास, औरंगाबाद): औरंगाबाद सदर प्रखंड के बाईपास स्थित कृति भोजनालय में औचक छापेमारी कर तीन बच्चों को मजदूरी करते रंगे हाथ पकड़ा गया.
विमुक्त कराए गए सभी चारों बच्चों को श्रम विभाग की ओर से तत्काल राहत के रूप में प्रति बच्चा 3,000 रुपये (कुल 12,000 रुपये) की आर्थिक सहायता राशि सौंपी गई.
बाल कल्याण समिति के समक्ष पेशी और पुनर्वास
रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को नियमानुसार बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया गया है. समिति के निर्देश पर बच्चों को सुरक्षित रूप से बाल गृह में आवासित कराते हुए उनके सामाजिक व शैक्षणिक पुनर्वास की रूपरेखा तैयार की जा रही है. इसके अतिरिक्त, श्रम विभाग इन बच्चों और उनके परिवारों को सरकार की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ेगा, ताकि आर्थिक तंगी के कारण उन्हें दोबारा मजदूरी के दलदल में न धकेला जाए.
दोषी होटल संचालकों पर प्राथमिकी दर्ज
बच्चों से अवैध रूप से काम कराने वाले दोनों नियोजकों के विरुद्ध बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है:
- सख्त कानूनी प्रावधान: इस अधिनियम के तहत दोष सिद्ध होने पर दोषी नियोक्ता को छह माह से लेकर दो वर्ष तक का कारावास तथा 20 हजार से 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
- पुनर्वास कोष में जमा होंगे 20 हजार: सर्वोच्च न्यायालय के मार्गदर्शक निर्देशों के अनुपालन में प्रत्येक बाल श्रमिक के हिसाब से दोषी नियोजक से 20,000 रुपये की वसूली कर उसे जिला बाल कल्याण एवं पुनर्वास कोष में जमा कराया जाएगा.
सघन अभियान आगे भी रहेगा जारी
श्रम विभाग ने आम नागरिकों और व्यवसायियों को सख्त चेतावनी दी है कि किसी भी प्रतिष्ठान, होटल, दुकान या कारखाने में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से काम कराना संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है. विभाग ने अपील की है कि समाज का कोई भी व्यक्ति बाल श्रम होते देखे तो तुरंत प्रशासन या श्रम विभाग को सूचित करे.
इस संयुक्त छापेमारी अभियान में कुटुंबा के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी (एलईओ) रणविजय कुमार, मदनपुर के संजीव कुमार, बारुण के नरेश कुमार, औरंगाबाद सदर के राकेश कुमार, नबीनगर के विजेंद्र कुमार, ओबरा के रोहित कुमार, स्वयंसेवी संस्था 'दिव्य ज्योति' के प्रतिनिधि तथा संबंधित थानों की पुलिस बल के जवान शामिल रहे.
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