औरंगाबाद: दाउदनगर के जिउतिया लोकोत्सव को सरकार ने दिए 3 लाख रुपये, सांस्कृतिक कैलेंडर में भी शामिल

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बिहार सरकार ने दाउदनगर के ऐतिहासिक जिउतिया लोकोत्सव के लिए 3 लाख रुपये की राशि आवंटित की है. यह उत्सव पहली बार बिहार सरकार के सांस्कृतिक कैलेंडर में शामिल हुआ है, जिससे स्थानीय लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलने की उम्मीद जगी है.

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Daudnagar Festival: औरंगाबाद जिले के दाउदनगर में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक जिउतिया लोकोत्सव के लिए बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग ने तीन लाख रुपये की राशि आवंटित की है. सरकारी स्तर पर आर्थिक सहयोग मिलने से दाउदनगर की लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलने की उम्मीद जगी है. राशि आवंटित होने की जानकारी के बाद स्थानीय लोगों में खुशी है.

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पहली बार सांस्कृतिक कैलेंडर में शामिल हुआ था लोकोत्सव

जुलाई में पहली बार दाउदनगर के ऐतिहासिक जिउतिया लोकोत्सव को बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के सांस्कृतिक कैलेंडर में शामिल किया गया था. उस समय राशि का आवंटन नहीं हुआ था. अब विभाग की ओर से तीन लाख रुपये की राशि जारी की गयी है. स्थानीय लोगों के अनुसार यह दाउदनगर की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक उत्सव के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है.

जिउतिया पर्व अपनी अनोखी परंपराओं और सांस्कृतिक विशेषताओं के कारण बिहार में अलग पहचान रखता है. सितंबर-अक्टूबर में आयोजित होने वाले इस पर्व को स्थानीय स्तर पर नकल पर्व के नाम से भी जाना जाता है. करीब आठ से नौ दिनों तक चलने वाले इस लोकोत्सव में शहर पारंपरिक झांकियों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और नकल कार्यक्रमों से जीवंत हो उठता है.

चार प्रमुख चौकों पर होती है भगवान जीमूतवाहन की पूजा

दाउदनगर शहर के चार प्रमुख चौकों पर भगवान जीमूतवाहन की प्रतिमाएं स्थापित हैं. यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. उत्सव के अंतिम तीन दिनों में कार्यक्रम अपने चरम पर पहुंच जाता है. विभिन्न चौकों पर पारंपरिक प्रस्तुतियां, झांकियां और नकल देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. स्थानीय कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं.

बाजार चौक में भगवान जीमूतवाहन मंदिर, मुख्य पार्षद अंजलि कुमारी,पप्पु गुप्ता | Prabhat Khabar Network

वर्ष 1860 से जुड़ा है जिउतिया पर्व का इतिहास

स्थानीय मान्यताओं और प्रचलित झूमर गीतों के अनुसार दाउदनगर में जिउतिया पर्व की शुरुआत संवत 1917 यानी वर्ष 1860 में हुई थी. यही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इस पर्व को दाउदनगर की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ती है. लंबे समय से स्थानीय लोग जिउतिया लोकोत्सव को राजकीय दर्जा देने की मांग करते रहे हैं. अब सांस्कृतिक कैलेंडर में शामिल होने के साथ इसे सरकारी आर्थिक सहयोग भी मिला है.

मुख्य पार्षद ने जताया सरकार का आभार

नगर पर्षद दाउदनगर की मुख्य पार्षद अंजलि कुमारी ने कहा कि जिउतिया लोकोत्सव के लिए तीन लाख रुपये का आवंटन दाउदनगरवासियों के लिए हर्ष और गौरव का विषय है. यह राशि लोकोत्सव को भव्य और व्यवस्थित रूप देने में सहायक होगी. साथ ही, पारंपरिक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी.

उन्होंने बिहार सरकार और कला, संस्कृति एवं युवा विभाग का आभार जताते हुए शहरवासियों से लोक संस्कृति और परंपरा को संरक्षित करने की अपील की.

बाजार चौक में भगवान जीमूतवाहन मंदिर, मुख्य पार्षद अंजलि कुमारी,पप्पु गुप्ता | Prabhat Khabar Network

स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मंच

बाजार चौक स्थित भगवान जीमूतवाहन कमेटी से जुड़े पप्पू गुप्ता ने कहा कि जिउतिया दाउदनगर की सांस्कृतिक पहचान है. सरकारी सहयोग मिलने से लोकोत्सव को नई ऊर्जा मिली है. इससे सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय कलाकारों और लोक परंपराओं को भी मंच मिलेगा. उन्होंने उम्मीद जतायी कि सरकारी सहयोग से जिउतिया लोकोत्सव की ऐतिहासिक पहचान और मजबूत होगी.

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