मुख्य पार्षद के वार्ड में पीने के पानी के लिए लगती हैं कतारें

Published at :17 Feb 2017 5:18 AM (IST)
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मुख्य पार्षद के वार्ड में पीने के पानी के लिए लगती हैं कतारें

संकट. गरमी की आहट शुरू होते ही पानी के लिए परेशान होने लगे लोग घंटे भर के िलए चलता है मोटर औरंगाबाद सदर : अभी गरमी का मौसम शुरू भी नहीं हुआ और कुछ मुहल्लों में पेयजल की आपूर्ति चरमरा गयी है. गरमी के पहले शहर में पेयजल की समस्या नहीं रहे, इसके लिए नगर […]

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संकट. गरमी की आहट शुरू होते ही पानी के लिए परेशान होने लगे लोग

घंटे भर के िलए चलता है मोटर
औरंगाबाद सदर : अभी गरमी का मौसम शुरू भी नहीं हुआ और कुछ मुहल्लों में पेयजल की आपूर्ति चरमरा गयी है. गरमी के पहले शहर में पेयजल की समस्या नहीं रहे, इसके लिए नगर पर्षद और पीएचइडी हर साल लाखों रुपये की योजना बनाते हैं. जिससे लोगों की भी उम्मीद बढ़ जाती है, लेकिन जब वक्त आता है और लोगों के हलक सूख रहे होते हैं तब नगर पर्षद और पीएचइडी का प्लान कहीं नजर नहीं आता है. शहर का अतिमहत्वपूर्ण मुहल्ला व नगर पर्षद की मुख्य पार्षद का वार्ड 10 पानी के लिए पिछले कई वर्षों से परेशान है. चेयरमैन का वार्ड होते हुए भी यहां के लोग पानी के लिए मुहताज है.
मुख्य पार्षद श्वेता गुप्ता इसी वार्ड से चुनाव जीत कर नगर पर्षद के शीर्ष पद पर आज बैठी हैं, पर अपने वार्ड के लोगों का वे कंठ नहीं भिंगा सकीं. इस इलाके में गरमी में चापाकल के भरोसे लोगों को पानी नसीब नहीं होता है. जबकि, सांसद निधि से लगी मोटर से भी नियमित जलापूर्ति नहीं हो पाती. सुबह और दोपहर के वक्त घंटे भर के लिए मोटर चालू होता है, तो सप्लाई वाटर मुहल्ले की गलियों तक पहुंच पाती है, जहां लोग डब्बा और बरतन लिए लाइन में लगे रहते हैं. यही नहीं पानी के लिए इस मुहल्ले में मारपीट तक की नौबत आती है, लेकिन चेयरमैन को ये सब कुछ नहीं सूझता.
जलमीनार बनाने की थी योजना : शहर के कुरैशी मुहल्ले में नगर पर्षद द्वारा जलमीनार बनाने की योजना बनायी गयी थी और इसे पिछले गरमी में ही बनना था.
इसके लिए मुख्य पार्षद प्रतिनिधि भी लंबी-लंबी डिंगे हांक रहे थे और छह महीने पहले मुहल्ले में चल रहे नाली निर्माण के बाद पेयजल की व्यवस्था में काम लगाया जाना था. लेकिन, वार्ड के लोगों का यह सपना, सपना ही रह गया. पेयजल की समस्या नहीं दूर हो सकी. आज भी इस मुहल्ले के लोग चाहे वे पुरुष हों या महिलाएं पानी के लिए उन्हें लाइन लगाना पड़ता है. वहीं जब मर्द काम पर निकल जाते हैं, तो पानी लाने की ड्यूटी या तो महिलाओं की होती है या फिर पढ़ाई खत्म करके आये बच्चों की.
वार्ड 10 में चरितार्थ हो रही ‘दिया तले अंधेरा’ वाली कहावत
खुद बन गये वीआइपी, पर वार्ड रह गया मलिन
पिछले वर्ष हुई भीषण गरमी में जल संकट के कारण कुरैशी मुहल्ला सहित अन्य कई मुहल्ले भी काफी प्रभावित हुए थे. पर नगर पर्षद द्वारा कोई इंतजाम नहीं किये जाने के कारण मुहल्ले के लोगों में काफी नाराजगी है. लोग पेयजल संकट से इतना त्रस्त हैं कि अब तो उनके इस तकलीफ के बारे में पूछते ही गुस्सा जाते हैं. मुहल्लेवासी मुख्य पार्षद का नाम तक नहीं सुनना चाहते. वे कहते हैं कि चुनाव जीत कर वार्ड पार्षद से बन गये चेयरमैन और लोगों के लिये हो गये वीआइपी, पर वार्ड आज भी मलिन ही रह गया.
क्या कहती हैं मुख्य पार्षद
पेयजल के लिए नगर पर्षद द्वारा योजना बनायी जा रही है. इस गरमी से पहले हर मुहल्ले की स्थिति को सुधार लिया जायेगा. जहां भी पेयजल समस्या है, उसे दूर करने के लिए नगर पर्षद एक योजना के तहत कार्य कर रही है. पानी सप्लाई की व्यवस्था शहर में ठीक की जायेगी.
श्वेता गुप्ता, मुख्य पार्षद
मैं इस मुहल्ले में 30 वर्षों से रह रही हूं, पर जो समस्या कल थी वही आज भी है. बल्कि, धीरे-धीरे कुछ न कुछ नई समस्या भी वार्ड में बन रही है. पेयजल के लिए वार्ड पार्षद कभी नहीं सोचे कि उनके वार्ड के लोग कैसे अपनी प्यास बुझा रहे हैं. यहां नहाने-धोने का पानी तो दूर, पीने का पानी भी बड़ी मुश्किल से मिलता है.
अनवरी खातून
बड़े घर के लोग तो पानी खरीद कर पी लेते हैं. हम गरीब क्या करें. कोई व्यवस्था गरीबों के लायक वार्ड में नहीं की गयी है. चुनाव जीतने के बाद तो मुख्य पार्षद का चेहरा भी नहीं देखे हैं. नाली और गली में थोड़ा-बहुत काम दिखा. पर जो सबसे ज्यादा जरूरी है उसे पूरा नहीं कराया गया है. पानी के लिए लोग छछनते रहते हैं.
फरजाना खातून
पानी सप्लाई की व्यवस्था ठीक नहीं है. घर का चूल्हा चौकी देखा जाये या फिर हर रोज सुबह बरतन और डब्बे लेकर पानी के लिए लाइन लगे, समझ में नहीं आता. वार्ड पार्षद आखिर पांच वर्षों में क्या किये हैं, मुझे नहीं दिखता. दो-चार चापाकल या मोटर ही लगा दिये गये होते, तो शायद हमारी परेशानियां कम हो जातीं.
रहमती खातून
वार्ड पर मुख्य पार्षद ने ईमानदारीपूर्वक ध्यान नहीं दिया है. वे पांच साल के कार्यकाल में मुख्य पार्षद बनने के बाद वार्ड में कभी झांकने तक नहीं आये. पानी की समस्या को लेकर इस मुहल्ले में कई बार झगड़े हुए. पानी के लिए इस वार्ड में खून बहता है. लोगों के सर फूटते हैं. आखिर यह कैसी व्यवस्था है?
मजहर
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