खुद अंधेरे में, दूसरों का भविष्य बांचते हैं मासूम

Published at :11 Jan 2017 8:32 AM (IST)
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खुद अंधेरे में, दूसरों का भविष्य बांचते हैं मासूम

औरंगाबाद सदर : दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों के तर्ज पर औरंगाबाद में भी धीरे-धीरे मासूम बच्चों को अपराध व ठगी के धंधे में धकेला जा रहा है. यहां मासूम बच्चे न सिर्फ बाल मजदूरी की दास्ता बयां करते हैं, बल्कि पढ़ने-लिखने व खेलने की उम्र में वे भीख मांगते और भविष्य बताते फिर […]

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औरंगाबाद सदर : दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों के तर्ज पर औरंगाबाद में भी धीरे-धीरे मासूम बच्चों को अपराध व ठगी के धंधे में धकेला जा रहा है. यहां मासूम बच्चे न सिर्फ बाल मजदूरी की दास्ता बयां करते हैं, बल्कि पढ़ने-लिखने व खेलने की उम्र में वे भीख मांगते और भविष्य बताते फिर रहे हैं. इसे समाज व व्यवस्था की उदासीनता कहें या फिर अपराधियों की सक्रियता, बच्चों को अपराध की ओर ले जाने की कोशिश सफल होते दिख रही है. कभी किसी चौक-चौराहे पर ऐसे बच्चे दिख जाते हैं, तो कहीं बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन पर. कोई ईश्वर-अल्लाह के नाम पर भीख मांग रहा है, तो कोई अपने माथे पर तिलक लगाये लोगों के हाथ देख कर भविष्य बताता है.
गया शहर के डेल्हा मुहल्ले से आते हैं बच्चे : अब तक ऐसे कई साक्षात्कार सुने होंगे या फिर देखे होंगे पर इन मासूमों का साक्षात्कार चौंकानेवाला है.
दो दिन पूर्व महाराजगंज रोड में दो ऐसे ही मासूमों को कुछ स्थानीय दुकानदार व लोगों ने पकड़ कर उससे नाम व पता पूछा, तो उनकी असलियत लोगों को समझ आयी, जो बेहद चौंकाने वाली थी. पता पूछने पर तन कर दोनों मासूमो ने कहा कि घर गया डेल्हा पर है. इन बच्चों ने बताया कि वे चार हजार रुपये महीने पर ये कार्य करते हैं और उनकी 10 बच्चों की एक टीम है. जिसमें सभी नौ से 12 वर्ष आयु के हैं. दिन भर भीख मांगने और भविष्य बताना उनका काम है और शाम को देर हो जाने पर शहर की धर्मशाला उनका ठिकाना या फिर समय पर स्टेशन पहुंच गये, तो सीधे गया चले जाते हैं.
कूड़ा बीनने व होटल में भी लगे है कई मासूम : इनके जैसे ही कई मासूमों से बालश्रम भी कराया जा रहा है. शहर के कुछ हिस्सों में ऐसे बच्चे कूड़ा चुनते दिख जाते हैं या फिर होटलों में प्लेट मांजते. शहर के कचरावाले स्थानों से कूड़े बिनकर, उसे कबाड़ी में बेचते हैं और फिर उस पैसे से किसी नशे के लत को पूरी करते हैं. शहर के ऐसे ही एक कूड़ा बिनने वाले मासूम से जब बात की गयी, तो उसने अपना घर शहर के टिकरी मुहल्ला में बताया और उसने कहा कि वह इस काम को अपने परिवार के लिए कर रहा है, जबकि इसके पीछे की सच्चाई कुछ और है. यानी ऐसे कार्य में न सिर्फ बच्चे लगे हैं, बल्कि उनके परिवार व मां-बाप भी कहीं न कही दोषी हैं.
रेलवे स्टेशन पर भी सक्रिय हैं ये बच्चे
जानकारी के अनुसार अनुग्रह नारायण रेलवे स्टेशन पर ऐसे मासूम गिरोह ज्यादा सक्रिय हैं. एक मासूम ने बताया कि रेलवे स्टेशन पर ब्लेडबाजी, पॉकेटमारी, चोरी और भीख मांगनेवाले बच्चों का भी एक दल स्टेशन पर कार्य कर रहा है. इसमें कम उम्र की लड़कियां भी शामिल हैं. इधर, जब इसकी पड़ताल रेलवेकर्मियों से की गयी, तो नाम न छापने के शर्त पर उन्होंने बताया कि ये सच है कि बच्चों का गैंग स्टेशन पर सक्रिय है. कई बार खड़ी ट्रेन के डिब्बों में इन्हें नशा करते या आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा भी गया है.
सूचना मिलने पर तुरंत की जाती है कार्रवाई
बाल श्रम के उन्मूलन के लिए सरकार द्वारा अपनायी गयी वैधानिक नीतियों का पालन किया जा रहा है. शहर के होटलों समेत अन्य जगहों पर बालश्रम में लगे मासूमों को चिह्नित किया जा रहा है. इसके लिए धावा दल का गठन कर ऐसे संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी की जाती है, इसके बाद वहां से पाये गये बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिये विभागीय स्तर से पहल की जाती है. पूर्व में ऐसे कुछ बाल श्रमिकों को मुक्त भी कराया गया था, फिर से एक अभियान चलाया जायेगा. ऐसे मामलों में सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है.
अमरेंद्र नारायण सिंह, श्रम अधीक्षक, औरंगाबाद
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