रैनबसेरे पर फुटपाथियों का कब्जा

Published at :03 Dec 2016 8:21 AM (IST)
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रैनबसेरे पर फुटपाथियों का कब्जा

औरंगाबाद सदर : शहर में कुछ लोगों ने मानवता को भी ताक पर रख दिया है. अपने स्वार्थ में डूबे ऐसे लोगों को दूसरे की तकलीफ का एहसास नहीं सता रहा. सदर अस्पताल के मुख्य द्वार पर दशक भर पहले बना रैन बसेरा बनने के बाद से अब तक फुटपाथियों के कब्जे में है. इसके […]

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औरंगाबाद सदर : शहर में कुछ लोगों ने मानवता को भी ताक पर रख दिया है. अपने स्वार्थ में डूबे ऐसे लोगों को दूसरे की तकलीफ का एहसास नहीं सता रहा. सदर अस्पताल के मुख्य द्वार पर दशक भर पहले बना रैन बसेरा बनने के बाद से अब तक फुटपाथियों के कब्जे में है. इसके कारण मुसाफिरों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है.
साथ ही, आम लोगों को भी परेशानी होती है. रिक्शा व ऑटो चला कर अपने परिवार का लालन-पालन करनेवाले लोग जब सवारियों को सेवा देकर ठंड की रात में थोड़ा सुस्ता रहे होते हैं, तो उन्हें यह रैन बसेरा नसीब नहीं होता. खुले आसमान के नीचे ही वे ठंड की रात्रि में ठिठुर कर रात गुजारते हैं. ऐसे लोगों के लिए शहर में कोई सुविधा नहीं होने के कारण फुटपाथ पर ही रात गुजारने को विवश हैं. ठंड की रात उन्हें चौक-चौराहों पर आग ताप कर काम चलानी पड़ती है.
मुसाफिरों को हो रही है ज्यादा परेशानी : शहर के रमेश चौक, जामा मसजिद और सदर अस्पताल के समीप से रात के साढ़े आठ बजे के बाद बसों का परिचालन शुरू हो जाता है, जो सुबह सात बजे तक जारी रहता है.
मध्य रात्रि में थोड़ी देर के लिए बसों का परिचालन बंद रहता है, पर इस बीच अनुग्रह नारायण रेलवे स्टेशन पर उतरनेवाले यात्रियों को लेकर 407 और ऑटो मध्य रात्रि में भी रमेश चौक पर पहुंचते हैं. ऐसे में रमेश चौक पर उतरने के बाद देर रात मुसाफिर दुविधा में फंस जाते हैं. खासकर, ठंड के मौसम में उन्हें ज्यादा परेशानी होती है. ऐसे मुसाफिरों में वृद्ध ,महिला, युवा व बच्चे शामिल होते हैं. ऐसे लोग जो औरंगाबाद शहर से होते हैं. वे रात को अपने शहर लौट कर घर चले जाते हैं, पर जो दूर प्रखंड व दूसरे जिले के मुसाफिर होते हैं, उनके लिए ठंड की रात सड़क पर काटनी मुश्किल हो रही है.
अस्पताल के पास यात्री शेड में बिखरी रहती है गंदगी : शहर के सड़कों पर रात में सवारियों को सेवा देनेवाले रिक्शा चालक एकराम, राम कृपाल, परवेश, अजीत आदि बताते हैं कि शहर में कोई ऐसा शेड नहीं, जहां पर ठंड से बचा जा सके और रात में थोड़ा आराम किया जा सके. ऐसे में सड़क पर ही रात गुजारनी पड़ती है. अस्पताल के पास एक यात्री शेड है, पर वह बहुत गंदा रहता है और दिन में यहां दुकान चलती है.
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