ममता व वात्सल्य की प्रतीक हैं बेटियां
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Nov 2016 2:49 AM (IST)
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पहल. मिश्रा ज्ञानोदय आश्रम में बेटी बचाओ कार्यक्रम को मिली सराहना अंबा : बेटियां त्याग, ममता, मर्यादा, वात्सल्य व शील की प्रतीक हैं. ये अपनी खुद की पहचान पर समाज का विकास कर सकती हैं. ये बातें बेटी बचाओ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहीं. शनिवार को मिश्रा ज्ञानोदय आश्रम अंबा में प्रभात […]
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पहल. मिश्रा ज्ञानोदय आश्रम में बेटी बचाओ कार्यक्रम को मिली सराहना
अंबा : बेटियां त्याग, ममता, मर्यादा, वात्सल्य व शील की प्रतीक हैं. ये अपनी खुद की पहचान पर समाज का विकास कर सकती हैं. ये बातें बेटी बचाओ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहीं. शनिवार को मिश्रा ज्ञानोदय आश्रम अंबा में प्रभात खबर द्वारा आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन प्रमुख धर्मेंद्र कुमार, एसएन सिन्हा कॉलेज के प्रो डाॅ रामाधार सिंह, पेंशनर समाज के जिलाध्यक्ष जगन्नाथ सिंह, महाराणा प्रताप सेवा समिति के सचिव अनिल सिंह,
संज्ञा समिति औरंगाबाद के चंद्रनरेश सिंह, डाॅ महेन्द्र पांडेय, रामप्रसिद्ध सिंह केशरी व डा सुरेंद्र मिश्र ने किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता रिटायर्ड वाणिज्यकर आयुक्त रामनरेश सिंह व संचालन शिक्षक अली हसन आलम ने किया़ प्रमुख ने कहा कि बेटियां मेहनत कर उच्च शिखर पर जायें. वक्ताओं ने प्रभात खबर अखबार की सराहना की़ वक्ताओं ने भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के लिए सबको आगे आने की बात कही. अध्यक्ष ने कहा कि जिस घर में बेटी न हो वह घर सुनसान लगता है.
डाॅ मिश्रा ने कहा कि भारत विदुषियों की धरती है. सभा को बीआरपी चंद्रशेखर प्रसाद साहू, प्रो रामजीत सिंह, वेद प्रकाश तिवारी, अजय राम आदि ने भी संबोधित किया़ मौके पर पूर्व मुखिया शिवदेव पांडेय, अजय पांडेय, गौतम कुमार, दिलीप सिंह, शिक्षक अमरेश कुमार, मो अरशद, संजय सिंहा, धीरज कुमार आदि थे. छात्रा रानी ने चाहे न प्यार देना, चाहे न दुलार देना, बाबुल जन्म से पहले मुझको ने मार देना… गीत के माध्यम से भ्रूण हत्या पर प्रहार किया. छात्रा स्मृति, उषा, मिनता, अंजलि, तान्या व सोनाली की गीत की सबों ने सराहना की. कार्यक्रम की शुरुआत में छात्रा पूजा, बबली आदि ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया़
बेटी रोशनी है : चंद्र नरेश
संज्ञा समिति औरंगाबाद के चंद्र नरेश मिश्र ने कहा कि बेटी कुल की दीपक नहीं बल्कि समाज का प्रकाश है. अनादिकाल से ही सभ्यता के विकास में नारियों का योगदान रहा है. बेटियों को उनका अधिकारी देना होगा. बेटी की अस्मिता से खिलवाड़ कर समाज आगे नहीं बढ़ सकता है. नारी ममता की सागर है.
न लें दहेज : जगन्नाथ
जगन्नाथ सिंह ने कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम तभी सफल होगा,जब समाज के लोग दहेज रहित विवाह की शुरुआत करेंगे. बेटी का बाप इसलिए चिंतित होता कि उन्हें बेटी की शादी के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा. उनके आह्वान पर संस्था के शिक्षक अंबा निवासी धीरज कुमार ने अपनी शादी में दहेज न लेने का संकल्प लिया.
बेटी बिना सृष्टि नहीं : प्रो रामाधार
प्रो रामाधार सिंह ने कहा कि बेटी के बिना सृष्टि का विकास रुक जायेगा. इतिहास गवाह है कि जब-जब कोई क्रांति हुई है, तो उसमें नारी शक्ति का योगदान अहम रहा है. यदि सीता नहीं होती तो राम मर्यादा पुरुषोतम नहीं होते. सावित्री के बिना सत्यवान का प्राण नहीं लौटता. तुलसीदास व कालीदास की ख्याति नारियों की प्रेरणा से ही हुई. इन्हें महान बनाने में रत्नावली व विदुषी का योगदान रहा है.
कर्मठता का उदाहरण बने बेटियां : डाॅ महेंद्र
डाॅ महेंद्र पांडेय ने कहा कि नारी के आत्मविश्वास में जो शक्ति है वह अतुलनीय है. आज की बेटियां मेहनत के बदौलत अपनी पहचान बना सकती हैं और समाज में नयी कीर्तिमान हासिल कर सकती हैं. कन्या भ्रूण हत्या को अभिशाप बताया़
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