सातवीं आर्थिक जनगणना शुरू, घर-परिवार व व्यवसाय की बनेगी डिजिटल आर्थिक कुंडली
Updated at : 27 Aug 2019 7:50 AM (IST)
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औरंगाबाद: जिले में सातवीं आर्थिक जनगणना पूरी तरह पेपरलेस करायी जायेगी. पहले जारी सारी तैयारियों को पूरा करने के बाद सोमवार को इसका शुभारंभ कर दिया गया. शहर से लेकर गांव-कस्बों में जाकर गणनाकर्मी लोगों से सवाल-जवाब के आधार पर आर्थिक स्थिति की गणना करेंगे. यानी एक तरह से घर-परिवार व व्यवसाय की डिजिटल आर्थिक […]
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औरंगाबाद: जिले में सातवीं आर्थिक जनगणना पूरी तरह पेपरलेस करायी जायेगी. पहले जारी सारी तैयारियों को पूरा करने के बाद सोमवार को इसका शुभारंभ कर दिया गया. शहर से लेकर गांव-कस्बों में जाकर गणनाकर्मी लोगों से सवाल-जवाब के आधार पर आर्थिक स्थिति की गणना करेंगे. यानी एक तरह से घर-परिवार व व्यवसाय की डिजिटल आर्थिक कुंडली तैयार की जायेगी.
सांख्यिकी निदेशालय के स्तर से यह जनगणना करायी जा रही है. इस बार भारत सरकार द्वारा कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से यह काम कराया जायेगा. कलेक्ट्रेट परिसर में अधिकारियों व कर्मियों की बैठक हुई, जिसमें एएसओ राकेश कुमार प्रिय ने आर्थिक जनगणना की शुरुआत की.
इस दौरान एएसएसओ नारायण प्रसाद समेत सीएससी के दोनों जिला प्रबंधक शाह आलम व यशपाल कुमार मौजूद थे. डिजिटल आर्थिक जनगणना की विस्तृत जानकारी देने के बाद वीएलई कुमार उज्ज्वल, राणा रंजीत, रवींद्र कुमार, दयाभूषण आर्य व राकेश कुमार आदि को प्रशिक्षण दिया गया.
जिलास्तरीय समन्वय समिति करेगी मॉनीटरिंग : डिजिटल तरीके करायी जा रही आर्थिक जनगणना की मॉनीटरिंग जिला स्तरीय समन्वय समिति करेगी. डीएम राहुल रंजन महिवाल इस समिति के अध्यक्ष हैं.
जबकि, उप विकास आयुक्त, जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक, एनएसएसओ व फील्ड ऑपरेशन डिवीजन के प्रतिनिधि व जिला सूचना अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल हैं. जिला सांख्यिकी पदाधिकारी इस समिति के सदस्य समिति हैं. समिति द्वारा जिले में अार्थिक गणना की तैयारी, प्रगति व बाधाओं पर नजर रखी जायेगी.
उद्यमियों के श्रम व पूंजी का लगाया जायेगा पता
पदाधिकारियों ने बताया कि जितने इंटरप्राइजेज हैं, जो गैर कृषि कार्य में लगे हैं उनकी जानकारी हासिल की जायेगी. सरकारी कार्य में लगे लोगों की आर्थिक जनगणना नहीं की जायेगी. इसके जरिये उद्यमियों के माध्यम से यह पता लगाया जायेगा कि पूंजी, श्रम, आमदनी की स्थिति क्या है. असंगठित उद्यमियों का पता लगाया जायेगा. प्रगणनों को मोबाइल एप के बारे में भी गहनता से जानकारी दी गयी.
मोबाइल एप पर आधारित आर्थिक जनगणना का काम छह महीनों में होगा पूरा
जिले में छह महीने में आर्थिक जनगणना के काम को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि प्रत्येक प्रखंडों में आर्थिक जनगणना की जायेगी.
इस बार जनगणना मोबाइल एप पर आधारित होगा. जनगणना का 30 फीसदी काम प्रगणकों को फील्ड में जाकर करना होगा. जनगणना के तकनीकी पहलुओं के बारे में भी विस्तार से बताया गया. अधिकारियों ने बताया कि देश में पहली बार आर्थिक जनगणना 1977 में करायी गयी थी. तब से अब तक छह बार गणना हो चुकी है. इस बार देश में सातवीं जनगणना करायी जा रही है. इसके माध्यम से सरकार देश की आर्थिक व्यवस्था के बारे में जानकारी हासिल करेगी.
जिले में पहले चरण में होगी आर्थिक जनगणना
जिले में पहले चरण में आर्थिक जनगणना करायी जायेगी. जिला प्रबंधक यशपाल कुमार ने बताया कि बिहार में तीन चरणों में आर्थिक जनगणना करायी जायेगी.
पहले चरण में औरंगाबाद के साथ-साथ अरवल, बांका, भागलपुर, भोजपुर, जमुई, कैमूर, नालंदा व शेखपुरा में जनगणना करायी जायेगी. पहला लेवल कॉमन सर्विस सेंटर के संचालक सुपरवाईजर होंगे. दूसरे लेबल के सुपरवाईजर प्रखंड स्तर व जिला स्तर के अधिकारी होंगे. एक पंचायत में पांच से 10 लोग सर्वेक्षण के कार्य में भाग लेंगे.
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