ट्रैफिक लाइट न होने से यातायात बदहाल
Author Prabhat khabar digital desk
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औरंगाबाद नगर : जिला मुख्यालय सहित जिले के किसी भी शहरी इलाके में ट्रैफिक लाइट नहीं लगाये गये हैं. हद तो यह है कि हाइवे पर भी यह व्यवस्था कुछ इलाकों में नहीं दिखती. मुख्य चौक-चौराहों पर लोग अपने विवेक से इस पार से उस पार होते हैं. जिन चौक-चौराहों पर अधिक भीड़ होती है […]
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औरंगाबाद नगर : जिला मुख्यालय सहित जिले के किसी भी शहरी इलाके में ट्रैफिक लाइट नहीं लगाये गये हैं. हद तो यह है कि हाइवे पर भी यह व्यवस्था कुछ इलाकों में नहीं दिखती. मुख्य चौक-चौराहों पर लोग अपने विवेक से इस पार से उस पार होते हैं. जिन चौक-चौराहों पर अधिक भीड़ होती है या जिधर से वरीय पदाधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है, वहां होमगार्ड व बिहार पुलिस के जवान ट्रैफिक को नियंत्रित करते नजर आते हैं.
जिले की सीमा में हाइवे से लेकर शहरी इलाकों में संकेतक चिह्न का पूरी तरह से अभाव है. स्कूल-कॉलेज, अस्पताल आदि के पास कहीं भी संकेतक इस जिले में देखने को नहीं मिलते हैं. शहर में यातायात व्यवस्था को लेकर समाजसेवी जगन्नाथ सिंह कहते हैं कि यहां की यातायात पूरी तरह से लोगों की मर्जी के हिसाब से तय होती है. इस पर किसी का नियंत्रण नहीं है.
यहां यातायात की व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है. अधिवक्ता मनोज मिश्रा कहते हैं कि यहां की यातायात व्यवस्था का मतलब पूरी तरह मनमर्जी है. ऐसे में इस सुविधा के बारे में पूछना ही बेकार है. इधर डीटीओ अनिल कुमार सिन्हा ने बताया कि लोकसभा चुनाव के कारण परेशानी बढ़ी हुई है. जैसे ही चुनाव की प्रक्रिया समाप्त होगी वैसे ही कार्रवाई की जायेगी.
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