अरवल में डेढ़ करोड़ से बनेगा डॉग शेल्टर, आवारा कुत्तों के आतंक से मिलेगी राहत
नगर परिषद | Prabhat Khabar Network
आवारा कुत्तों के आतंक से जल्द मिलेगी राहत. अरवल में 1.5 करोड़ रुपये की लागत से डॉग शेल्टर का निर्माण किया जाएगा. यहां कुत्तों के भोजन, उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था होगी.
Dog shelter will be built in Arwal : अरवल शहर के नजदीक भदासी के पास आवारा कुत्तों के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से डॉग शेल्टर का निर्माण कराया जायेगा. नगर परिषद ने इसके लिए 110×80 वर्गफुट जमीन चिह्नित कर ली है. शेल्टर में आवारा कुत्तों को रखने के साथ उनके भोजन, उपचार, टीकाकरण और पुनर्वास की व्यवस्था की जायेगी. जमीन मिलने के बाद इसका डीपीआर तैयार कर शहरी विकास एवं आवास विभाग को भेज दिया गया है. विभाग से मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू होने की बात नगर परिषद की ओर से कही गयी है.
सुरक्षित स्थान पर रखे जायेंगे आवारा कुत्ते
नगर परिषद का उद्देश्य शहर में सरकारी अस्पतालों, पुलिस स्टेशनों, न्यायालयों और अन्य सरकारी कार्यालयों के परिसरों में घूमने वाले आवारा कुत्तों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करना है. इन जगहों पर कुत्तों की मौजूदगी से आम लोगों को परेशानी होती है. कई बार इनके कारण सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी उत्पन्न होते हैं. डॉग शेल्टर बनने के बाद इन कुत्तों को नियंत्रित और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा.
खाने और उपचार की होगी व्यवस्था
प्रस्तावित डॉग शेल्टर को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जायेगा. यहां कुत्तों के रहने, खाने, इलाज और पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की जायेगी. नगर परिषद का मानना है कि इससे शहर में आवारा कुत्तों की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी. साथ ही, पशु कल्याण की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण होगी.
रोजाना 30 से 40 लोगों को लग रहा एंटी रेबीज टीका
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. कुत्तों के काटने के बाद लोग इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंच रहे हैं, जहां उन्हें एंटी रेबीज वैक्सीन के साथ जरूरत के अनुसार टेटनस का इंजेक्शन भी लगाया जाता है. बताया गया है कि सदर अस्पताल में प्रतिदिन करीब 30 से 40 लोगों को रेबीज का टीका लगाया जा रहा है.
रात में गलियों से गुजरना भी हो रहा मुश्किल
स्थानीय लोगों के अनुसार, शहर के विभिन्न मोहल्लों और गलियों में बड़ी संख्या में आवारा कुत्ते घूमते रहते हैं. लोगों को देखकर कई बार कुत्ते भौंकने और गुर्राने लगते हैं तथा पीछा करते हुए हमलावर भी हो जाते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों और अकेले लोगों पर कुत्तों के हमले की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं. रात के समय गलियों से गुजरने में लोगों को परेशानी होती है.
प्रशिक्षित कर्मचारियों का पद नहीं
नगर परिषद के पास फिलहाल आवारा पशुओं की धरपकड़ के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों का कोई अलग पद सृजित नहीं है. वहीं, आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या के बावजूद उनके नियंत्रण के लिए नगर परिषद और जिला पशुपालन विभाग के स्तर पर सीमित व्यवस्था होने की बात सामने आ रही है. इस कारण शहर में आवारा कुत्तों की समस्या लगातार बढ़ रही है.
एबीसी सेंटर के लिए टेंडर प्रक्रिया में
नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मोनू कुमार ने बताया कि आवारा कुत्तों को पकड़ने और उनके टीकाकरण के लिए एबीसी सेंटर के निर्माण को लेकर टेंडर प्रक्रिया में है. डॉग शेल्टर के निर्माण की प्रक्रिया भी विभागीय मंजूरी के बाद आगे बढ़ायी जायेगी.
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