भोजपुर : शाहपुर में गंगा उफान पर, बाढ़ का खतरा बढ़ा; 20 साल में 7 बार डूबे गांव, बर्बाद हुई फसलें

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शाहपुर के भरौली स्थित धर्मावती नदी में फैलते हुए बाढ़ का पानी

गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से शाहपुर प्रखंड में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है. दियारा क्षेत्र के हजारों एकड़ में खड़ी फसलें डूबने की कगार पर हैं. पिछले 20 सालों में बार-बार आई बाढ़ ने लोगों की जिंदगी तबाह कर दी है.

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Ganga River Water Level in Shahpur : गंगा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने के कारण प्रखंड क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है. पिछले कई दिनों से गंगा नदी के जलस्तर में हो रही वृद्धि के कारण शाहपुर प्रखंड क्षेत्र में नदी उफान पर है और मंडरा रहे बाढ़ के खतरे से लोगों में हड़कंप मचा है, जिससे दियारा क्षेत्र के लोग सहमे हुए हैं.

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बाढ़ के पानी से हजारों एकड़ की खड़ी फसलों के नष्ट होने की आशंका जताई जा रही है. गंगा के जलस्तर में वृद्धि के साथ ही शाहपुर के दियारा के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे फैलने की कगार पर है.

अंचल क्षेत्र के लच्छूटोला, दामोदरपुर, बहोरनपुर, सुहियां, बरिसवन, सेमरिया, हरिहरपुर, गौरा, करजा व लालू का डेरा सहित कुछ अन्य पंचायतों में भी बाढ़ के पानी से खड़ी फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है. वहीं, शाहपुर प्रखंड स्थित धर्मावती नदी का पानी तेजी से बढ़ते हुए खेतों में घुसने लगा है.

शाहपुर के सहजौली-हिरखी पिपरा पुल पर चढ़ने के कगार पर बाढ़ का पानी
शाहपुर के सहजौली-हिरखी पिपरा पुल पर चढ़ने के कगार पर बाढ़ का पानी

पिछले दो दशकों में बाढ़ की बार-बार त्रासदी

पिछले 20 वर्षों के दौरान क्षेत्र के लोगों ने कई बार त्रासदी झेली है. साल 2003, 2013, 2016, 2019, 2021, 2024 एवं 2025 में आई बाढ़ के दौरान सरकार द्वारा सभी तरह के खर्चों को मिलाकर करीब 200 करोड़ रुपए से ज्यादा बांटे जा चुके हैं.

बाढ़ पीड़ितों का दर्द और आशियाने का उजड़ना

प्रखंड का पूरा क्षेत्र दियारा इलाके के नाम से प्रसिद्ध है, जहां बसने वाले लोग प्रत्येक वर्ष बाढ़ की त्रासदी से ग्रस्त होते हैं. यह वैसे लोग हैं जिनके सपने उनकी आंखों के सामने बाढ़ के पानी में बह जाते हैं, घर धंस जाते हैं और वे बेघर हो जाते हैं.

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दियारा क्षेत्र के लोग प्रत्येक वर्ष बाढ़ विभीषिका से दो-चार होते रहते हैं. कभी उनके अरमान और सपने बाढ़ में बह जाते हैं, तो कभी अथक परिश्रम से पेट काटकर बनाए गए आशियाने नष्ट हो जाते हैं.

कभी उन पर विस्थापित की मुहर लग जाती है, तो कभी बाढ़ पीड़ित का ठप्पा. बावजूद इसके, जो सरकार राहत के नाम पर कुछ खाद्यान्न तथा नावों का परिचालन कराकर उनका नामकरण अपनी परिभाषा के अनुरूप देती है, वह उनके जेहन पर गहरा घाव छोड़ जाता है.

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गंगा के जलस्तर वृद्धि का संवेदनशील गांवों पर प्रभाव

प्रखंड के लच्छूटोला, सारंगपुर, सुरेमनपुर, जवइनिया, नंदलाल के डेरा, भूसहूला, गंगापुर, टिकापुर, चक्की नौरंगा, रामदयाल ठाकुर के डेरा, पचकौड़ी डेरा, करीमन ठाकुर का डेरा, बुझाराय के डेरा, राजपुर, चारघाट, चनउर, लक्ष्मणपुर, गोविंदपुर, बारिसवन, सिमरिया, पांडेपुर, रतनपुरा, लालू के डेरा, सुहिया, पीपरा, होरिल छपरा, देवमलपुर, रामकरही, सइया, मरचइया, माधोपुर, काशी डेरा सहित सैकड़ों गांवों पर गंगा के जलस्तर में थोड़ी सी वृद्धि के साथ ही असर पड़ने लगता है.


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नरेद्र प्रसाद सिंह

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By नरेद्र प्रसाद सिंह

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