Arrah News: गंगा दशहरा पर तपोधाम नथमलपुर में नौ योगेश्वर कथा, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

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गंगा दशहरा पर उमड़े श्रधालु

गंगा दशहरा पर आरा के बड़हरा प्रखंड के तपोधाम नथमलपुर में आयोजित नौ योगेश्वर कथा में भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. कथावाचक महेंद्र स्वामी ने भक्ति, वैराग्य और आत्मज्ञान का महत्व बताते हुए भारतीय संस्कृति अपनाने का संदेश दिया. भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय रहा. श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और पेयजल की व्यवस्था की गई.

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Arrah News: गंगा दशहरा के पावन अवसर पर आरा के बड़हरा प्रखंड के तपोधाम नथमलपुर में आयोजित नौ योगेश्वर कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. सुबह से ही कथा स्थल पर भक्तों का तांता लगा रहा और पूरा वातावरण भक्ति, भजन-कीर्तन तथा आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया. श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं उत्साह के साथ कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया.

महेंद्र स्वामी जी की कथा से मंत्रमुग्ध हो गए श्रधालु

राष्ट्रीय कथावाचक महेंद्र स्वामी ने कथा वाचन करते हुए भगवान भक्ति, धर्म और आत्मज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि नौ योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त और महान ज्ञानी थे, जिन्होंने राजा निमि को भक्ति, वैराग्य और मोक्ष का मार्ग बताया था. कथा के श्रवण से मनुष्य के भीतर सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं और भगवान के प्रति आस्था मजबूत होती है.

उन्होंने बताया कि पुरुषोत्तम मास में नौ योगेश्वर कथा का विशेष महत्व माना गया है. अपने प्रवचन में महेंद्र स्वामी ने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं और मानसिक तनाव में उलझता जा रहा है. ऐसे समय में धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं. नौ योगेश्वर कथा लोगों को आध्यात्मिक चेतना से जोड़कर जीवन जीने की सही राह दिखाती है.

भारतीय संस्कृति और सनातन पर बल

कथावाचक ने युवाओं से भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि माता-पिता का सम्मान, गौसेवा, गरीबों की सहायता और प्रकृति संरक्षण भी सच्ची भक्ति का हिस्सा है. कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए और जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा. कार्यक्रम में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद एवं पेयजल की समुचित व्यवस्था की गई थी.

कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि, शांति एवं विश्व कल्याण की कामना करते हुए भगवान से प्रार्थना की.

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निखिल अनुराग

लेखक के बारे में

By निखिल अनुराग

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.

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