आरा में पॉलिथीन बिक्री पर नहीं लग रही रोक, नालियां जाम और पशुओं की जान पर खतरा

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कचरे में पड़े पॉलिथीन खाती गाय

आरा शहर में पॉलिथीन प्रतिबंध बेअसर साबित हो रहा है. खुलेआम बिक्री और उपयोग से नालियां जाम हो रही हैं तथा पशु पॉलिथीन खाकर बीमार पड़ रहे हैं. नगर निगम की लापरवाही और नियमित सफाई के अभाव से समस्या गंभीर बनी हुई है. लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई और जांच अभियान चलाने की मांग की है.

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Arrah News: (नरेन्द्र प्रसाद सिंह की रिपोर्ट) सरकार द्वारा पॉली कैरी बैग की बिक्री, भंडारण एवं उपयोग पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए जाने के वर्षों बाद भी आरा शहर में खुलेआम पॉलिथीन का इस्तेमाल जारी है. नगर क्षेत्र में धड़ल्ले से पॉलिथीन की बिक्री, भंडारण और उपयोग हो रहा है, लेकिन इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है. इसका असर शहर की सफाई व्यवस्था और पशुओं के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई दे रहा है.

नालियां जाम होने की बड़ी वजह बन रही पॉलिथीन

शहर की नालियों में जमा पॉलिथीन नगर निगम की सफाई व्यवस्था की पोल खोल रही है. नियमित सफाई नहीं होने से नालियों में कचरा भर जाता है और पानी सड़क पर बहने लगता है. जब लंबे समय बाद नालियों की सफाई की जाती है, तब बड़ी मात्रा में पॉलिथीन और अन्य प्लास्टिक कचरा निकलता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पॉलिथीन के कारण नालियां बार-बार जाम हो रही हैं, जिससे जल निकासी की समस्या गंभीर होती जा रही है. बावजूद इसके प्रतिबंध को प्रभावी बनाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं.

पॉलिथीन खाकर बीमार हो रहे पशु

शहर में खुले घूमने वाले पशु कचरे में भोजन तलाशते हैं और इस दौरान पॉलिथीन भी खा लेते हैं. पशुपालकों द्वारा दूध निकालने के बाद जानवरों को खुला छोड़ दिया जाता है, जिससे वे सड़कों और कूड़े के ढेरों में भटकते रहते हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार पॉलिथीन खाने से पशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है और कई बार उनकी मौत तक हो जाती है. लोगों का कहना है कि एक ओर पशुपालक जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं, वहीं नगर निगम की लापरवाही से समस्या और बढ़ रही है.

अपशिष्ट प्रबंधन उपविधि बनी, लेकिन पालन नहीं

पॉलिथीन प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए सरकार की ओर से अपशिष्ट प्रबंधन उपविधि का गठन भी किया गया था, ताकि प्लास्टिक उपयोग पर नियंत्रण लगाया जा सके. इसके बावजूद बाजारों में बिना रोक-टोक पॉलिथीन का इस्तेमाल जारी है. शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि पॉलिथीन बिक्री और उपयोग पर सख्ती से रोक लगाई जाए तथा नियमित जांच अभियान चलाकर नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए.

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निखिल अनुराग

लेखक के बारे में

By निखिल अनुराग

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.

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