भोजपुर का ऐतिहासिक कोईलवर पुल अपग्रेड हो रहा, 164 वर्ष पुरानी धरोहर बनेगी और मजबूत
Published by : Anjani Pandey Updated At : 12 Jun 2026 6:25 AM
कोईलवर पुल.
Arrah News : भोजपुर जिले के बिहटा और कोईलवर स्टेशनों के बीच सोन नदी पर स्थित ऐतिहासिक कोईलवर रेल-सह-सड़क पुल (अब्दुल बारी पुल) अपग्रेड हो रहा है. वर्ष 1862 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान निर्मित यह पुल आज भी रेल एवं सड़क यातायात के लिए महत्वपूर्ण कड़ी बना हुआ है. नीचे पढ़िए पूरी खबर…
आरा से आशुतोष पाण्डेय की रिपोर्ट
Arrah News : कोईलवर रेल-सह-सड़क पुल (अब्दुल बारी पुल) दानापुर रेल मंडल के हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेल मार्ग पर स्थित है और बिहार के भोजपुर क्षेत्र को राजधानी पटना से जोड़ता है. करीब 1.44 किलोमीटर लंबे इस डबल डेकर पुल के ऊपरी हिस्से से रेलवे ट्रैक गुजरती है, जबकि निचले हिस्से से सड़क यातायात संचालित होता है. निर्माण के समय इसमें उच्च गुणवत्ता वाले रॉट आयरन का उपयोग किया गया था, जिसके कारण इसके पिलर आज भी मजबूती के साथ खड़े हैं. रेलवे अधिकारियों के अनुसार पुल की सुरक्षा एवं संरचनात्मक मजबूती सुनिश्चित करने के लिए चौबीसों घंटे पेट्रोलिंग की जाती है. साथ ही प्रतिदिन की-मैन द्वारा इसकी फिटिंग्स और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की जाती है.
1857 के विद्रोह के कारण निर्माण में हुआ था विलंब
बताया जाता है कि वर्ष 1856 में इस पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, लेकिन 1857 के विद्रोह के कारण इसमें विलंब हुआ. बाद में भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड एल्गिन ने वर्ष 1862 में इस पुल का उद्घाटन किया. जेम्स मीडोज रेंडेल और सर मैथ्यू डिग्बी वायट द्वारा डिजाइन किया गया यह पुल उस समय एशिया का सबसे लंबा पुल माना जाता था. यह भारत का सबसे पुराना चालू रेल-सह-सड़क पुल भी है. वर्ष 1982 में ऑस्कर पुरस्कार विजेता फिल्म ‘गांधी’ में भी इस पुल को प्रमुखता से दिखाया गया था.
पुल पर लगाए जा रहे नए डिजाइन के एच-बीम स्लीपर
वर्तमान में रेलवे द्वारा पुल पर नए डिजाइन के एच-बीम स्लीपर लगाने, चेकर प्लेट बदलने तथा गर्डरों की पेंटिंग सहित कई महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि उन्नयन कार्य पूरा होने के बाद यह ऐतिहासिक पुल आने वाले कई दशकों तक सुरक्षित एवं सुचारु रूप से उपयोग में बना रहेगा. सोन नदी के दोनों किनारों को जोड़ने वाला यह पुल न केवल परिवहन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि बिहार की ऐतिहासिक और इंजीनियरिंग विरासत का भी प्रतीक है.
वशिष्ठ नारायण सिंह सेतु से यातायात हुआ आसान
ऐतिहासिक अब्दुल बारी पुल के समांतर ही सोन नदी पर एक नया फोरलेन सड़क पुल ‘वशिष्ठ नारायण सिंह सेतु’ भी बनकर तैयार हो चुका है, जिससे अब इस मार्ग पर सड़क और रेल यातायात पूरी तरह अलग हो गए हैं. इसके चालू होने से पटना से भोजपुर, बक्सर और उत्तर प्रदेश आने-जाने वाले वाहनों को पुराने पुल पर लगने वाले भीषण जाम से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई है और इस पूरे क्षेत्र का आवागमन बेहद सुगम हो गया है.
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By Anjani Pandey
अंजनी पांडेय बिहार की डिजिटल मीडिया में कार्य करने का 10+ वर्षों का अनुभव रखते हैं। उन्होंने पटना में दैनिक भास्कर और लाइव सिटीज़ जैसे प्रमुख डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न संपादकीय भूमिकाओं में काम किया है। उन्हें न्यूज़रूम संचालन, कंटेंट रणनीति और डिजिटल संपादन का गहरा अनुभव है। मई 2026 में उप मुख्य कंटेंट राइटर और टीम लीड के तौर पर प्रभात खबर से जुड़ने से पहले करीब डेढ़ साल तक वे राजनीतिक संचार और जनसंपर्क से भी जुड़े रहे हैं। राजनीति, अपराध और समसामयिक घटनाओं से जुड़ी खबरों के आइडिएशन और संपादन में उनकी विशेष रुचि है।
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