जेनिथ पब्लिक स्कूल में छात्राओं के लिए पॉक्सो एक्ट व किशोरावस्था जागरूकता कार्यक्रम

Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 05 Jun 2026 11:41 AM

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डॉ. रेशमा अली व डॉ. कुद्दूस के साथ छात्राएं

POCSO Act: अररिया जिले के जोगबनी स्थित जेनिथ पब्लिक स्कूल में छात्राओं को उनके कानूनी अधिकारों, सुरक्षा और किशोरावस्था के शारीरिक-मानसिक बदलावों के प्रति जागरूक करने के लिए एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया.

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POCSO Act: भारत-नेपाल सीमा पर स्थित जोगबनी के जेनिथ पब्लिक स्कूल में छात्राओं के सर्वांगीण विकास, सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति चेतना जगाने के उद्देश्य से एक दिवसीय विशेष जागरूकता कार्यक्रम का सफ़ल आयोजन किया गया. इस कार्यशाला का मुख्य विषय ‘पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और किशोरावस्था (Adolescence) के दौरान होने वाले हार्मोनल व व्यावहारिक बदलाव’ रहा. कार्यक्रम में विद्यालय की छात्राओं के अलावा महिला शिक्षिकाओं और प्रबुद्ध अभिभावकों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया, ताकि वे बढ़ती उम्र में बच्चियों के भीतर आने वाले संकोच को दूर कर उन्हें एक सुरक्षित माहौल प्रदान कर सकें.

विशेषज्ञों का हुआ गर्मजोशी से स्वागत; निदेशक ने कहा- जीवन के मूल्य सिखाना भी स्कूल का काम

  • मुख्य अतिथि और संचालन: कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में फारबिसगंज की प्रख्यात स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. रेशमा अली और विशिष्ट अतिथि के रूप में विख्यात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कुद्दूस अली उपस्थित रहे. पूरे मंच का कुशल संचालन स्कूल की शिक्षिका पायल लड्ढा ने किया.
  • अतिथियों का अभिनंदन: कार्यक्रम की शुरुआत में विद्यालय के निदेशक खुर्शीद खान ने दोनों विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुके, शॉल और स्मृति चिन्ह (मोमेंटो) भेंट कर उनका स्वागत किया. निदेशक ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में किताबी ज्ञान के साथ-साथ बेटियों को उनके कानूनी अधिकार, शारीरिक स्वास्थ्य और आत्मरक्षा की व्यावहारिक जानकारी देना बेहद जरूरी है.

मासिक धर्म और स्वच्छता पर खुलकर बोलीं डॉ. रेशमा; संकोच मिटाने की सलाह

डॉ. रेशमा अली के मुख्य टिप्स: छात्राओं को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध लेडी डॉक्टर रेशमा अली ने किशोरावस्था (प्यूबर्टी) में प्रवेश करते ही शरीर और मन में होने वाले स्वाभाविक बदलावों पर विस्तृत प्रकाश डाला. उन्होंने मेंस्ट्रुअल हाइजीन (मासिक धर्म स्वच्छता), व्यक्तिगत साफ-सफाई, संतुलित पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और इस उम्र में होने वाले मूड स्विंग्स (Aesthetic Mood Swings) के दौरान आत्मविश्वास बनाए रखने के वैज्ञानिक तरीके बताए. उन्होंने छात्राओं को सचेत किया कि पीरियड्स या शरीर में होने वाले किसी भी बदलाव को लेकर डरें या शर्माएं नहीं; यह एक पूरी तरह सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है. किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक समस्या होने पर अपनी माता, शिक्षिका या डॉक्टर से बिना किसी झिझक के खुलकर बात करें.

डॉ. कुद्दूस ने समझाया सुरक्षित माहौल का महत्व, पायल लड्ढा ने दी पॉक्सो एक्ट की जानकारी

  • अधिकारों के प्रति सजगता: बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कुद्दूस अली ने बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए घर और स्कूल में एक तनावमुक्त व सुरक्षित माहौल विकसित करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि जब तक बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों और सुरक्षा नियमों का पता नहीं होगा, तब तक वे किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार की स्थिति में सही कदम उठाने या आवाज उठाने में सक्षम नहीं हो पाएंगे.
  • गुड टच और बैड टच की पहचान: कार्यक्रम की संचालिका पायल लड्ढा ने देश के कड़े कानून पॉक्सो एक्ट (लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) की सरल भाषा में व्याख्या की. उन्होंने प्रोजेक्टर और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से छात्राओं को ‘गुड टच और बैड टच’ के बीच का अंतर बारीकी से समझाया. उन्होंने बच्चियों को मंत्र दिया कि यदि कोई भी व्यक्ति (चाहे वह परिचित ही क्यों न हो) उन्हें असहज महसूस कराए, तो तुरंत ‘नो’ कहें और बिना डरे अपने माता-पिता या स्कूल प्रबंधन जैसे भरोसेमंद लोगों को सूचित करें.

खास रहा प्रश्नोत्तर सत्र; छात्राओं ने बेझिझक पूछे वैज्ञानिक सवाल

इस पूरे सेमिनार का सबसे जीवंत और प्रभावी हिस्सा इसका प्रश्नोत्तर सत्र (Q&A Session) रहा. इसमें हाई स्कूल की छात्राओं ने किशोरावस्था के दौरान होने वाले डिप्रेशन, मासिक धर्म की अनियमितता, त्वचा संबंधी समस्याओं, परीक्षा के तनाव, आत्मविश्वास की कमी और पॉक्सो कानून के तहत सुरक्षा के उपायों को लेकर विशेषज्ञों से बेझिझक होकर एक से बढ़कर एक सवाल पूछे. मुख्य अतिथि डॉ. रेशमा अली और डॉ. कुद्दूस अली ने सभी छात्राओं के कौतूहल और प्रश्नों के बेहद सरल, तार्किक और चिकित्सकीय रूप से सटीक जवाब देकर उनकी शंकाओं का समाधान किया. समापन पर जेनिथ पब्लिक स्कूल परिवार ने दोनों आगंतुक डॉक्टरों के प्रति आभार व्यक्त किया. उपस्थित शिक्षिकाओं और छात्राओं ने इस सत्र को बेहद ज्ञानवर्धक और आंखें खोलने वाला बताया. स्कूल प्रबंधन ने घोषणा की कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक सशक्तिकरण के लिए आने वाले दिनों में भी इस तरह के व्यावहारिक जागरूकता सत्र नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहेंगे.

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लेखक के बारे में

By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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