अररिया में 148 अनुदानित मदरसा और संस्कृत विद्यालयों की होगी स्थलीय जांच, DM ने गठित की 3 सदस्यीय टीम

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डीईओ संजय कुमार

Madrasa Sanskrit School: बिहार सरकार के कड़े रुख के बाद अररिया जिले में कागजों पर चल रहे फर्जी शिक्षण संस्थानों पर गाज गिरनी तय हो गई है. जिला पदाधिकारी (DM) ने जिले के सभी 9 प्रखंडों में अनुदानित मदरसों और संस्कृत विद्यालयों की भौतिक संरचना व शिक्षकों की सत्यता जांचने के लिए तीन सदस्यीय विशेष टीम का गठन कर दिया है.

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अररिया से कमर आलम की रिपोर्ट

Madrasa Sanskrit School: बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के निर्देश पर अररिया जिले से एक बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आई है. जिले में सरकारी वेतन सहायता और विभिन्न अनुदानों पर संचालित हो रहे तमाम गैर-सरकारी अनुदानित मदरसों और संस्कृत विद्यालयों की अब बड़े पैमाने पर स्थलीय जांच शुरू होने जा रही है. इस संबंध में अररिया के जिला पदाधिकारी ने 3 जून 2026 को एक आधिकारिक पत्र जारी कर जिले के सभी 9 प्रखंडों में एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय जांच टीम गठित करने का कड़ा आदेश दिया है. इस विशेष कार्यबल को अगले 10 दिनों के भीतर सभी तय बिंदुओं पर फोटोग्राफ्स और वीडियो साक्ष्यों के साथ अपनी विस्तृत रिपोर्ट जिला शिक्षा कार्यालय को सौंपनी होगी.

कागजों पर चल रहे फर्जी संस्थानों पर कड़ा प्रहार; 128 मदरसे और 20 स्कूल रडार पर

  • संस्थानों का विवरण: अररिया जिले में वर्तमान में कुल 128 अनुदानित मदरसे और 20 संस्कृत विद्यालय सरकारी वित्तीय सहायता पर संचालित हो रहे हैं.
  • जांच की मुख्य वजह: शिक्षा विभाग को लगातार गोपनीय शिकायतें मिल रही थीं कि सरकार से मोटा अनुदान और शिक्षकों के वेतन की राशि उठाने वाले कुछ संस्थान धरातल के बजाय सिर्फ कागजों और फाइलों में ही चल रहे हैं. इसी फर्जीवाड़े और वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए इस भौतिक सत्यापन का फैसला लिया गया है.
  • किसके निर्देश पर एक्शन: यह पूरी कार्रवाई शिक्षा विभाग, बिहार के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल के कड़े इनपुट और विभागीय आदेश पर जिला स्तर पर लागू की जा रही है.

बीडीओ और बीईओ संभालेंगे कमान; इन 13 मुख्य बिंदुओं पर तैयार होगी कुंडली

जांच टीम का स्वरूप: प्रत्येक प्रखंड में बनाई गई इस तीन सदस्यीय टीम की कमान संबंधित प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) और क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित सरकारी उच्च विद्यालय के वरीय (सीनियर) शिक्षक संयुक्त रूप से संभालेंगे. यह टीम बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे विद्यालयों में धमक कर औचक निरीक्षण करेगी.

संस्थानों की निष्पक्ष जांच के लिए जिला प्रशासन ने बकायदा एक प्रपत्र जारी किया है, जिसके तहत मुख्य रूप से निम्नलिखित 13 बिंदुओं की बारीकी से स्क्रूटनी की जाएगी:
  • मदरसा या विद्यालय का नाम, सटीक पता और उसका स्थापना वर्ष.
  • संस्थान का आधिकारिक यू-डायस (U-DISE) कोड और मिलने वाले अनुदान की श्रेणी.
  • स्कूल के नाम पर उपलब्ध भूमि (जमीन) का पूरा कानूनी विवरण और जमाबंदी.
  • भौतिक संरचना (भवन, शौचालय, क्लासरूम, पेयजल और ब्लैकबोर्ड की स्थिति).
  • सरकार द्वारा स्वीकृत शिक्षक पद बनाम वर्तमान में कार्यरत अनुमोदित शिक्षक-कर्मियों की वास्तविक संख्या.
  • वर्तमान प्रबंध समिति (मैनेजमेंट कमेटी) के पदाधिकारियों की वैधता.
  • वर्गवार (क्लास-वाइज) नामांकित छात्रों की संख्या और निरीक्षण के दिन उनकी वास्तविक उपस्थिति.

दोषियों पर दर्ज होगी प्राथमिकी: जिला शिक्षा पदाधिकारी

शिक्षा भवन, अररिया में इस महा-अभियान की जानकारी देते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) संजय कुमार ने बताया कि इस व्यापक स्क्रूटनी का मुख्य उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व का सही उपयोग सुनिश्चित करना और ग्रामीण बच्चों को मिल रही शिक्षा की गुणवत्ता का आकलन करना है.

डीईओ ने स्पष्ट किया कि जिले में अधिकांश संस्थान सरकार की गाइडलाइंस के अनुरूप बहुत ही पारदर्शी और बेहतर ढंग से काम कर रहे हैं. लेकिन, जो भी संस्थान केवल कागजों पर फर्जी छात्र और फर्जी शिक्षकों की सूची दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगा रहे हैं, उन्हें इस जांच के जरिए चिन्हित किया जाएगा. रिपोर्ट आते ही ऐसे फर्जी संस्थानों की मान्यता रद्द करने, अनुदान रोकने और उनके संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी की कड़क कानूनी प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की अग्रतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

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दिव्यांशु प्रशांत

लेखक के बारे में

By दिव्यांशु प्रशांत

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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