पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर अररिया में प्रदर्शन: प्रेस भवन से समाहरणालय तक निकाला पैदल मार्च
अररिया के पत्रकारों ने सहरसा की घटना के विरोध में एकजुट होकर प्रदर्शन किया. उन्होंने पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून की मांग उठाई और शांति मार्च निकालकर ज्ञापन सौंपा. यह घटना प्रेस की स्वतंत्रता पर खतरे की घंटी मानी जा रही है.
सहरसा में प्रभात खबर के पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार व मारपीट की निंदनीय घटना तथा देश के विभिन्न हिस्सों में मीडियाकर्मियों पर लगातार हो रहे हमलों, अभद्रताओं और दबाव की घटनाओं के खिलाफ अररिया के पत्रकारों ने एकजुट होकर हुंकार भरी है.
गुरुवार को जिला मुख्यालय स्थित प्रेस भवन में जिला पत्रकार संघ अररिया की एक आपात एवं महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले के तमाम प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया संस्थानों से जुड़े संवाददाताओं व संपादकीय प्रभारियों ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई.
प्रेस की स्वतंत्रता और सुरक्षा के लिए कड़े कानूनी प्रावधान अनिवार्य: मंटू भगत
बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष राकेश कुमार उर्फ मंटू भगत ने सहरसा की घटना की कड़े शब्दों में निंदा की.
उन्होंने कहा कि चौथे स्तंभ पर लगातार हो रहे हमले लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी हैं. सहरसा मामले की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को अविलंब जेल भेजा जाना चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. उन्होंने सरकार से पत्रकारों की कार्यस्थल पर सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए विशेष सुरक्षा कानून (पत्रकार सुरक्षा कानून) लागू करने की पुरजोर मांग की.
नए पत्रकारों के लिए कार्यशाला और संतुलित पत्रकारिता पर मंथन
संघ के पूर्व अध्यक्ष अमरेंद्र सिंह ने घटना का विरोध करते हुए कहा कि पत्रकारों को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपनी सीमाओं की भी सही पहचान रखनी होगी. उन्होंने मीडिया के नए साथियों को फील्ड रिपोर्टिंग की बारीकियों, तकनीकी ज्ञान और नैतिक आचरण से अवगत कराने के लिए जल्द ही एक विशेष कार्यशाला आयोजित करने का प्रस्ताव रखा.
संघ के उपाध्यक्ष चंदन कुमार लालू ने कहा कि पत्रकारों को शासन-प्रशासन और जनता के बीच निष्पक्ष सेतु की भूमिका निभानी होती है. प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत दोनों को समान तराजू पर तोलकर तथ्यपरक रिपोर्टिंग करने से ही पत्रकारिता की साख बची रहेगी.
जनता और व्यवस्था के बीच सबसे अहम कड़ी हैं पत्रकार: मृगेंद्र मणि सिंह
प्रभात खबर के ब्यूरो प्रमुख मृगेंद्र मणि सिंह ने एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी पत्रकार साथी के आत्मसम्मान और सुरक्षा पर आंच आने पर पूरा संघ चट्टानी एकता के साथ खड़ा रहेगा.
उन्होंने कहा कि पत्रकार विपरीत और जोखिम भरे हालातों में जनता की आवाज उठाते हैं, इसलिए शासन को उनकी सुरक्षा और सम्मान की गारंटी लेनी होगी. बैठक का कुशल संचालन दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार ज्योतिष झा ने किया, जिसमें कई अन्य वक्ताओं ने भी स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता पर अपने विचार रखे.
प्रेस भवन से समाहरणालय तक निकला आक्रोश मार्च, एसडीओ को सौंपा ज्ञापन
बैठक के समापन के बाद सभी पत्रकार बैनर और तख्तियां लेकर सड़क पर उतरे और जोरदार विरोध मार्च निकाला.
यह पैदल आक्रोश मार्च प्रेस भवन से शुरू होकर मां काली मंदिर, चांदनी चौक और एसडीओ आवास होते हुए सीधे समाहरणालय परिसर पहुंचा. मार्च के दौरान पत्रकारों ने सहरसा की घटना के विरोध में और पत्रकारों की सुरक्षा की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की.
समाहरणालय पहुंचने पर संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के प्रतिनिधि के रूप में मौजूद सदर एसडीओ अररिया और एडीपीओ अररिया को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में सहरसा घटना के दोषियों पर त्वरित कानूनी कार्रवाई, कार्यस्थल पर पत्रकारों को प्रशासनिक संरक्षण और पत्रकारों के लिए ठोस सुरक्षा नीति लागू करने का आग्रह किया गया.
प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के ये पत्रकार रहे उपस्थित
इस व्यापक विरोध प्रदर्शन और बैठक में हिंदुस्तान के प्रभारी फुलेंद्र मल्लिक, वरिष्ठ पत्रकार विष्णुदेव झा बेदी, कमर आलम, फिरोज आलम, मो. कलीमुद्दीन, रूपेश कुमार, पंकज झा सहित जिले भर से आए दर्जनों मीडियाकर्मी और छायाकार शामिल रहे.
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