बाइक पर ढोया सात करोड़ का धान

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धान घोटाला. आर्थिक अपराध इकाई के अनुसंधान में सामने आ रहे हैं चौकानेवाले राज खाद्यान्न गबन का यह मामला सात करोड़ रुपये से अधिक का है. इसलिए राज्य खाद्य निगम की मांग पर इस मामले की जांच की जिम्मेदारी आर्थिक अपराध इकाई को सुपुर्द की गयी थी. हालांकि अपराध इकाई की टीम ने उन सात […]

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धान घोटाला. आर्थिक अपराध इकाई के अनुसंधान में सामने आ रहे हैं चौकानेवाले राज
खाद्यान्न गबन का यह मामला सात करोड़ रुपये से अधिक का है. इसलिए राज्य खाद्य निगम की मांग पर इस मामले की जांच की जिम्मेदारी आर्थिक अपराध इकाई को सुपुर्द की गयी थी. हालांकि अपराध इकाई की टीम ने उन सात लोगों का नाम ढूंढ निकाला है, जिन्होंने उसके नाम पर जालसाजी करते हुए सरकार को सात करोड़ से अधिक रुपये का चूना लगाया है.
मृगेंद्र मणी
अररिया
वित्तीय वर्ष 2013-14 में हुई धान खरीद में नाम किसी और का खेल किसी और ने किया. इसका नतीजा है कि पांच वर्षों के बाद भी राज्य खाद्य निगम का सात करोड़ 92 लाख 86 हजार 729 रुपये अब तक नहीं मिल पाया है. यह राशि कौन देगा इसका पता नहीं चल पा रहा है. जिले के विभिन्न थानों में दस करोड़ के खाद्यान्न गबन को लेकर सात मामले दर्ज हैं.
इनमें पूर्णिमा राइस मिल के पास निगम का साढ़े सात करोड़ रुपये बकाया है, लेकिन जिस दीपक कुमार साह, पिता स्व हरिश चंद्र प्रसाद साह फ्लावर मिल, कृष्णापुरी केहाट पूर्णिया के विरुद्ध कांड संख्या 33/15दर्ज है.
वह फुटपाथ पर ठेला लगा कर रोजी-रोटी करता है. उधर, धान ढोनेवाले जिस ट्रक का नंबर दिया गया है, वह नंबर मोटरसाइकिल व ऑटो का है. इसका खुलासा तब हुआ, जब आर्थिक अपराध इकाई ने इस कांड का अनुसंधान शुरू किया.
जम कर हुई धान अधिप्राप्ति :
पूर्णिमा राइस मिल ने 3360. 287 एमटी धान की अधिप्राप्ति की. धान के एवज में निगम का लगभग 08 करोड़ 32 लाख 86 हजार 729 रुपये मूल्य का सीएमआर लेकर ये सभी फरार हो गये. इस बीच डीएम एसएफसी सतीश प्रसाद लंबी छुट्टी पर चले गये. आनन-फानन में वर्तमान परिवहन पदाधिकारी मनोज कुमार साही को डीएम एसएफसी का प्रभार दिया गया. उनके प्रयासों के बाद पूर्णिमा राइस मिल से 20 अप्रैल 2015 को दो किस्तों में 40 लाख की रिकवरी की गयी. बताया तो यह भी जाता है कि निगम के पास आज भी कांड के सात अभियुक्तों में से तीन के नाम के अलावा कोई पता या साक्ष्य तक उपलब्ध नहीं हो पाया है. निगम व अनुसंधानकर्ता की माने तो दीपक कुमार साह कभी उनके सामने तक नहीं आया.
बाइक व ऑटो पर ढोये जाते रहे धान :
मुख्य आरोपित दीपक कुमार के सामने आने की बजाय ब्रजेश कुमार यादव व अन्य ने उन ट्रकों पर धान ढोये, जो मोटरसाइकिल अथवा ऑटो के नंबर हैं. बाइक व ऑटो के नंबर का ट्रक बता कर पूर्णिमा राइस मिल के नाम पर धान जमा होता रहा. धान जमा करने के बाद तैयार चावल सीएमआर जमा करने की बारी आयी, तो बगैर बिल जमा किये ही ये सभी फरार हो गये. आर्थिक अपराध इकाई की ओर से मामले के अनुसंधान के क्रम में परत दर परत नये खुलासे हुए हैं. मुख्य आरोपित दीपक कुमार साह की गिरफ्तारी तो नहीं हुई, लेकिन ब्रजेश कुमार यादव, किरण देवी, निखिल सिंह व पप्पू सिंह की गिरफ्तारी हो चुकी है.
सात लोगों ने निगम के साथ िकया गड़बड़झाला
चार गिरफ्तार, तीन का अब भी अता-पता नहीं
एग्रीमेंट हुआ दीपक साह के नाम पर, काम िकया पूिर्णया के िसपाही टोला िनवासी
इन्होंने िकया काम
ब्रजेश कुमार यादव, उसकी पत्नी िकरण देवी, िनखिल सिंह व पप्पू िसंह
तत्कालीन डीएम एसएफसी ने किया दीपक के साथ इकरारनामा : इस मामले में आर्थिक अपराध इकाई के चार अधिकारी पूर्व में अनुसंधान कर चुके हैं, लेकिन इस बात का खुलासा तब हुए जब इसके नये अनुसंधानक सुबोध कुमार राव ने इसकी जिम्मेदारी ली. उनके अनुसार कांड के मुख्य अभियुक्त को डमी के रूप में सामने रख कर काम किया गया. वित्तीय वर्ष 2013-14 में पूर्णिमा राइस मिल के प्रोपराइटर के रूप में दीपक कुमार साह के साथ तत्कालीन डीएम एसएफसी अररिया सतीश प्रसाद ने एग्रीमेंट किया, जबकि काम सिपाही टोला पूर्णिया के ब्रजेश कुमार यादव, उसकी पत्नी किरण देवी, निखिल सिंह, पप्पू सिंह व तीन अन्य जिसका अब तक सत्यापन भी नहीं हो पाया है.
पांच वर्ष के दौरान नहीं हुई गिरफ्तारी : कांड के अनुसंधानकर्ता सुबोध कुमार राव की माने तो दीपक कुमार फुटपाथ पर ठेला चला कर परिवार का भरण-पोषण करता है. हालांकि पांच वर्ष के दौरान उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई है. तुर्रा यह कि उसके विरुद्ध पुलिस के पास कुर्की का आदेश भी पड़ा है. खाद्यान्न गबन का यह मामला आठ करोड़ रुपये से अधिक का है. इसलिए राज्य खाद्य निगम की मांग पर इस मामले की जांच की जिम्मेदारी आर्थिक अपराध इकाई को सुपुर्द की गयी थी. अपराध इकाई की टीम ने उन सात लोगों का नाम ढूंढ निकाला है, जिन्होंने उसके नाम पर जालसाजी करते हुए सरकार को सात करोड़ से अधिक रुपये का चूना लगाया है.
मामला जटिल तो है. क्योंकि एक डमी को सामने रख कर खाद्यान्न गबन किया गया है, लेकिन सरकारी राशि का गबन करनेवाला जो भी होगा उसे सामने लाया जायेगा. राशि की रिकवरी भी की जायेगी. प्रयास है कि दोषी बचे नहीं, लेकिन निर्दोष भी फंसे नहीं.
सुबोध कुमार राव, पुलिस इंस्पेक्टर,
आर्थिक अपराध इकाई
राशि की रिकवरी व कार्रवाई का जिम्मा आर्थिक अपराध इकाई को सौंपा गया है. निगम को गबन की राशि 18 प्रतिशत सूद के साथ गबन करनेवाले को हर हाल में जमा करना होगा.
बीरेंद्र नाथ गुप्ता, डीएम एसएफसी
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