बिल में लिखावट मिट जाने पर भुगतान में करते हैं आनाकानी

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अररिया : बिजली विभाग उपभोक्ताओं को जो बिजली का बिल दे रहा है. उसकी लिखावट कुछ दिनों में ही गायब हो जा रही है. लिखावट मिट जाने के बाद बिल महज एक कोरा कागज बन कर रह जाता है. इससे एक तो बिजली उपभोक्ताओं को बिल रिकार्ड रखने में परेशानी हो रही है. तो दूसरी […]

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अररिया : बिजली विभाग उपभोक्ताओं को जो बिजली का बिल दे रहा है. उसकी लिखावट कुछ दिनों में ही गायब हो जा रही है. लिखावट मिट जाने के बाद बिल महज एक कोरा कागज बन कर रह जाता है. इससे एक तो बिजली उपभोक्ताओं को बिल रिकार्ड रखने में परेशानी हो रही है. तो दूसरी तरफ बिल भुगतान में थोड़ा विलंब होने से इसका भुगतान भी मुश्किल हो जाता है. जो आज-कल बिल भुगतान को लेकर गड़बड़ी का बड़ा कारण बन चुका है. अक्सर विभाग के कर्मी और उपभोक्ता के बीच यह अनावश्यक विवाद की वजह भी बन रहा है.

अररिया प्रखंड के शरणपुर पंचायत निवासी रंजीत कुमार को भी इस कारण भारी फजीहत उठानी पड़ी. बिल जमा करने के लिए वे घंटों विभागीय कार्यालय के बिल काउंटर पर लगी लंबी लाइन में खड़े रहे. वे अपने पिता के नाम से जारी विद्युत कनेक्शन के बकाया भुगतान के लिए अररिया बिजली कार्यालय पहुंचे थे. काउंटर पर उनकी बारी आने पर वहां मौजूद अधिकारी ने बिल की लिखावट मिट जाने के कारण भुगतान लेने से इनकार कर दिया.
अधिकारी का कहना था कि बिल पर कंज्यूमर संख्या व टीटी नंबर भी नहीं पढ़ा जा रहा है. इस कारण भुगतान नहीं लिया जा सकता है. रंजीत तीस किलोमीटर की दूरी तय कर बिल जमा करने अररिया विद्युत कार्यालय पहुंचे थे. जमा नहीं लिये जाने पर उन्हें घोर निराशा हाथ लगी. वहां मौजूद अन्य लोगों ने कहा कि बिल मिलते ही उसकी फोटा कॉपी करा लेनी चाहिए. सवाल यह है कि ग्रामीण इलाकों में हर जगह न तो जीरोक्स मशीन है और न बिजली कनेक्शन. ऐसे में यह समस्या धीरे-धीरे ज्यादा गंभीर होने लगी है.
आये हैं ग्रामीण निराश हो लौट जाते हैं
बिल जमा करने दूर-दराज से आते हैं लोग
विद्युत कार्यालय अररिया में हर दिन दूर-दराज के सैकड़ों लोग बिजली बिल जमा करने आते हैं. ग्रामीण क्षेत्र में बिल जमा कराने के माकुल इंतजाम के अभाव में इस कार्य में ही लोगों का पुरा दिन निकल जाता है. दरअसल ग्रामीण क्षेत्र में बिल संग्रहण के लिए निर्धारित शर्तों पर संविदा रत कर्मी बहाल किये गये थे. कुछ माह पूर्व ही विभाग ने उनसे सेवा लेने से इनकार करते हुए उनका निबंधन रद्द कर दिया. बिल संग्रह की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी के हाथों सौंप दी गयी.
पांच माह से अधिक का वक्त गुजरने के बाद भी कंपनी लोगों को अपनी सेवाएं उपलब्ध नहीं करा पा रहा है. इस कारण ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं को बिल जमा कराने में भारी फजीहत उठानी पड़ रही है. मुड़े हुए या थोड़े पुराने नोट होने पर भी कर्मी इसे जमा लेने से इनकार कर दे रहे हैं.
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