नक्सल विरोधी अभियान में सीआरपीएफ का कमांडेंट हीरा कुमार झा शहीद

जमुई/ खैरा/गिरिडीह: बिहार के जमुई और झारखंड के गिरिडीह जिलों की सीमा पर स्थित खैरा थाना क्षेत्र के लखारी जंगल में शुक्रवार को पुलिस व नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट हीरा कुमार झा शहीद हो गये. वह सीआरपीएफ 7 बटालियन के अधिकारी थे. मुठभेड़ के बाद चलाये गये सर्च अभियान […]
जमुई/ खैरा/गिरिडीह: बिहार के जमुई और झारखंड के गिरिडीह जिलों की सीमा पर स्थित खैरा थाना क्षेत्र के लखारी जंगल में शुक्रवार को पुलिस व नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट हीरा कुमार झा शहीद हो गये.
वह सीआरपीएफ 7 बटालियन के अधिकारी थे. मुठभेड़ के बाद चलाये गये सर्च अभियान में चार नक्सली सहित सात लोगों को गिरफ्तार गया. इनमें एक महिला नक्सली रीना कोड़ा भी शामिल है, जो जमुई, मुंगेर, लखीसराय, गया और नवादा जिलों में सक्रिय शीर्ष नक्सली कमांडर सिद्धू कोड़ा की पत्नी है. इस दौरान एक राइफल, एक देसी पिस्तौल और 45 किलो विस्फोटक और नक्सली वरदी बरामद की गयी हैं. शहीद अधिकारी के शव को पोस्टमार्टम के लिए जमुई भेज दिया गया.
अधिक ारियों व सीआरपीएफ के वरीय अधिकारियों को सूचना थी कि लखारी गांव में नक्सली कमांडर सिद्धू कोड़ा व चिराग दा अपने साथियों के साथ बैठक कर रहे हैं. इसी सूचना पर इ कंपनी के अधिकारी और पुलिस बल के जवानों ने इलाके में सर्च अभियान शुरू किया. सीआरपीएफ व पुलिस के जवान लखारी जंगल में पहुंचे. उधर दूसरी ओर से बिहार पुलिस और सीआरपीएफ 215 बटालियन के जवान व अधिकारी भी इस इलाके में पहुंचे. दोनों ओर से इलाके की घेराबंदी की गयी. देर शाम को जवानों ने इस गांव को घेर लिया. इसके बाद इसकी जानकारी गिरिडीह के एसपी क्रांति कुमार, सीआरपीएफ 7 बटालियन के कमांडेंट आरके सिंह, सेकेंड कमांडेंट हीरा कुमार झा को दी गयी. जानकारी मिलते ही गुरुवार की शाम को गिरिडीह से कमांडेंट, सेकेंड कमांडेंट समेत कई अधिकारी निकल पड़े.
रात में अधिकारियों ने तिसरी व चतरो स्थित कैंप में रात गुजारी. तड़के सेकेंड कमांडेंट हीरा कुमार झा ने चतरो स्थित बटालियन की एफ कंपनी के जवानों को साथ में लिया और लखारी गांव की ओर जा पहुंचे. एक तरफ से जहां इ कंपनी के जवानों ने नक्सलियों को घेर रखा था, वहीं दूसरी ओर से सेकेंड कमांडेंट हीरा कुमार झा के नेतृत्व में गये एफ कंपनी के जवानों ने इलाके को घेरा. इस बीच श्री झा 10-12 जवानों को लेकर जैसे ही गांव में घुसे, वैसे ही माओवादियों ने फायरिंग कर दी. गोली लगते ही सेकेंड कमांडेंट श्री झा की मौके पर ही मौत हो गयी. इसके बाद माओवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस व सीआरपीएफ जवानों ने भी जवाबी फायरिंग की. इस बीच सिद्धू कोड़ा समेत ज्यादातर नक्सली भाग गये. बाद में पुलिस व सीआरपीएफ के जवानों ने सर्च अभियान चलाया, जिसमें सिद्धू कोड़ा की पत्नी रीना समेत चार नक्सली और अन्य लोग पकड़े गये.
सहरसा के थे मूल निवासी
मुठभेड़ में शहीद हुए सीआरपीएफ के डिप्टी कमाडेंट मूलत: बिहार के सहरसा जिले के बसनही गांव के रहने वाले थे. चार भाइयों में सबसे छोटे हीरा झा के पिता स्व केएन झा बाद में धनबाद शिफ्ट हो गये थे. उनके पिता धनबाद जिला पर्षद के प्रिंटिंग प्रेस के मैनेजर थे. हीरा झा को शुरू से ही पुलिस फोर्स में काम करने का शौक था. उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत बीएसएफ में बतौर एसआइ शुरू की. बाद में वर्ष 1998 में उनका चयन सीआरपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर हुआ. पिछले 16 वर्षो के दौरान जम्मू, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड में कई नक्सल एवं आतंकवाद पीड़ित इलाकों में ड्यूटी की. पिछले लगभग दो वर्षो से गिरिडीह जिले में पदस्थापित थे.
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