Patna: पेट में रहता था दर्द, पेशाब में आता था खून, महिला की किडनी से निकाला गया 12 सेमी का ट्यूमर 

Published by : Prashant Tiwari Updated At : 30 Nov 2024 3:50 PM

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Patna: राजधानी के सत्यदेव सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में एक 51 साल की महिला माधुरी देवी (काल्पनिक नाम) के किडनी में मौजूद ट्यूमर का लेप्रोस्कोपी विधि से सफल ऑपरेशन किया गया.

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पटना के सत्यदेव सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में एक 51 साल की महिला माधुरी देवी (काल्पनिक नाम) के किडनी में मौजूद ट्यूमर ट्यूमर का लेप्रोस्कोपी विधि से सफल ऑपरेशन किया गया. उनकी स्थिति काफी गंभीर थी. लगातार तीन महीने से पेशाब में उन्हें खून आता था, जिसके कारण पेट में लगातार दर्द भी बना रहता था. वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. कुमार राजेश रंजन और उनकी टीम ने महिला का ऑपरेशन किया. महिला की शारीरिक बनावट कुछ ऐसी थी कि उनका गला एक तरफ झुका हुआ था और रीढ़ की हड्डी भी टेढ़ी थी. ऐसी स्थिति में ऑपरेशन क्रिटिकल था. सीटी स्कैन में पता चला कि महिला की दाईं किडनी में 12 सीएम का ट्यूमर था.

आयुष्मान भारत के तहत यह ऑपरेशन किया गया

लेप्रोस्कोपिक रैडिकल नेफ्रेक्टोमी के जरिए मरीज की दाईं किडनी से ट्यूमर निकाल दी गई है. ऑपरेशन के बाद वह बिल्कुल स्वस्थ हैं. 4 दिन बाद उन्हें डिस्चार्ज भी कर दिया गया. भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत के तहत यह ऑपरेशन किया गया. 

डॉ. कुमार राजेश रंजन

काफी क्रिटिकल था  केस: डॉ. कुमार राजेश रंजन 

डॉ. कुमार राजेश रंजन ने बताया कि यह केस काफी हाई रिस्क और जटिल था. मरीज को एकसाथ काइफोस्कोलियोसिस और टोर्टीकोलिस जैसी शारीरिक समस्याएं थी. काइफोस्कोलियोसिस में रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो जाती है जबकि टोर्टीकोलिस में गला एक तरफ झुक जाता है. इसलिए यह केस हमारे लिए काफी क्रिटिकल था। मरीज के पेशाब में लगातार 3 महीने से खून आ रहा था. सीटी स्कैन से पता चला कि पेशाब की थैली में खून का थक्का जमा है और दाईं किडनी में 12 cm का ट्यूमर था.

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लेप्रोस्कोपिक रैडिकल नेफ्रेक्टोमी से हुआ ऑपरेशन

 उन्होंने बताया कि देखा जाए तो एक किडनी सामान्यतः 10 सीएम की होती है. इसमें 12 सीएम का ट्यूमर हो गया था, तो मरीज को काफी दिक्कतों का सामना करना  पड़ रहा था. लेप्रोस्कोपिक रैडिकल नेफ्रेक्टोमी के जरिए मरीज की दाईं किडनी में मौजूद ट्यूमर को निकाल दिया गया है. पेशाब की थैली में जो क्लॉट आ गया था, उसे भी साफ कर दिया गया है. बता दें लेप्रोस्कोपिक रैडिकल नेफ्रेक्टोमी में न्यूनतम चीरे के जरिए मरीज को राहत दी जाती है, जिससे रिकवरी काफी आसान हो जाती है. 

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लेखक के बारे में

By Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत पंजाब केसरी से करके राजस्थान पत्रिका होते हुए फिलहाल प्रभात खबर डिजिटल के बिहार टीम तक पहुंचे हैं, देश और राज्य की राजनीति में गहरी दिलचस्पी रखते हैं. साथ ही अभी पत्रकारिता की बारीकियों को सीखने में जुटे हुए हैं.

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