पाटन में कका-भतीजे की जंग में कौन जीतेगा- भूपेश बघेल या विजय बघेल, जानें बीजेपी उम्मीदवार के बारे में

Published by :Mithilesh Jha
Published at :17 Feb 2024 2:20 PM (IST)
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पाटन में कका-भतीजे की जंग में कौन जीतेगा- भूपेश बघेल या विजय बघेल, जानें बीजेपी उम्मीदवार के बारे में

विजय बघेल को छत्तीसगढ़ की सबसे हाई प्रोफाइल सीट से टिकट दिया गया. इस विश्वास के साथ वह अपने कका यानी चाचा को एक बार फिर पराजित करेंगे. इसके पहले भी कई बार कका-भतीजे का मुकाबला हो चुका है. कभी कका जीते, तो कभी भतीजा. इस सीट पर हुए चुनावों का पूरा लेखा-जोखा यहां पढ़ें.

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छत्तीसगढ़ के दुर्ग से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद विजय बघेल को पार्टी ने इस बार राजय के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ चुनाव के मैदान में उतारा. भूपेश बघेल और विजय बघेल रिश्ते में चाचा-भतीजा हैं. विजय बघेल एक बार अपने कका भूपेश बघेल के चुनाव में हरा चुके हैं. दूसरी पार कका ने भतीजे को पटखनी दे दी. अगली बार बीजेपी ने भतीजे बघेल को टिकट ही नहीं दिया. बाद में विजय को लोकसभा का टिकट मिला और दुर्ग संसदीय सीट से वह जीतकर संसद पहुंचे. छत्तीसगढ़ के कई सांसदों को इस बार बीजेपी ने विधानसभा का चुनाव लड़ने का आदेश दिया. इसमें प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव के अलावा विजय बघेल भी शामिल हैं. विजय बघेल को छत्तीसगढ़ की सबसे हाई प्रोफाइल सीट से टिकट दिया गया. इस विश्वास के साथ वह अपने कका यानी चाचा को एक बार फिर पराजित करेंगे. इसके पहले भी कई बार कका-भतीजे का मुकाबला हो चुका है. कभी कका जीते, तो कभी भतीजा.

भूपेश बघेल को हरा चुके हैं विजय बघेल

वर्ष 2008 में विजय बघेल ने कांग्रेस के कद्दावर नेता भूपेश बघेल को पराजित किया था. विजय ने अपने कका को 7,842 वोटों के अंतर से हराया था. वर्ष 2013 में जब चुनाव हुए, तो कका भूपेश ने भतीजे विजय बघेल को 9,343 मतों के अंतर से पराजित कर दिया. वर्ष 2018 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने विजय बघेल को टिकट नहीं दिया. पार्टी ने मोतीलाल साहू को यहां से अपना उम्मीदवार बनाया और कांग्रेस के भूपेश बघेल ने उन्हें 27,477 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया. वर्ष 2023 में एक बार फिर भूपेश बघेल के खिलाफ बीजेपी ने विजय बघेल को उम्मीदवार बनाया है. विजय बघेल ने बार-बार दावा किया है कि वह इस बार बड़े अंतर से चुनाव जीतेंगे.

ऐसा है विजय बघेल का राजनीतिक सफर

अब जरा विजय बघेल के राजनीतिक करियर पर एक नजर डालते हैं. विजय बघेल का पॉलिटिकल करियर वर्ष 2000 में शुरू हुआ. निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उन्होंने भिलाई नगर परिषद का चुनाव जीता था. वर्ष 2003 में शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में शामिल हो गए. इसी साल पाटन विधानसभा क्षेत्र से एनसीपी के टिकट पर चुनाव लड़े. वह पराजित हो गए. चुनाव हारने के बाद वर्ष 2003 में ही विजय बघेल ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया. वर्ष 2008 में चुनाव हुए, तो बीजेपी ने उन्हें पाटन से अपना उम्मीदवार बनाया. उन्होंने भूपेश बघेल को परास्त कर दिया.

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2018 में बीजेपी ने नहीं दिया विजय बघेल को टिकट

वर्ष 2013 में भी बीजेपी ने पूरे विश्वास के साथ विजय बघेल को पाटन से टिकट दिया कि वह भूपेश बघेल को पराजित कर देंगे. लेकिन, ऐसा हुआ नहीं. चाचा ने अपनी भतीजे से इस बार हार का बदला ले लिया. वर्ष 2018 में जब चुनाव हुए, तो बीजेपी ने विजय बघेल की जगह मोतीलाल साहू को अपना उम्मीदवार बनाया. इस चुनाव में बीजेपी के बड़े-बड़े शूरमा पराजित हो गए. भूपेश बघेल ने बड़े अंतर से मोतीलाल को पराजित कर दिया. वर्ष 2019 में विजय बघेल को दुर्ग लोकसभा सीट से बीजेपी ने चुनाव लड़ाया और वह सांसद बने. संसदीय चुनाव में विजय बघेल ने कांग्रेस की प्रतिमा चंद्राकर को तीन से अधिक वोटों के अंतर से हरा दिया.

पाटन में एक बार फिर भूपेश बघेल बनाम विजय बघेल

बीजेपी ने एक बार फिर पाटन से विजय को टिकट दिया. पहले विजय बघेल का मुकाबला एक कांग्रेस नेता से हुआ करता था. इस बार उनका मुकाबला मुख्यमंत्री से है. बता दें कि पाटन विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने सबसे ज्यादा मुकाबले जीते हैं. पाटन में भूपेश बघेल से विजय बघेल को दो बार शिकस्त मिल चुकी है. एक बार विजय ने भूपेश को हराया. यह चौथा मौका है, जब भूपेश बघेल और विजय बघेल आमने-सामने हैं. भूपेश बघेल इस सीट पर तीन बार जीत दर्ज कर चुके हैं. वहीं, विजय बघेल को सिर्फ एक बार जीत मिली है. इसलिए यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि पाटन में इस बार चुनाव कौन जीतेगा.

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पाटन में इस बार कौन मारेगा बाजी?

राजनीतिक विश्लेषक भी पक्के तौर पर यह नहीं कह पा रहे कि इस बार किसका पलड़ा भारी है. असल में पाटन में कई क्षेत्रीय दलों के उम्मीदवार भी मैदान में हैं. इसलिए किसका वोट कटेगा, कह पाना मुश्किल है. बता दें कि पाटन में 17 नवंबर को वोटिंग हुई. इस सीट पर 16 उम्मीदवार खड़े थे. कुल 2,16,917 वोटर पंजीकृत थे, जिसमें 1,07,695 पुरुष और 1,09,222 महिला वोटर हैं. इनमें से 1,82,806 लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. 91,586 पुरुष और 91220 महिला वोटरों ने मतदान किया. पाटन में इस बार 84.27 फीसदी वोटिंग हुई. मतगणना तीन दिसंबर को होगी और उसी दिन पता चलेगा कि पाटन विधानसभा सीट पर कौन जीतेगा और कौन हारेगा. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल फिर से बाजी मारेंगे या वर्ष 2008 की तरह विजय बघेल अपने काका को पटखनी दे देंगे.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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