ओलंपिक में शीर्ष छह में रह सकती है भारतीय हॉकी टीम
Updated at : 17 Mar 2016 5:02 PM (IST)
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नयी दिल्ली : पूर्व कप्तान वीरेन रासकिन्हा का मानना है कि भारतीय पुरुष हॉकी टीम से रियो ओलंपिक में पदक की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी हालांकि टीम शीर्ष छह में जगह बनाने का माद्दा रखती है. रासकिन्हा ने यहां एक कार्यक्रम से इतर कहा ,‘‘ मुझे लगता है कि भारतीय पुरुष हॉकी टीम शीर्ष छह […]
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नयी दिल्ली : पूर्व कप्तान वीरेन रासकिन्हा का मानना है कि भारतीय पुरुष हॉकी टीम से रियो ओलंपिक में पदक की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी हालांकि टीम शीर्ष छह में जगह बनाने का माद्दा रखती है. रासकिन्हा ने यहां एक कार्यक्रम से इतर कहा ,‘‘ मुझे लगता है कि भारतीय पुरुष हॉकी टीम शीर्ष छह में रह सकती है. पदक की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी क्योंकि 2008 में बीजिंग ओलंपिक में हम क्वालीफाई भी नहीं कर सके थे.
फिर चार साल बाद लंदन में आखिरी स्थान पर रहे लिहाजा रियो में सीधे पदक की उम्मीद करना सही नहीं है.” भारत के लिये 180 अंतरराष्ट्रीय हाकी मैच खेल चुके रासकिन्हा ने कहा कि इस बार प्रारुप में बदलाव के कारण भी सेमीफाइनल की राह कठिन होगी. उन्होंने कहा ,‘‘ सबसे पहले लक्ष्य क्वार्टर फाइनल के लिये क्वालीफाई करना होगा. प्रारुप में बदलाव के कारण इस बार अंतिम चार की राह काफी कठिन होगी.”
अगस्त में रियो दि जिनेरियो में होने वाले ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम को पूल बी में नीदरलैंड, जर्मनी, अर्जेंटीना , आयरलैंड और कनाडा के साथ रखा गया है जबकि पूल ए में ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, बेल्जियम, न्यूजीलैंड, स्पेन और ब्राजील हैं.
भारतीय महिला हॉकी टीम ने भी 36 साल बाद ओलंपिक के लिये क्वालीफाई किया और रासकिन्हा ने उम्मीद जताई कि टीम अच्छा प्रदर्शन करेगी. उन्होंने कहा ,‘‘ हमारी महिला हाकी टीम ने 36 साल बाद ओलंपिक के लिये क्वालीफाई किया है जो बहुत बड़ी उपलब्धि है और हाकी इंडिया इसके लिये बधाई की पात्र है. महिला टीम की तैयारी बहुत अच्छी है और मुझे उम्मीद है कि वे अच्छा प्रदर्शन करेंगे.” उन्होंने यह भी कहा कि बतौर खिलाड़ी ओलंपिक पदक नहीं जीत पाने का मलाल वह ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट से जुडकर दूर कर रहे हैं.
ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट भारत की ओलंपिक पदक उम्मीदों को निखारने में जुटा है जिसमें रासकिन्हा के अलावा गीत सेठी और प्रकाश पादुकोण जैसे दिग्गज जुड़े हैं. रासकिन्हा ने कहा ,‘‘ बतौर खिलाड़ी ओलंपिक पदक जीतने का मेरा सपना अधूरा ही रह गया. एथेंस ओलंपिक (2004) में हम सातवें स्थान पर रहे लेकिन ओजीक्यू के जरिये मैं दूसरे खिलाडियों में अपने उस सपने को जी रहा हूं. उम्मीद है कि रियो में हम बेहतर प्रदर्शन करेंगे.”
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