जब लाला अमरनाथ के डेब्यू शतक की खुशी में महिलाओं ने फेंके अपने गहने, जानें दिलचस्प कहानी

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भारत के पूर्व खिलाड़ी लाला अमरनाथ (एक्स)

1954 में लाला अमरनाथ के पाकिस्तान दौरे के दौरान उठाए गए एक बड़े कदम ने क्रिकेट जगत में हड़कंप मचा दिया था. जानिए, उन्होंने ऐसा क्या किया था जिससे निष्पक्ष खेल की लाज बची और यह घटना क्रिकेट इतिहास में यादगार बन गई.

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Lala Amarnath Jewellery Story: बात 1954 की है, जब भारतीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान के दौरे पर गई थी. उस समय लाला अमरनाथ भारतीय टीम के मैनेजर थे. यह दौरा राजनीति और खेल दोनों वजहों से बहुत तनावपूर्ण था. सीरीज का पांचवां और आखिरी टेस्ट मैच कराची में खेला जाना था. मैच से ठीक पहले लाला अमरनाथ को कुछ शक हुआ. उन्हें लगा कि माहौल और कुछ लोगों की हरकतें ठीक नहीं हैं और खिलाड़ियों की सुरक्षा या मैच के निष्पक्ष होने पर खतरा आ सकता है. इस शक के चलते लाला अमरनाथ ने एक बहुत बड़ा और कड़ा कदम उठाया. उन्होंने बिना किसी डर के हालात पर खुलकर बात की और अपनी चिंता जताई. उनके इस कदम से क्रिकेट जगत में हड़कंप मच गया और चारों तरफ इसी बात की चर्चा होने लगी. लाला अमरनाथ अपनी निडरता और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते थे. उनका यह फैसला आज भी भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक साहसिक कदम के रूप में याद किया जाता है.

पांचवें टेस्ट से पहले कमरे में हुई थी वो मुलाकात

साल 1954 में भारतीय टीम पाकिस्तान दौरे पर गई थी. दोनों देशों के बीच पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली गई थी. शुरुआती चार टेस्ट मुकाबले ड्रॉ रहे थे, ऐसे में आखिरी मैच दोनों टीमों के लिए बेहद अहम हो गया था. इस मुकाबले से पहले पाकिस्तान के कप्तान अब्दुल हफीज कारदार ने भारतीय टीम के मैनेजर लाला अमरनाथ को अपने कमरे में बातचीत के लिए बुलाया. दोनों के बीच चर्चा चल ही रही थी कि तभी अगले टेस्ट में अंपायरिंग करने वाले इदरीस बेग कमरे में पहुंचे. बताया जाता है कि इदरीस बेग ने कमरे में आते ही पाकिस्तान के कप्तान से कहा,

"स्किपर, हमारे लिए क्या हुक्म है?"

लेकिन जैसे ही उनकी नजर कमरे में मौजूद लाला अमरनाथ पर पड़ी, वह चौंक गए और तुरंत वहां से बाहर निकल गए.

लाला अमरनाथ को हुआ शक

इस घटना के बाद लाला अमरनाथ को कुछ गड़बड़ होने का अंदेशा हुआ. उन्होंने भारतीय टीम प्रबंधन के सामने अपनी आपत्ति रखी और साफ कहा कि पांचवें टेस्ट में इदरीस बेग अंपायरिंग नहीं करेंगे. यह मांग पाकिस्तान क्रिकेट प्रबंधन के लिए आसान नहीं थी, क्योंकि उस समय उनके पास अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव रखने वाले अंपायरों की संख्या बहुत कम थी.

पाकिस्तान बोला- दूसरा अंपायर नहीं है

पाकिस्तान क्रिकेट मैनेजमेंट ने लाला अमरनाथ को बताया कि

इदरीस बेग के अलावा उनके पास केवल शमसुद्दीन विकल्प के रूप में मौजूद हैं, जो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड से जुड़े हुए हैं.

लाला अमरनाथ ने जवाब दिया कि

शमसुद्दीन अंपायरिंग कर सकते हैं, लेकिन इदरीस बेग को मैदान पर नहीं उतारा जा सकता.

इसके बाद अंपायरिंग व्यवस्था में बदलाव किया गया. क्रिकेट इतिहास में इस घटना को लाला अमरनाथ की सतर्कता और निष्पक्ष खेल के लिए उनकी प्रतिबद्धता के उदाहरण के तौर पर याद किया जाता है.

भारत के पहले टेस्ट शतकवीर थे लाला अमरनाथ

लाला अमरनाथ सिर्फ अपनी कप्तानी और बेबाक फैसलों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी बल्लेबाजी के लिए भी मशहूर थे. उन्होंने साल 1933 में इंग्लैंड के खिलाफ मुंबई के जिमखाना ग्राउंड पर अपना टेस्ट डेब्यू किया था. अपने पहले ही टेस्ट मैच की दूसरी पारी में उन्होंने इतिहास रच दिया. महज 22 साल की उम्र में उन्होंने 21 चौकों की मदद से 118 रन बनाए और भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज बन गए.

शतक के बाद मैदान पर बरसे थे गहने

लाला अमरनाथ के डेब्यू शतक का जश्न भी बेहद खास था. कहा जाता है कि उनकी शानदार पारी से खुश होकर मैदान पर मौजूद महिलाओं ने अपने मंगलसूत्र और गहने तक फेंककर उनका स्वागत किया था. यही वजह है कि भारतीय क्रिकेट में लाला अमरनाथ के नाम के साथ "गहने बरसाने" वाला किस्सा आज भी याद किया जाता है.

5 अगस्त 2000 को हुआ था निधन

भारतीय क्रिकेट के इस महान खिलाड़ी का निधन 5 अगस्त 2000 को हुआ था. लाला अमरनाथ की पहचान सिर्फ एक बेहतरीन बल्लेबाज के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे क्रिकेटर के तौर पर भी रही, जिन्होंने मुश्किल हालात में भी अपने फैसलों और आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया.

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ऋतु राज

लेखक के बारे में

By ऋतु राज

ऋतुराज प्रभात खबर डिजिटल में स्पोर्ट्स कंटेंट राइटर हैं. लीची की नगरी मुजफ्फरपुर (बिहार) से ताल्लुक रखने वाले ऋतुराज के पास डिजिटल खेल पत्रकारिता में 1 साल का गहरा अनुभव है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से साल 2025 में मीडिया रिसर्च में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. खेल की हर छोटी-बड़ी और वायरल होती खबरों पर पैनी नजर रखना उनकी खासियत है. उनका मुख्य लक्ष्य प्रभात खबर के पाठकों तक खेल जगत की हर सटीक और विश्लेषण से भरी खबर सबसे पहले पहुंचाना है. पढ़ने और क्रिकेट खेलने के शौकीन ऋतुराज खेल को सिर्फ कवर नहीं करते, बल्कि उसकी बारीकियों को जीते हैं.

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