विश्व कप के लिए तैयार है भारतीय महिला हॉकी टीम, गोलकीपर सविता पूनिया ने कहा- मैदान पर आत्मविश्वास से उतरेंगे

Updated:
विज्ञापन

गोलकीपर सविता पूनिया (एक्स)

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

भारतीय महिला हॉकी टीम एफआईएच नेशंस कप की जीत से बढ़े आत्मविश्वास के साथ विश्व कप में उतरेगी. मजबूत डिफेंस, आक्रामक खेल और शानदार टीम संयोजन उसकी सबसे बड़ी ताकत होंगे.

विज्ञापन

भारतीय महिला हॉकी टीम इस बार विश्व कप में पूरे आत्मविश्वास के साथ उतरेगी. टीम की अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया का कहना है कि एफआईएच नेशंस कप जीतने से खिलाड़ियों का हौसला बहुत बढ़ा है. नेशंस कप में भारत ने दुनिया की मजबूत टीमों के खिलाफ खेला और शानदार प्रदर्शन किया. इस जीत से खिलाड़ियों को भरोसा मिला है कि वे किसी भी बड़ी टीम को कड़ी चुनौती दे सकती हैं. महिला हॉकी विश्व कप 14 से 30 अगस्त तक बेल्जियम और नीदरलैंड्स में होगा. भारत को पूल डी में चीन, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के साथ रखा गया है. भारत अपना पहला मैच 16 अगस्त को एम्स्टेलवीन में चीन के खिलाफ खेलेगा.

विज्ञापन

नेशंस कप की जीत से मिला आत्मविश्वास

भारत ने एफआईएच हॉकी विमेंस नेशंस कप न्यूजीलैंड 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया था. जून में ऑकलैंड में खेले गए फाइनल में भारतीय टीम ने मेजबान न्यूजीलैंड को 2-0 से हराकर ट्रॉफी पर कब्जा किया. खास बात यह है कि नेशंस कप के अब तक हुए दोनों सीजन भारत ने जीते हैं.

जियोहॉटस्टार से बात करते हुए सविता ने इस जीत को टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि टूर्नामेंट में कई शीर्ष टीमें मौजूद थीं और मुकाबलों की प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी ऊंचा था. ऐसे में खिताब जीतना भारतीय खिलाड़ियों के लिए केवल एक ट्रॉफी हासिल करना नहीं, बल्कि विश्व कप से पहले आत्मविश्वास हासिल करने का बड़ा अवसर भी रहा. उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद स्वर्ण पदक जीतने से टीम का मनोबल काफी ऊंचा हुआ है. खिलाड़ियों के भीतर यह विश्वास मजबूत हुआ है कि वे दबाव वाले मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं और बड़े मंच पर शीर्ष टीमों के सामने टिक सकती हैं.

अर्जेंटीना, नीदरलैंड्स और जर्मनी से मिली सीख

सविता ने हाल के वर्षों में एफआईएच प्रो लीग में शीर्ष टीमों के खिलाफ भारत के प्रदर्शन को भी आत्मविश्वास बढ़ाने वाला बताया. उनके मुताबिक

अर्जेंटीना, नीदरलैंड्स और जर्मनी जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ भारत ने कई करीबी मुकाबले खेले हैं. इन मुकाबलों से भारतीय टीम को यह एहसास हुआ कि दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों के साथ प्रतिस्पर्धा करना उसके लिए संभव है. सविता के मुताबिक भारतीय टीम के पास कौशल, फिटनेस और सही मानसिकता है और अपने अच्छे दिन पर वह किसी भी विश्व स्तरीय टीम को कड़ी चुनौती दे सकती है. यही आत्मविश्वास अब विश्व कप में भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकतों में से एक हो सकता है.

विश्व कप में तीसरी बार उतरेंगी सविता

सविता पूनिया के लिए यह विश्व कप व्यक्तिगत रूप से भी बेहद खास है. वह लगातार तीसरे विश्व कप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने जा रही हैं. उन्होंने कहा कि

किसी भी हॉकी खिलाड़ी के लिए विश्व कप और ओलंपिक सबसे बड़े मंच होते हैं और इन प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करना हर खिलाड़ी का सपना होता है. अनुभवी गोलकीपर ने कहा कि तीसरे लगातार विश्व कप में पहुंचना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है. पिछले अनुभवों से उन्हें इस बार अधिक आत्मविश्वास मिला है. वरिष्ठ खिलाड़ी के तौर पर अब उनकी कोशिश केवल अपने प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि टीम के युवा खिलाड़ियों को संभालना और दबाव के क्षणों में शांत रहकर नेतृत्व करना भी उनकी जिम्मेदारी है. सविता का कहना है कि वह मैदान पर उदाहरण पेश करके टीम का नेतृत्व करना चाहती हैं और यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि महत्वपूर्ण मौकों पर पूरी टीम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सके.

कप्तान सलिमा टेटे की रफ्तार टीम की बड़ी ताकत

सविता ने भारतीय टीम की कप्तान सलिमा टेटे की भी जमकर तारीफ की. उन्होंने सलिमा को शानदार खिलाड़ी और आक्रामक मिडफील्डर बताया. उनके मुताबिक

सलिमा की गति भारतीय टीम के लिए बड़ा हथियार है. सलिमा खासतौर पर पेनल्टी कॉर्नर डिफेंस के दौरान पहली रनर के रूप में तेजी से आगे बढ़कर विपक्षी टीम पर दबाव बनाती हैं. उनका खेल को पढ़ने का तरीका और शुरुआती दबाव बनाने की क्षमता टीम के लिए काफी उपयोगी है. सविता ने कहा कि वरिष्ठ खिलाड़ी के तौर पर वे और उपकप्तान नवनीत कौर, सलिमा को टीम को एकजुट रखने और सही दिशा में आगे बढ़ाने में सहयोग करती हैं. सलिमा भी वरिष्ठ खिलाड़ियों का सम्मान करती हैं और जरूरत पड़ने पर उनसे सलाह लेती हैं। इससे टीम के भीतर मजबूत तालमेल बना हुआ है.

टीम की सोच में भी आया बदलाव

सविता ने भारतीय टीम की तैयारियों में आए बदलाव पर भी बात की. उन्होंने बताया कि

अब खिलाड़ी केवल कोच के निर्देशों पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि अपनी फिटनेस और रिकवरी की जिम्मेदारी खुद भी लेते हैं. खिलाड़ी अपनी डाइट, चोट से बचाव, रिकवरी और अतिरिक्त ट्रेनिंग पर पहले से ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. गोलकीपरों के लिए सप्ताह में तीन से चार अतिरिक्त ट्रेनिंग सेशन भी होते हैं, लेकिन खिलाड़ी इन्हें बोझ नहीं बल्कि बड़े टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन की तैयारी के तौर पर देखते हैं.

यह बदलाव बताता है कि भारतीय महिला हॉकी टीम अब केवल मैदान पर रणनीति और कौशल पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि फिटनेस, रिकवरी और मानसिक मजबूती को भी उतनी ही अहमियत दे रही है.

'विश्व कप में कोई मुकाबला आसान नहीं'

भारतीय टीम की कप्तान सलिमा टेटे भी विश्व कप को लेकर आत्मविश्वास से भरी हुई हैं. उनका मानना है कि

टीम ने टूर्नामेंट के लिए कड़ी मेहनत की है और अब पूरा ध्यान अपनी हॉकी पर रखने की जरूरत है. विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में किसी भी मुकाबले को आसान नहीं माना जा सकता. इसलिए भारतीय टीम की कोशिश हर मैच में अपनी रणनीति और क्षमता के मुताबिक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की होगी. भारत की नजर इस बार अपने पिछले विश्व कप प्रदर्शन में सुधार करने पर भी होगी.

टीम का विश्व कप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1974 में चौथा स्थान रहा है. इसके बाद 2018 में भारत आठवें और 2022 में नौवें स्थान पर रहा था. ऐसे में नेशंस कप की खिताबी सफलता से मिले आत्मविश्वास, अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी और युवा खिलाड़ियों की ऊर्जा के दम पर भारतीय टीम इस बार विश्व कप में बेहतर प्रदर्शन और पदक की उम्मीद के साथ उतरेगी.

इसे भी पढ़े- केरल में मेसी का दौरा क्यों नहीं हुआ? सीएम वी.डी. सतीशन ने पिछली सरकार से मांगा जवाब


विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola