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धौनी पर व्यवहारिक फैसला लेने की जरूरत, उनकी तरह भविष्य को देखें : गंभीर

Updated at : 19 Jul 2019 4:21 PM (IST)
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धौनी पर व्यवहारिक फैसला लेने की जरूरत, उनकी तरह भविष्य को देखें : गंभीर

नयी दिल्ली : भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने कहा है कि महेंद्र सिंह धौनी ने जिस तरह युवा खिलाड़ियों की मांग करके बतौर कप्तान भविष्य में निवेश किया, उसी तरह उनके बारे में व्यवहारिक फैसले लेने की जरूरत है क्योंकि युवा खिलाड़ी इंतजार में खड़े हैं. ऐसी अटकलें हैं कि धौनी विश्व […]

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नयी दिल्ली : भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने कहा है कि महेंद्र सिंह धौनी ने जिस तरह युवा खिलाड़ियों की मांग करके बतौर कप्तान भविष्य में निवेश किया, उसी तरह उनके बारे में व्यवहारिक फैसले लेने की जरूरत है क्योंकि युवा खिलाड़ी इंतजार में खड़े हैं. ऐसी अटकलें हैं कि धौनी विश्व कप में भारत के लिए आखिरी वनडे खेल चुके हैं. भारत को सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड ने हराया था.

चयन समिति की बैठक रविवार को होगी जिसमें वेस्टइंडीज दौरे के लिए टीम का चयन किया जायेगा. इसमें पूरा फोकस धौनी पर रहेगा और गंभीर का मानना है कि जज्बात से परे फैसला लेना होगा. गंभीर ने टीवी 9 भारतवर्ष से कहा, भविष्य के बारे में सोचना जरूरी है. धौनी जब कप्तान थे तब उन्होंने भविष्य में निवेश किया. मुझे याद है कि धौनी ने आॅस्ट्रेलिया में कहा था कि मैं, सचिन और सेहवाग तीनों सीबी सीरिज नहीं खेल सकते क्योंकि मैदान बड़े हैं. उन्होंने कहा, उन्होंने विश्व कप के लिए युवा खिलाड़ी मांगे थे. जज्बाती होने की बजाय व्यवहारिक फैसले लेना जरूरी है. युवाओं को मौका देने की जरूरत है. चाहे वह ऋषभ पंत हो, संजू सैमसन, ईशान किशन या कोई और विकेटकीपर. जिसमें भी क्षमता दिखे, उसे विकेटकीपर बनाया जाना चाहिए.

गंभीर ने कहा कि युवाओं को जब तक पर्याप्त मौके नहीं मिलेंगे, वे भारत के लिए अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे. उन्होंने कहा, उन्हें डेढ़ साल मौका दें और अगर वे अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते तो किसी और को आजमाया जाये. इससे पता चल जायेगा कि अगले विश्व कप में विकेटकीपर कौन होगा. क्रिकेट से राजनीति में आये गंभीर ने कहा धौनी भारत के सर्वश्रेष्ठ कप्तानों में से हैं, लेकिन टीम की सफलता का पूरा श्रेय उन्हें देना और विफलता का ठीकरा उन पर फोड़ना गलत है. उन्होंने कहा, आंकड़ों को देखें तो वह सर्वश्रेष्ठ कप्तान हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि दूसरे कप्तान कमतर थे. सौरव गांगुली अच्छे कप्तान थे. हमने विदेश में उनकी कप्तानी में जीता. विराट कोहली की कप्तानी में हमने दक्षिण अफ्रीका में वनडे और आॅस्ट्रेलिया में टेस्ट शृंखला जीती.

गंभीर ने कहा, यह सही है कि धौनी ने हमें दो विश्व कप (2007 और 2011) जिताये, लेकिन कप्तान को सफलता का सारा श्रेय देना और नाकाम रहने पर उसे गुनहगार ठहराना गलत है. धौनी ने चैंपियंस ट्राफी और विश्व कप जीते, लेकिन दूसरे कप्तान भी भारत को आगे ले गये. अनिल कुंबले और राहुल द्रविड़ ने यह काम किया है.

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