Susari Parv: सात दिनों तक कठिन शिव उपासना, आठवें दिन मां दुर्गा के स्वरूप में आते हैं मुख्य भोक्ता

Edited by Shaurya Punj
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Sawan 2025

Susari Parv: सुसरी पर्व की परंपरा 400 वर्षों से जारी है. पूर्वजों के अनुसार, राजा अजम्बर सिंह की देखरेख में सुसरी पर्व की शुरुआत की गई थी. तब से लेकर अब तक, सुसरी पर्व का निरंतर आयोजन होता आ रहा है.

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राहे के पुरनानगर में 400 वर्षों से चल रही सुसरी पर्व की परंपरा

Susari Parv: झारखंड प्रकृति के साथ-साथ परंपराओं से भी भरा-पूरा राज्य है. यहां अलग-अलग समाज, अलग-अलग समुदाय की अलग-अलग परंपराएं हैं. ऐसी ही एक परंपरा रांची से महज 50-60 किलोमीटर दूर यहे प्रखंड के पुरनानगर गांव की है, जहां पिछले 400 साल से भी ज्यादा समय से पारंपरिक सुसरी पर्व का आयोजन होता आ रहा है. इसमें नौ दिनों तक पूजा प्रक्रिया चलती है. पहले दिन से लेकर सातवें दिन तक शिव जी की उपासना होती है. वहीं आठवें दिन मुख्य भोक्ता मां दुर्गा के स्वरूप में आते हैं. जिसे दुर्गा घट भी कहा जाता है, यह आकर्षण का केंद्र होता है. मौके पर भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है. इसे देखने के लिए आसपास के गांव के हजारों लोग आते हैं. जिसमें मुख्य भोक्ता को बेहोशी की अवस्था से जगाते हुए महेशपुर गांव के तालाब से पुरनानगर गांव के राजा घर में लाया जाता है. फिर उन्हें शिव मंदिर ले जाया जाता है. वहां मुख्य भोक्ता पूरी तरह से होश में आते हैं फिर अन्य भोक्ता के साथ पारंपरिक वाद्ययंत्र पर नृत्य करते हैं. इस साल सुसरी पर्व की शुरुआत ही चुकी है. सोमवार को शोभायात्रा निकाली जायेगी.

फुलसुंदी में भोक्ता व उनके परिवार के लोग होते हैं शामिल नौवें दिन आधी रात को गांव के ही मिसिर पोखर से मुख्य भोक्ता को मां काली का स्वरूप दिया जाता है. जिसे काली घट भी कहा जाता है. मुख्य भोक्ता को काली मां का स्वरूप देने के बाद उन्हें मुख्य मंदिर में लाया जाता है. कहा जाता है इस दौरान वे बेहोश अवस्था में चले जाते हैं. मुख्य मंदिर में लाने के बाद वे पूरी तरह से स्वस्थ हो जाते हैं. उसी दिन सुबह में फुलसुंदी होती है, जिसमें सभी भोक्ता और उनके परिवारजन अंगारों से होकर गुजरते हैं. शामिल होते हैं अलग-अलग समुदाय के लोग इसमें अलग-अलग दिन अलग-अलग नेग नियम होते हैं. उपासना में कठिन नियमों का पालन किया जाता है. जिसमें गांव के अलग अलग समुदाय के लोग भोक्ता के रूप में शामिल होते हैं. पहले सात दिनों तक शिव जी की कठिन उपासना होती है. इस दौरान भी कई नियम होते हैं. इसमें घेरघेरी, परदक्षिण, बड़ा लोटन, छोटा लोटन आदि की परंपरा है. आठवें दिन की शोभायात्रा में काफी संख्या में बच्चे और युवा भी शामिल होते हैं. जो शिव गण की भूमिका निभाते हैं.

राजा अजम्बर सिंह की देखरेख में हुई थी सुसरी पर्व की शुरुआत

पुरनानगर गांव के वर्तमान राजा प्रताप सिंह बताते है कि यह परंपरा 400 साल से चलती आ रही है. पूर्वजों के अनुसार राजा अजम्बर सिंह की देखरेख में सुसरी पर्व की शुरुआत की गयी थी. तब से लेकर अब तक सुसरी पर्व का लगातार आयोजन हो रहा है. वहीं, जयकिशोर सिंह ने बताया कि सालों साल से चल रही इस परंपरा का पालन किया जा रहा है. ताकि गांव में सुख-शांति बनी रहे. पर्व में आसपास के गांव के सभी समुदाय के लोग शामिल होते हैं.

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By Shaurya Punj

शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.

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