21 जून को क्यों होता है साल का सबसे बड़ा दिन? जानें ज्योतिषीय और वैज्ञानिक महत्व
ग्रीष्म संक्रांति आज 21 जून को
Summer Solstice 2026: 21 जून को ग्रीष्म संक्रांति के कारण साल का सबसे बड़ा दिन होता है. जानें सूर्य की विशेष स्थिति का ज्योतिषीय, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व तथा जीवन पर इसका प्रभाव.
Summer Solstice 2026: 21 जून का दिन खगोलीय, वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन सूर्य अपनी विशेष स्थिति में होता है, जिसे ग्रीष्म संक्रांति (Summer Solstice) कहा जाता है. यह वह समय होता है जब उत्तरी गोलार्ध में दिन सबसे बड़ा और रात सबसे छोटी होती है. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा, ऊर्जा, नेतृत्व क्षमता, मान-सम्मान और सफलता का कारक ग्रह माना गया है. इसलिए 21 जून का दिन सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और नई शुरुआत के लिए विशेष माना जाता है.
ग्रीष्म संक्रांति का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा के अनुसार ‘संक्रांति’ का अर्थ सूर्य का एक स्थिति से दूसरी स्थिति में प्रवेश करना होता है. 21 जून के आसपास सूर्य उत्तर दिशा की अपनी यात्रा के चरम बिंदु पर पहुंच जाता है. इसके बाद सूर्य की दक्षिण दिशा की ओर गति शुरू होती है, जिसे दक्षिणायन की शुरुआत माना जाता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य की यह स्थिति व्यक्ति के आत्मबल, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति को प्रभावित करती है.
मान्यता है कि इस दिन सूर्य से प्राप्त होने वाली सकारात्मक ऊर्जा व्यक्ति के जीवन में नए अवसर, आत्मविश्वास और प्रगति के द्वार खोल सकती है. सूर्य की मजबूत स्थिति को सफलता, सम्मान और उन्नति का प्रतीक माना जाता है.
21 जून को क्यों होता है साल का सबसे बड़ा दिन?
वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी अपनी धुरी पर लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है. यही झुकाव पृथ्वी पर मौसम परिवर्तन और दिन-रात की अवधि में बदलाव का प्रमुख कारण है. पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करते हुए वर्ष के अलग-अलग समय पर अलग-अलग कोणों पर सूर्य की ओर झुकती है.
21 जून को पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर अपने अधिकतम झुकाव पर होता है. इस कारण सूर्य की सीधी किरणें कर्क रेखा (Tropic of Cancer) पर लगभग 90 डिग्री के कोण पर पड़ती हैं. परिणामस्वरूप उत्तरी गोलार्ध को सूर्य का प्रकाश सबसे अधिक समय तक प्राप्त होता है और यह दिन वर्ष का सबसे लंबा दिन बन जाता है.
भारत, अमेरिका, यूरोप और एशिया के अधिकांश देश उत्तरी गोलार्ध में स्थित हैं, इसलिए इन क्षेत्रों में 21 जून को दिन की अवधि अन्य दिनों की तुलना में अधिक होती है. यही कारण है कि ग्रीष्म संक्रांति को वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व दिया जाता है.
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