सावन सोम प्रदोष व्रत कल, पूजा से पहले जरूर नोट कर लें पूरी सामग्री लिस्ट

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सावन सोम प्रदोष व्रत

सावन मास का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त, सोमवार को पड़ रहा है, जिसे सोम प्रदोष व्रत कहते हैं. इस व्रत में भगवान शिव की पूजा विधि-विधान से करने पर सभी कष्ट दूर होते हैं. जानें पूजा की संपूर्ण सामग्री और विधि.

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Sawan Pradosh Vrat: सावन मास का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त, सोमवार के दिन रखा जाएगा. सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है. मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव की पूरे विधि-विधान से पूजा करने से जातक के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. यदि आप भी कल सोम प्रदोष का व्रत रखने जा रहे हैं, तो पूजा शुरू करने से पहले सामग्री की सूची पूरी तरह जांच लें, ताकि संध्या पूजन के समय किसी आवश्यक सामग्री की कमी न रहे.

सोम प्रदोष व्रत पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट

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  • गंगाजल और शुद्ध जल
  • कच्चा गाय का दूध
  • दही
  • देशी घी
  • शहद
  • शक्कर
  • बेलपत्र
  • धतूरा
  • भांग
  • फूल
  • सफेद चंदन
  • अक्षत
  • शमी के पत्ते
  • मौली
  • जनेऊ
  • दीपक
  • रुई की बाती
  • धूपबत्ती
  • अगरबत्ती
  • कपूर
  • मौसमी फल
  • मिठाई

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सोम प्रदोष व्रत पूजा विधि

  1. प्रातःकाल स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें और महादेव के समक्ष निर्जला या फलाहार व्रत का संकल्प लें.
  2. प्रदोष काल से थोड़ी देर पहले पुनः स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें.
  3. शिवलिंग पर सबसे पहले गंगाजल और शुद्ध जल अर्पित करें. इसके बाद पंचामृत से अभिषेक करें और अंत में पुनः शुद्ध जल चढ़ाएं.
  4. शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं. इसके बाद अक्षत, मौली, जनेऊ, बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल अर्पित करें.
  5. इसके बाद भगवान शिव को फलों और मिठाई का भोग लगाएं.
  6. धूप-दीप जलाकर सोम प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें या सुनें. इसके साथ भगवान शिव के मंत्रों और शिव चालीसा का पाठ करें.
  7. अंत में कपूर या घी का दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें.

शिवलिंग पर क्या नहीं चढ़ाएं?

तुलसी के पत्ते: शिव पूजा में तुलसी के पत्ते अर्पित करना वर्जित माना जाता है. इसलिए शिवलिंग पर तुलसी न चढ़ाएं.

केतकी का फूल: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की पूजा में केतकी का फूल अर्पित नहीं किया जाता है.

हल्दी और सिंदूर: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर हल्दी और सिंदूर अर्पित करने से बचना चाहिए.

कटे-फटे बेलपत्र: भगवान शिव को हमेशा अखंडित बेलपत्र अर्पित करें. ध्यान रखें कि बेलपत्र का चिकना भाग शिवलिंग की ओर रहे.

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नेहा कुमारी

लेखक के बारे में

By नेहा कुमारी

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

डिजिटल पत्रकारिता में उन्होंने धर्म, ज्योतिष और भारतीय परंपराओं से जुड़े विषयों पर विशेष अनुभव हासिल किया है. उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सटीक, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को आसानी से समझ सकें.

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