Sawan 2025 में शिव जी की पूजा में वर्जित 6 चीजें, जानिए उनकी धार्मिक वजहें

Author Ashi goyal
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Sawan 2025

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Sawan 2025 : सावन का महीना शिव भक्ति का श्रेष्ठ समय होता है. इस दौरान इन वर्जित वस्तुओं का ध्यान रखना न केवल धार्मिक दृष्टि से आवश्यक है, बल्कि यह आपकी श्रद्धा और पूजा की शुद्धता को भी दर्शाता है.

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Sawan 2025 : सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है. इस पवित्र महीने में शिवभक्त व्रत रखते हैं, जलाभिषेक करते हैं और मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं. हालांकि, पूजा करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक होता है. शास्त्रों में कुछ चीजों को शिव पूजा में वर्जित बताया गया है. आइए जानते हैं ऐसी चीजें जो सावन में शिव पूजा के दौरान नहीं चढ़ानी चाहिए और उसके पीछे की धार्मिक मान्यता:-

– केतकी का फूल

  • वर्जित क्यों: केतकी का फूल भगवान शिव को चढ़ाना निषेध है.
  • धार्मिक कारण: एक पुराण कथा के अनुसार, केतकी के फूल ने झूठ बोलकर भगवान विष्णु और ब्रह्मा के विवाद में पक्षपात किया था. इससे शिव जी रुष्ट हो गए और उन्होंने इस फूल को पूजा में निषिद्ध कर दिया.

– तुलसी के पत्ते

  • वर्जित क्यों: तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय मानी जाती है, लेकिन शिव पूजा में इसे वर्जित किया गया है.
  • धार्मिक कारण: शिव पुराण के अनुसार, तुलसी का विवाह शंखचूड़ से हुआ था जो शिव जी के हाथों मारा गया. इसलिए तुलसी शिव को समर्पित नहीं की जाती.

– कुमकुम या सिंदूर

  • वर्जित क्यों: शिव को वैराग्य का प्रतीक माना जाता है, जबकि सिंदूर वैवाहिक सौभाग्य का चिन्ह है.
  • धार्मिक कारण: शिव जी योगी हैं, गृहस्थ जीवन से दूर रहते हैं. अतः सौभाग्यवती स्त्रियों द्वारा उपयोग किया जाने वाला सिंदूर उन्हें नहीं चढ़ाना चाहिए.

– नारियल जल

  • वर्जित क्यों: नारियल का जल शिवलिंग पर अर्पित नहीं किया जाता.
  • धार्मिक कारण: शास्त्रों के अनुसार, नारियल का जल बहुत पवित्र होता है और इसका उपयोग देवी पूजा में अधिक उपयुक्त होता है.

– हल्दी

  • वर्जित क्यों: हल्दी शुभता और सौभाग्य का प्रतीक है, परंतु शिव पूजा में निषिद्ध है.
  • धार्मिक कारण: शिव जी विरक्ति और तपस्या के देवता हैं. अतः सौंदर्य और ऐश्वर्य की वस्तुएं जैसे हल्दी, उन्हें चढ़ाना अनुचित माना गया है.

– टूटी या कटी हुई बेलपत्र

  • वर्जित क्यों: बेलपत्र शिव जी को अत्यंत प्रिय हैं, लेकिन उन्हें साफ, पूरे और त्रिपत्रीय होना चाहिए.
  • धार्मिक कारण: खंडित या सूखे बेलपत्र अपवित्र माने जाते हैं और इससे पूजा का फल अधूरा रह सकता है.

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सावन का महीना शिव भक्ति का श्रेष्ठ समय होता है. इस दौरान इन वर्जित वस्तुओं का ध्यान रखना न केवल धार्मिक दृष्टि से आवश्यक है, बल्कि यह आपकी श्रद्धा और पूजा की शुद्धता को भी दर्शाता है. शास्त्रों के अनुसार पूजन विधि का पालन करने से ही पूर्ण फल की प्राप्ति होती है.

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