रांची के पहाड़ी मंदिर में 15 अगस्त को क्यों फहराया जाता है तिरंगा? आजादी की आधी रात से जुड़ा है इतिहास
पहाड़ी मंदिर (एआई)
रांची का पहाड़ी मंदिर 15 अगस्त को तिरंगा फहराने की अनोखी परंपरा का गवाह है. यह स्थान आजादी के संघर्ष और शहीदों से गहरा नाता रखता है. जानें इसके ऐतिहासिक महत्व को.
Ranchi Pahari Mandir: हर साल 15 अगस्त को पूरा देश स्वतंत्रता दिवस मनाता है और जगह-जगह तिरंगा फहराया जाता है. रांची का पहाड़ी मंदिर इस मामले में खास है. यहां स्वतंत्रता दिवस पर होने वाला ध्वजारोहण सिर्फ एक सामान्य आयोजन नहीं, बल्कि आजादी के इतिहास से जुड़ी एक खास परंपरा है. रांची के पहाड़ी मंदिर को फांसी टुंगरी के नाम से भी जाना जाता है. अंग्रेजी शासन के दौरान यहां स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी. यही वजह है कि यह स्थान आजादी के संघर्ष और शहीदों की स्मृतियों से जुड़ा हुआ है.
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आजादी की आधी रात फहराया गया था तिरंगा
बताया जाता है कि देश की आजादी की घोषणा के समय स्वतंत्रता सेनानी कृष्ण चंद्र दास ने यहां तिरंगा फहराया था. 14-15 अगस्त की मध्यरात्री उन्होंने पहाड़ी मंदिर पर तिरंगा फहराया था. इसके बाद से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पहाड़ी मंदिर में ध्वजारोहण की परंपरा जारी है. हर साल 15 अगस्त को यहां तिरंगा फहराया जाता है.
15 अगस्त के दिन तिरंगा फहराने का महत्व
15 अगस्त के दिन तिरंगा फहराना भारत की स्वतंत्रता और देश की संप्रभुता का प्रतीक है. यह दिन हमें स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की याद दिलाता है. तिरंगा फहराकर देशवासी शहीदों को नमन करते हैं और राष्ट्र की एकता, अखंडता व सम्मान बनाए रखने का संकल्प लेते हैं.
पहाड़ी मंदिर में झंडा फहराते हुए वीडियो देखें
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