नाग पंचमी पर होती है इन 12 नागों की पूजा, अनंत से तक्षक तक जानें सभी के नाम और मंत्र
नाग पंचमी
नाग पंचमी के दिन 12 प्रमुख नाग देवताओं का स्मरण और पूजन करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन नाग देवताओं की आराधना और मंत्र जाप से सर्प भय दूर होता है. जानें अनंत से तक्षक तक 12 नागों के नाम, मंत्र और धार्मिक महत्व.
Naag Panchami 2026: नाग पंचमी का पावन पर्व 17 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा. हर साल यह पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन नाग देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-समृद्धि आती है, सर्पदंश का भय दूर होता है और कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है. धार्मिक ग्रंथों में कई नागों का उल्लेख मिलता है. इनमें से मुख्य रूप 12 नाग देवताओं के नामों का नाग पंचमी के दिन स्मरण और पूजन किया जाता है.

12 नाग देवताओं के नाम
नाग पंचमी पर मुख्य रूप से निम्न 12 नागों का स्मरण और पूजन करने की परंपरा बताई गई है:
- अनंत नाग
- वासुकि नाग
- शेषनाग
- पद्म नाग
- कंबल नाग
- कर्कोटक नाग
- अश्वतर नाग
- धृतराष्ट्र नाग
- शंखपाल नाग
- कालिय नाग
- तक्षक नाग
- पिंगल नाग
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नाग पंचमी मंत्र
1. नवनाग स्तुति मंत्र
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्. शङ्खपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥ एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्. सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः. तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्॥
इस मंत्र में प्रमुख नाग देवताओं का स्मरण किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इसका जाप करने से सर्प भय से रक्षा होती है.
2. सर्वांगीण सुरक्षा एवं नाग देवताओं की प्रसन्नता का मंत्र
सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथिवीतले. ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः॥ ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः. ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नमः॥
इस मंत्र के माध्यम से पृथ्वी, आकाश, नदियों, सरोवरों और अन्य स्थानों पर निवास करने वाले सभी नागों को नमन किया जाता है.
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धार्मिक महत्व

- कालसर्प दोष निवारण: जिनकी कुंडली में राहु-केतु के कारण कालसर्प दोष या सर्प दोष होता है, उनके लिए नाग पंचमी पर 12 नागों का पूजन और मंत्र जाप फलदायक माना गया है.
- अकाल भय और विष से रक्षा: शास्त्रों के अनुसार, नवनागों या द्वादश नागों का प्रतिदिन स्मरण करने से अकाल मृत्यु, दुर्घटना और विष का डर नहीं रहता.
- प्रकृति और जीव संरक्षण: नाग पंचमी का पर्व मनुष्य को प्रकृति और वन्यजीवों के सह-अस्तित्व का संदेश देता है, जिससे पर्यावरण संतुलन बना रहता है.
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By नेहा कुमारी
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