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आधा भारत नहीं जानता महाशिवरात्रि की शुरुआत का यह राज, जानें पौराणिक कथाओं में छिपा ये रहस्य

Updated at : 05 Feb 2026 3:03 PM (IST)
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Mahashivratri origin Story

महाशिवरात्रि की पौराणिक कथा

Mahashivratri 2026: हर साल महादेव के भक्त धूमधाम से महाशिवरात्रि का पर्व मनाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह महापर्व क्यों मनाया जाता है या इसकी शुरुआत कैसे हुई? अगर नहीं, तो आप सही जगह आए हैं. आपके मन में उठ रहे इन सभी सवालों के जवाब इस आर्टिकल के माध्यम से जानेंगे.

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Mahashivratri 2026: इस साल महाशिवरात्रि का पावन पर्व 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा. यह पर्व भगवान शंकर को समर्पित है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन जो भी भक्त विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा और व्रत करता है, महादेव उसकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं. महाशिवरात्रि की शुरुआत को लेकर कई प्रचलित कथाएं हैं, जिनमें से एक के बारे में आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताएंगे.

पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के सृजनकर्ता भगवान ब्रह्मा और पालनकर्ता भगवान विष्णु के बीच एक बार अपनी श्रेष्ठता को लेकर विवाद शुरू हो गया. यह विवाद धीरे-धीरे बढ़ता गया और युद्ध में बदल गया, जिससे जगत में हाहाकार मच गया. देवताओं की चिंता बढ़ने लगी कि यदि यह युद्ध नहीं रुका, तो सृष्टि का विनाश हो जाएगा.

भगवान शंकर ज्योतिर्लिंग के रूप में हुए प्रकट

जब विवाद चरम पर था, तब संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव एक विशाल और अनंत ‘ज्योतिर्लिंग’ के रूप में प्रकट हुए. इस ज्योतिर्लिंग का न कोई आदि था और न ही अंत. इसकी विशालता ने सभी को हैरान कर दिया. जिज्ञासा में आकर भगवान विष्णु वराह (सूअर) का रूप लेकर इसकी गहराई खोजने लगे, वहीं ब्रह्मा हंस का रूप लेकर इसकी ऊंचाई तक पहुंचने का प्रयास करने लगे.

भगवान विष्णु और ब्रह्मा का अहंकार हुआ नष्ट

कई युगों तक प्रयास करने के बाद भी दोनों देवताओं को उस ज्योतिर्लिंग का छोर नहीं मिला. इससे दोनों के बीच उत्पन्न अहंकार की भावना शांत हो गई. दोनों ने शिव की महिमा स्वीकार कर उस दिव्य प्रकाश को प्रणाम किया. तभी उस अनंत प्रकाश के भीतर से दिव्य ‘ॐ’ की ध्वनि गूंज उठी.

इस रूप में सामने आए महादेव

उस ज्योतिर्लिंग के मध्य तीन अक्षर प्रकट हुए— दाहिनी ओर सूर्य के समान तेजस्वी ‘अ’, बाईं ओर अग्नि सदृश ‘उ’ और मध्य में चंद्रमा की शीतलता लिए ‘म’. इन अक्षरों के बीच साक्षात महादेव स्फटिक (चमकदार, साफ पत्थर) के समान निर्मल रूप में प्रकट हुए. भगवान शिव की इस महिमा को देख ब्रह्मा और विष्णु भाव-विभोर हो गए और उनकी स्तुति करने लगे.

महाशिवरात्रि की हुई शुरुआत

महादेव ने दोनों की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद दिया. मान्यता है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी के दिन ही शिव पहली बार ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे. इसी पावन स्मृति में हर वर्ष ‘महाशिवरात्रि’ का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है.

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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