Lalita Saptami 2026:आज है ललिता सप्तमी, राधा-कृष्ण की प्रिय सखी को ऐसे करें प्रसन्न

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ललिता सप्तमी 2026

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Lalita Saptami 2026: ललिता सप्तमी 2026 आज 18 सितंबर को है. जानें राधा-कृष्ण की प्रिय सखी ललिता देवी का महत्व, पूजा विधि, व्रत की मान्यता और शुक्रवार के दिन किए जाने वाले आसान उपाय.

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Lalita Saptami 2026: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ललिता सप्तमी मनाई जाती है. यह दिन श्री राधा रानी की प्रिय सखी ललिता देवी को समर्पित है. ब्रज की भक्ति परंपरा में ललिता सखी को राधा-कृष्ण की अष्टसखियों में प्रमुख माना जाता है. मान्यता है कि ललिता देवी राधा-कृष्ण की प्रेममयी सेवा में हमेशा समर्पित रहती हैं. इस दिन ललिता देवी के साथ राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की भी पूजा की जाती है.

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इस साल ललिता सप्तमी 18 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जा रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत और पूजा करने से दांपत्य जीवन में प्रेम और सुख-शांति बनी रहती है.

ललिता सप्तमी 2026 की तिथि और समय

  • ललिता सप्तमी: 18 सितंबर 2026, शुक्रवार
  • शुक्ल सप्तमी शुरू: 17 सितंबर, सुबह 10:48 बजे
  • शुक्ल सप्तमी समाप्त: 18 सितंबर, दोपहर 1:01 बजे

ललिता सप्तमी का धार्मिक महत्व

ब्रज परंपरा में श्री राधा रानी की आठ प्रमुख सखियों का विशेष महत्व बताया गया है. इनमें ललिता देवी को प्रमुख स्थान प्राप्त है. वैष्णव परंपराओं में ललिता सखी का संबंध बरसाना के पास स्थित ऊंचागांव से बताया जाता है. यहां स्थित ललिता सखी मंदिर उनकी भक्ति और स्मृति से जुड़ा प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है. ललिता सप्तमी पर महिलाएं सुखी दांपत्य जीवन और संतान सुख की कामना से व्रत रखती हैं. मान्यता है कि श्रद्धा से पूजा और व्रत करने से परिवार में प्रेम और सौहार्द बढ़ता है.

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ललिता सप्तमी पर शुक्रवार के उपाय

इस बार ललिता सप्तमी शुक्रवार को पड़ रही है. शुक्रवार का संबंध माता लक्ष्मी और शुक्र ग्रह से भी माना जाता है. जो लोग शुक्रवार का व्रत रखते हैं, वे सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में माता लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं. माता को सफेद मिठाई का भोग लगाकर पीली कौड़ियां अर्पित करने की परंपरा है. जिन लोगों की कुंडली में शुक्र से जुड़ी परेशानी मानी जाती है, वे इत्र, सौंदर्य सामग्री, सफेद या गुलाबी वस्त्र का दान कर सकते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे सुख-सुविधा और वैवाहिक जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है.

ललिता सप्तमी की पूजा विधि

पंडित पुरनेंदु पाठक बताते हैं कि इस दिन सुबह घर की साफ-सफाई करके स्नान करें और पूजा की तैयारी करें. पूजा स्थल पर राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. यदि संभव हो तो ललिता सखी या अष्टसखियों की प्रतिमा भी रखें. इसके बाद चंदन, कुमकुम, अक्षत और सुगंधित फूल अर्पित करें. देसी घी का दीपक जलाकर राधा-कृष्ण का स्मरण करें. भगवान को मिठाई और सात्विक भोजन का भोग लगाएं. अंत में परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें और प्रसाद ग्रहण करें.

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