कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी आज, करें भगवान गणेश के 108 नामों का जाप, जानें लाभ

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Bhagwan Ganesh

भगवान गणेश के सामने नाम जाप करते हुए भक्ति की सांकेतिक तस्वीर (एआई)

Krishnapingala Sankashti Chaturthi 2026: आज, 3 जुलाई को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश के 108 नामों का श्रद्धापूर्वक जाप करने से मन को शांति मिलती है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है.

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Krishnapingala Sankashti Chaturthi 2026: आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश के कृष्णपिंगल स्वरूप की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और रुके हुए कार्यों में सफलता मिलने लगती है. इस दिन पूजा के साथ भगवान गणेश के 108 नामों का जाप करना भी अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है.

नाम के जाप के लाभ

  • मानसिक शांति: नियमित नाम जाप करने से मन शांत होता है तथा तनाव और चिंता कम होने में सहायता मिलती है.
  • एकाग्रता बढ़ती है: विद्यार्थियों और कामकाजी लोगों के लिए नाम जाप लाभकारी माना जाता है. इससे याददाश्त और एकाग्रता में सुधार होता है.
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान के नाम का स्मरण नकारात्मकता को दूर कर घर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है.
  • क्रोध और अहंकार पर नियंत्रण: नियमित जाप से मन में दया, क्षमा और संतोष की भावना विकसित होती है, जिससे क्रोध और अहंकार पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है.
  • ग्रह दोषों के प्रभाव में कमी: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा से भगवान गणेश के नामों का जाप करने से राहु, केतु और शनि जैसे ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं तथा जीवन की बाधाएं दूर होने लगती हैं.

भगवान गणेश के 108 नाम 

  1. सुमुख – सुंदर मुख वाले
  2. एकदंत – एक दांत वाले
  3. कपिल – सांवले रंग के
  4. गजकर्णक – हाथी जैसे कान वाले
  5. लम्बोदर – बड़े पेट वाले
  6. विकट – कठिनाइयों को दूर करने वाले
  7. विघ्नराज – विघ्नों के राजा
  8. गणाध्यक्ष – गणों के स्वामी
  9. भालचन्द्र – मस्तक पर चंद्र धारण करने वाले
  10. विनायक – सर्वोच्च नेता
  11. धूम्रकेतु – धूम्र के समान प्रकाश वाले
  12. गणाध्यक्ष – गणों के अधिपति
  13. फालचन्द्र – चंद्रमा के समान शीतल
  14. गजवक्त्र – हाथीमुख वाले
  15. वक्रतुण्ड – टेढ़ी सूँड वाले
  16. शूर – वीर और साहसी
  17. हरिद्र – हल्दी के समान वर्ण वाले
  18. सिद्धिविनायक – सिद्धि प्रदान करने वाले
  19. वक्रांग – टेढ़े शरीर वाले
  20. हेरम्ब – दुर्बलों के रक्षक
  21. कपिलकर्णक – लाल कान वाले
  22. विकटेश्वर – कठिनाइयों का नाश करने वाले
  23. सूर्यतेज – सूर्य की तरह तेजस्वी
  24. अज – जन्म-मृत्यु से परे
  25. कुमारगुरु – कार्तिकेय के भाई
  26. महागणपति – महान गणपति
  27. नटेश – नृत्य के स्वामी
  28. गजमुख – गजमुखधारी
  29. विनायकपति – नेता के भी नेता
  30. भवेश – संसार के स्वामी
  31. जगदाधार – जगत का आधार
  32. यंत्रकार – यंत्रों के रचयिता
  33. मोदकप्रिय – मोदक प्रिय करने वाले
  34. चतुर्भुज – चार भुजाओं वाले
  35. गजेश – हाथियों के अधिपति
  36. शिवनन्दन – भगवान शिव के पुत्र
  37. पार्वतीप्रसाद – माता पार्वती का वरदान
  38. सर्वेश – सबके स्वामी
  39. प्रणवस्वरूप – ओम् स्वरूप
  40. मंगलमूर्ति – मंगलकारी रूप वाले
  41. द्वैभुज – दो भुजाओं वाले
  42. अष्टभुज – आठ भुजाओं वाले
  43. सिद्धिेश्वर – सिद्धि देने वाले
  44. बुद्धिप्रिय – बुद्धि के प्रिय
  45. विघ्नहर्ता – विघ्नों का नाश करने वाले
  46. शुभलक्ष्मीपति – शुभता देने वाले
  47. महाकाय – विशालकाय
  48. त्रिनेत्र – तीन नेत्रों वाले
  49. वेदप्रमुख – वेदों के ज्ञाता
  50. सर्वज्ञ – सब कुछ जानने वाले
  51. आदिपुरुष – प्रथम पुरुष
  52. गजदंष्ट्र – हाथी जैसी दाँत वाले
  53. वरदायक – वरदान देने वाले
  54. शरण्य – शरण देने वाले
  55. शिवप्रिय – शिव को प्रिय
  56. भक्तवत्सल – भक्तों पर दया करने वाले
  57. अखिलेश – सबके अधिपति
  58. त्रैलोक्यनाथ – तीनों लोकों के स्वामी
  59. वक्रनयन – टेढ़ी आँखों वाले
  60. सर्वविघ्नेश्वर – सभी विघ्नों के अधिपति
  61. अग्रपूज्य – सबसे पहले पूजे जाने वाले
  62. महाबली – महान शक्ति वाले
  63. वेदज्ञ – वेदों के ज्ञाता
  64. जगन्नाथ – जगत के स्वामी
  65. पार्वतीसुत – पार्वती पुत्र
  66. गजेश्वर – गजों के ईश्वर
  67. आनन्दमूर्ति – आनंद देने वाले
  68. धनदायक – धन देने वाले
  69. सुखकर्ता – सुख देने वाले
  70. दुःखनाशक – दुःख हरने वाले
  71. विज्ञानेश – ज्ञान के ईश्वर
  72. वरप्रद – वर देने वाले
  73. चिंतामणि – इच्छाएँ पूर्ण करने वाले
  74. भूतनाथ – प्राणियों के स्वामी
  75. विघ्ननायक – विघ्नों के अधिपति
  76. गजवदन – हाथीमुख वाले
  77. सत्यप्रिय – सत्य प्रिय
  78. सत्यरूप – सत्य स्वरूप
  79. दयानिधि – दया का सागर
  80. भक्तरक्षक – भक्तों की रक्षा करने वाले
  81. जगद्वन्द्य – जगत द्वारा वंदनीय
  82. आद्यदेव – प्रथम देव
  83. सर्वलोकेश – सब लोकों के स्वामी
  84. वेदात्मा – वेदस्वरूप
  85. ज्ञानमूर्ति – ज्ञान के रूप
  86. सर्वेश्वर – सबके ईश्वर
  87. लम्बकर्ण – बड़े कान वाले
  88. वेदविनायक – वेदों के गणेश
  89. अशेषकर – अनंत कृपा करने वाले
  90. नन्दन – आनंद देने वाले
  91. मित्रप्रिय – मित्रों को प्रिय
  92. शत्रुहंता – शत्रुओं का नाश करने वाले
  93. वेदगर्भ – वेद स्वरूप में स्थित
  94. भवप्रिय – संसार को प्रिय
  95. सर्वकर्मेश्वर – सभी कर्मों के ईश्वर
  96. विघ्नविनाशक – विघ्न नाशक
  97. सर्वमंगलप्रद – सबको मंगल देने वाले
  98. प्रणम्य – पूजनीय
  99. सिद्धिदायक – सिद्धि देने वाले
  100. सिद्धिराज – सिद्धियों के राजा
  101. आदियोगी – प्रथम योगी
  102. ऋद्धिपति – ऋद्धि के स्वामी
  103. सिद्धेश – सिद्धियों के अधिपति
  104. विघ्नेश – विघ्नों के देव
  105. सर्वकार्यसिद्धि प्रदाता – कार्य सिद्ध करने वाले
  106. गणपति – गणों के स्वामी
  107. देवतााधिदेव – देवों के भी देव
  108. वक्रतुण्ड महाकाय – विशालकाय और टेढ़ी सूँड वाले

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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