Kartik Purnima 2025: कार्तिक पूर्णिमा के दिन जलाएं 365 दीपक, साल भर मिलेगा ये फायदा

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कार्तिक पूर्णिमा के दिन जरूर करें ये उपाय

Kartik Purnima 2025: कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीपक जलाने का विशेष महत्व होता है. यह दीपदान पूरे वर्ष सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन दीप जलाने से जीवन के अंधकार दूर होते हैं और घर में लक्ष्मीजी की कृपा बनी रहती है.

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Kartik Purnima 2025: कार्तिक पूर्णिमा हिंदू धर्म का बहुत ही पवित्र दिन है. यह तिथि कार्तिक महीने की पूर्णिमा को आती है और भगवान विष्णु, भगवान शिव और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए बहुत शुभ मानी जाती है. इस दिन स्नान, दान और दीपदान का खास महत्व होता है. इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था. ऐसा माना जाता है कि इस दिन पूजा और दीपदान करने से पाप खत्म होते हैं और पुण्य बढ़ता है.

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क्यों जलाए जाते हैं 365 दीपक

कहा जाता है कि अगर कार्तिक पूर्णिमा की रात 365 दीपक जलाए जाएं, तो पूरे साल जीवन में रोशनी, सुख और समृद्धि बनी रहती है. ये 365 दीपक साल के 365 दिनों का प्रतीक होते हैं. हर दीपक जलाने के साथ ऐसा माना जाता है कि आप अपने जीवन से अंधकार, दुख और नकारात्मकता को दूर कर रहे हैं. यह सिर्फ पूजा का काम नहीं, बल्कि आत्मा को शांति देने और मन को सकारात्मक बनाने का तरीका भी है.

दीपदान की विधि और सही तरीका

  • इस दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान शिव की पूजा करें. उसके बाद 365 दीपक जलाएं.
  • दीपक आप घर के मंदिर, तुलसी के पौधे के पास, दरवाजे, छत, आंगन या नदी किनारे रख सकते हैं. हर दीपक में शुद्ध घी या तिल का तेल होना चाहिए.
  • दीप जलाते समय “ॐ नमो नारायणाय” या “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है.
  • दीपदान से पहले भगवान विष्णु और लक्ष्मीजी से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें.

दीपदान के लाभ

कहा जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा की रात दीपदान करने से जीवन में सुख-शांति आती है. घर से नकारात्मकता दूर होती है, धन की स्थिति मजबूत होती है और परिवार में प्रेम बढ़ता है. यह दीपदान हमारे पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए भी बहुत उपयोगी माना गया है.

दीपदान के समय बोले जाने वाला मंत्र

दीपदान मंत्र:

“दीपो ज्योति परंब्रह्म, दीपो सर्व तमोऽपहः।
दीपो हरतु मे पापं, संध्यादीप नमोऽस्तुते॥”

इसका अर्थ है — दीपक परमात्मा का स्वरूप है, जो अंधकार को मिटाकर जीवन में उजाला लाता है. मैं उस दीपक को नमन करता हूँ जो मेरे सारे पापों को दूर करे.

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कार्तिक पूर्णिमा की रात भक्ति, उजाले और सकारात्मकता से भरी होती है. जब आप 365 दीपक जलाते हैं, तो यह सिर्फ घर नहीं रोशन करता, बल्कि आपके मन और जीवन के हर अंधेरे को भी मिटा देता है.

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