कामिका एकादशी है इस दिन, किन चीजों से करें भगवान विष्णु की पूजा? देखें पूरी सामग्री लिस्ट
कामिका एकादशी 2026
साल 2026 में कामिका एकादशी 9 अगस्त को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है. जानें पूजा की पूरी सामग्री और विधि.
Kamika Ekadashi 2026: सावन (श्रावण) माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को कामिका एकादशी के नाम से जाना जाता है. यह दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना और व्रत के लिए अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने पर व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है तथा उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

कामिका एकादशी 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां
- एकादशी व्रत: रविवार, 9 अगस्त 2026
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 8 अगस्त 2026, दोपहर 01:59 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 9 अगस्त 2026, सुबह 11:04 बजे
- व्रत पारण का समय: सोमवार, 10 अगस्त 2026, सुबह 05:47 बजे से 08:01 बजे तक
कामिका एकादशी पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट
| सामग्री का प्रकार | आवश्यक वस्तुएं |
| प्रतिमा व वस्त्र | भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर, चौकी पर बिछाने के लिए पीला कपड़ा, भगवान के लिए पीले वस्त्र |
| अभिषेक व स्नान | शुद्ध जल, गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) |
| तिलक सामग्री | पीला चंदन, रोली, अक्षत, हल्दी, कुमकुम |
| पुष्प व पत्र | पीले फूल, तुलसी दल, शमी के पत्ते |
| दीपक व सुगंध | देशी गाय का शुद्ध घी, रुई की बत्ती, दीपक, धूपबत्ती, कपूर, माचिस |
| भोग | ऋतु फल (केला, आम आदि), मिठाई, पंचमेवा, सात्विक भोग (हलवा या पंजीरी) |
| अन्य पूजन सामग्री | सुपारी, पान का पत्ता, लौंग, इलायची, कलावा (मौली), नारियल, आचमनी और कलश |
कामिका एकादशी पूजा विधि

- प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें.
- घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.
- भगवान को गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक कराएं. इसके बाद पीला चंदन, रोली और अक्षत अर्पित करें.
- भगवान श्रीहरि को पीले फूल तथा तुलसी दल अर्पित करें. विष्णु पूजा में तुलसी का विशेष महत्व माना गया है.
- घी का दीपक और धूप जलाकर भगवान विष्णु की आराधना करें. इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें.
- भगवान को ऋतु फल, मिठाई, पंचमेवा अथवा सात्विक भोग अर्पित करें. भोग में तुलसी पत्र अवश्य रखें.
- अंत में भगवान विष्णु की आर
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By नेहा कुमारी
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