जानकी जयंती पर बन रहा दुर्लभ संयोग, जानें पूजा का महत्व

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जनकी जयंती पर बन रहा शुभ योग, रांची के मंदिरों में ऐसे हो रही तैयारी

Janaki Jayanti 2026: जानकी जयंती कल यानी 25 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी. जानें शुभ योग, व्रत, पूजा विधि और मंदिरों में विशेष आयोजन, जिससे दांपत्य सुख, सौभाग्य और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.

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Janaki Jayanti 2026: राजधानी के श्रीराम मंदिरों में होगा भगवान श्रीराम व माता सीता का विशेष श्रृंगार, अखंड सौभाग्य के लिए सुहागिनें रखेंगी व्रत राजधानी में श्री जानकी जयंती (सीता नवमी) का पावन पर्व 25 अप्रैल को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा. यह पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन माता सीता का जन्म हुआ था. ज्योतिषाचार्य शालिनी वैद्य के अनुसार, इस वर्ष यह पर्व श्लेषा नक्षत्र के साथ रवि, सिद्ध और यायीजय योग के दुर्लभ संयोग में आ रहा है, जो इसे और भी शुभ बनाता है. पंचांग के अनुसार नवमी तिथि 24 अप्रैल को रात्रि 11:29 बजे से प्रारंभ होकर 25 अप्रैल को रात 09:44 बजे तक रहेगी.

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जानकी जयंती व्रत और धार्मिक महत्व

जानकी जयंती का व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखकर अपने अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-शांति की कामना करती हैं. वे भगवान श्रीराम और माता सीता की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करती हैं और वैवाहिक जीवन में प्रेम, समर्पण और स्थिरता का आशीर्वाद मांगती हैं.

जानकी जयंती पर पूजन विधि और अनुष्ठान

इस दिन भक्त ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करते हैं और घर की शुद्धि के बाद पूजा की तैयारी करते हैं. माता जानकी को लाल पुष्प, ताजे फल, नए वस्त्र और श्रृंगार सामग्री अर्पित की जाती है. इसके साथ ही भगवान श्रीराम के साथ माता सीता की आराधना की जाती है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी बाधाएं दूर होती हैं.

जानकी जयंती पर मंदिरों में विशेष आयोजन

राजधानी के विभिन्न मंदिरों में जानकी जयंती के अवसर पर विशेष आयोजन किए जाएंगे.

  • सर्जना चौक स्थित श्रीराम मंदिर में भगवान श्रीराम और माता सीता का भव्य श्रृंगार किया जाएगा. पूजा के बाद नौ प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा और शाम को भजन संध्या आयोजित होगी.
  • तपोवन मंदिर में भी इस पर्व को भव्य रूप से मनाया जाएगा, जहां सुबह पूजा-अर्चना और महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा.
  • चुटिया प्राचीन श्रीराम मंदिर में सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठान शुरू होंगे और विशेष भोग का वितरण किया जाएगा.
  • धुर्वा श्रीराम मंदिर में महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, जहां सामूहिक आरती और अनुष्ठान संपन्न होंगे.
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