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ढुण्ढिराज चतुर्थी पर आज पढ़ें ये व्रत कथा

Updated at : 21 Feb 2026 8:19 AM (IST)
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Dhundhiraj Chaturthi Vrat Katha

ढुण्ढिराज चतुर्थी व्रत कथा

Dhundhiraj Chaturthi Vrat Katha: ढुण्ढिराज चतुर्थी पर पढ़ें भगवान गणेश की पावन व्रत कथा. जानें काशी से जुड़ी रोचक कहानी और इस व्रत का धार्मिक महत्व, जिससे मिलती है सुख-समृद्धि.

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Dhundhiraj Chaturthi Vrat Katha: हर महीने की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है. इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करते हैं. फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ढुण्ढिराज चतुर्थी कहा जाता है. इस बार यह व्रत 21 फरवरी, शनिवार को रखा जा रहा है. इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ गया है. मान्यता है कि इस व्रत की कथा सुने बिना व्रत का पूरा फल नहीं मिलता.

ढुण्ढिराज चतुर्थी व्रत कथा

पुराणों के अनुसार, एक समय भगवान शिव ने काशी को अपना निवास स्थान बनाने का विचार किया. उस समय काशी पर राजा दिवोदास का शासन था. राजा दिवोदास बहुत धर्मात्मा, दयालु और न्यायप्रिय थे. उनके राज्य में किसी भी चीज की कमी नहीं थी.

राजा दिवोदास को ब्रह्मा जी से वरदान मिला था कि जब तक उनके राज्य में सब कुछ ठीक रहेगा और कोई कमी नहीं होगी, तब तक कोई भी देवता काशी में प्रवेश नहीं कर सकेगा.

भगवान शिव को काशी बहुत प्रिय थी, इसलिए उन्होंने अपने पुत्र गणेश जी को वहां भेजने का निश्चय किया. गणेश जी ने काशी जाने से पहले एक ज्योतिषी का रूप धारण किया और अपना नाम ‘ढुण्ढि’ रखा.

काशी पहुंचकर उन्होंने अपनी बुद्धि और ज्ञान से लोगों को प्रभावित किया. धीरे-धीरे उनकी ख्याति पूरे नगर में फैल गई. लोगों का ध्यान राजा दिवोदास से हटकर ढुण्ढि की ओर जाने लगा. इससे राजा के शासन में कमी आने लगी.

जब राज्य की स्थिति पहले जैसी नहीं रही, तब ब्रह्मा जी का वरदान प्रभावहीन हो गया और भगवान शिव को काशी में प्रवेश मिल गया. शिव जी ने गणेश जी की बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर उन्हें ‘ढुण्ढिराज’ नाम दिया. उन्होंने कहा कि जो भी भक्त काशी आएगा, उसकी यात्रा ढुण्ढिराज गणेश की पूजा के बाद ही पूरी मानी जाएगी.

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कहा जाता है कि जिस दिन शिव जी ने गणेश जी को ढुण्ढिराज नाम दिया, वह फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी का दिन था. तभी से इस तिथि को ढुण्ढिराज चतुर्थी के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हो गई. श्रद्धा से व्रत और कथा सुनने से भक्तों को सुख और सफलता मिलती है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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