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Chandra Grahan: आज रात में लगेगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण, जानिए कोरोना काल में क्या रहेगा इसका प्रभाव

By Radheshyam Kushwaha
Updated Date

Chandra Grahan 2020 Sutak Time in India: आज इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. पहला चंद्र ग्रहण जनवरी में लगा था. इस बार का चंद्र ग्रहण सामान्य से अलग लगने जा रहा है. इस बार आप चंद्र ग्रहण देख भी सकेंगे और इस दौरान खा-पी भी सकेंगे. हिंदू पंचांग के अनुसार 5 जून यानि आज ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि पर चंद्र ग्रहण लगेगा. यह चंद्र ग्रहण उपछाया ग्रहण होगा. यह सिर्फ धुंधला सा दिखाई देगा. आप काफी ध्यान से देखेंगे तो ही समझ में आ पाएगा. ग्रहण मध्य रात्रि 11 बजकर 16 मिनट से रात 2 बजकर 34 मिनट तक रहेगा. इसे पूरे भारत में देखा जा सकता है. इस दौरान चंद्रमा वृश्चिक राशि में होंगे. इसे शास्त्रों के अनुसार 5 जून को लगने वाला चंद्र ग्रहण सामान्य चंद्र ग्रहण से अलग रहेगा, इसे उपछाया ग्रहण कहते है. इसमें कोई सूतक काल नहीं माना जात है. वहीं, इस दौरान आप पूजा पाठ भी कर सकेंगे. इस समय खाने पीने पर कोई पाबंदी नहीं होती है. इस दौरान दान करने जैसा भी कोई नियम नहीं है.

क्या है सूतक काल

इस दौरान एक अशुभ समय की शुरुआत होगी, जिस समय विशेष रूप से बचने की जरूरत होती है. इसकी शुरुआत चंद्र ग्रहण के करीब नौ घंटे पूर्व ही शुरू हो जाएगा और समाप्त ग्रहण के समाप्ति के साथ ही रात 2 बजकर 32 मीनट पर होगा. हालांकि इस बार उपछाया ग्रहण लग रहा है, इसलिए सूतक काल का प्रभाव नहीं रहेगा.

ग्रहण के दौरान भूलकर भी न करें ये काम

चंद्रग्रहण के दौरान कई कार्य वर्जित होते हैं. इन कार्यों को करने में इसलिए मनाही होती है, क्योंकि इससे हमारे जीवन में दुष्प्रभाव पड़ते हैं. चंद्रग्रहण के दौरान बहुत से कार्य वर्जित रहते हैं, जैसे चंद्रग्रहण काल के समय भोजन करना वर्जित होता है. ग्रहण के दिन फल, फूल, लकड़ी पत्ते आदि तोड़ने को मना किया जाता है. ग्रहण के दौरान तुलसी पौधा नहीं छूते हैं, इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को चंद्र ग्रहण के समय विशेष ध्यान रखना होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी महिलाओं को चंद्र ग्रहण नहीं देखना चाहिए. चंद्र ग्रहण देखने से शिशु पर दुष्प्रभाव पड़ता हैं. गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय कैंची, चाकू, सिलाई, कटाई आदि से कोई वस्तु नहीं काटनी चाहिए. इसके अलावा ग्रहण काल में भोजन करना, जल पीना, केश बनाना, सोना, मंजन करना, वस्त्र नीचोड़ना, ताला खोलना आदि वर्जित होता है.

ग्रहण के दिन इन बातों पर जरूर दें ध्यान

- घरों में लोग ग्रहणकाल में धूप-अगरबत्ती जलाकर रखें, जिससे कि निगेटिव एनर्जी घर से बाहर निकल जाए

- तुलसी के पौधे को ना छूए और ना ही सोए.

- ग्रहणकाल में कैंची का प्रयोग न करें.

- फूलों को न तोड़े, बालों व कपड़ों को साफ न करें.

- दातुन या ब्रश न करें, गाय, भैंस, बकरी का दोहन न करें.

- भोजन न करें, कठोर शब्दों का प्रयोग न करें, सहवास ना करें, यात्रा न करें.

- कुशा या तुलसी पत्र ग्रहण प्रारंभ होने के पूर्व खाने-पीने की वस्तुएं जैसे पके भोजन, दूध, दही, घी, मक्खन, अचार, पीने के पानी, तेल आदि में - कुशा या तुलसी पत्र डाल देना चाहिए इससे ये दूषित नहीं होते.

- इस दिन पाप कर्म करने से बचें.

- गर्भवती स्त्रियों के लिए वैसे तो इस ग्रहण में कोई दोष नहीं है लेकिन फिर भी पूरे दिन उस जल का सेवन करें जिसमें तुलसी के पत्ते डले हुए हों इससे गर्भस्थ शिशु स्वस्थ रहेगा.

जानिए क्या होता है उपछाया चंद्र ग्रहण

चंद्रग्रहण को एक खगोलीय घटना मानी जाती है, ये घटना तब घटित होती है जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रछाया में आ जाता है. ऐसा तभी हो सकता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा इस क्रम में लगभग एक सीधी रेखा में स्थित रहें. उपछाया चंद्र ग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी की परिक्रमा करने के दौरान चंद्रमा पेनुम्ब्रा से हो कर गुजरता है. ये पृथ्वी की छाया का बाहरी भाग होता है. इस दौरान, चंद्रमा सामान्य से थोड़ा गहरा दिखाई देता है.

ग्रहण के दौरान इन बातों का रखें ध्‍यान

ग्रहण के दौरान खाना-पीना नहीं चाहिए. यहां तक कि इस समय कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए. मंदिर या घर में बने मंदिर में भी भगवान के पट बंद करने की बात शास्‍त्रों में कही जाती है. इस दौरान पूजा नहीं करनी चाहिए. ग्रहण लगने से पहले सूतक सूतक लग जाता है. सूतक लगने के बाद से ही गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए, क्योंकि ग्रहण काल के दौरान नकारात्मक शक्तियां प्रबल होती हैं, जिसका असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ सकता है. हालांकि यह उपछाया ग्रहण लग रहा है. इसका सूतक काल नहीं माना जाता है. ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करने की भी मान्यता है. ग्रहण काल की सूतक से पहले ही खाने की सभी चीजों में तुलसी के पत्ते रख देना चाहिए. बता दें कि जून के बाद 5 जुलाई को फिर से चंद्र ग्रहण लगेगा. इससे पहले 10 जनवरी को साल का पहला ग्रहण लग चुका है. इस साल कुल 5 ग्रहण लगने वाले है.

कोरोना काल में गहरा प्रभाव छोड़ने वाला है यह ग्रहण

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उपछाया चंद्रग्रहण को वास्तविकता में कोई चंद्रग्रहण नहीं माना जाता. इस उपच्छाया ग्रहण का सूतक काल का दोष भी नहीं लगता है, लेकिन इस वक्त भारत समेत पूरी दुनिया कोरोना संक्रमण से पीड़ित है, तो इस स्थिति में ये ग्रहण काफी महत्वपूर्ण होने वाला है. वैदिक शास्त्रों में चंद्रमा का संबंध मन और कफ प्रकृति से बताया गया है, और कोरोना काल में चंद्रमा पर 5 जून को ग्रहण लगना, भारत के साथ-साथ कई देशों के लिए काफी गहरा प्रभाव छोड़ने वाला है. हालांकि कई ज्योतिषी यह भी मान रहे हैं कि इस बार का उपच्छाया चंद्र ग्रहण का प्रभाव, मनुष्यों के लिए सामान्य से बेहतर रहेगा, जिससे देश को कोरोना संक्रमण को कम करने में मदद मिलेगी.

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