चैत्र नवरात्रि 2026: दुर्गा सप्तशती से पहले क्यों किया जाता है कवच, अर्गला और कीलक का पाठ? जानें रहस्य

Edited by Neha Kumari
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दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हुए श्रद्धालु (एआई-निर्मित तस्वीर)

Chaitra Navratri 2026: दुर्गा सप्तशती के अध्यायों के पाठ से पहले कवच, अर्गला और कीलक का पाठ किया जाता है. इसे ‘त्रयांग’ कहा जाता है. इसके पाठ के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है. आखिर त्रयांग का पाठ इतना जरूरी क्यों है? आइए जानते हैं इसके पीछे छिपे आध्यात्मिक रहस्य को.

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Chaitra Navratri 2026: 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है. इस समय माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है. नवरात्रि के पावन अवसर पर घरों और मंदिरों में माता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा की जाती है और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है. दुर्गा सप्तशती में 13 अध्याय होते हैं. अध्यायों का पाठ आरंभ करने से पहले कवच, अर्गला और कीलक का पाठ किया जाता है. आइए जानते हैं इनके धार्मिक महत्व के बारे में.

1. देवी कवच: सुरक्षा का अभेद्य घेरा

‘कवच’ का शाब्दिक अर्थ ‘ढाल’ होता है. मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, इसमें देवी के विभिन्न रूपों से शरीर के हर अंग की रक्षा की प्रार्थना की जाती है. मान्यता है कि इसका पाठ साधक के चारों ओर सकारात्मक ऊर्जा का एक घेरा बना देता है. यह मानसिक भय, नकारात्मक शक्तियों और शारीरिक बीमारियों से रक्षा करता है. क्योंकि जब तक साधक सुरक्षित और आत्मविश्वासी नहीं होगा, वह साधना में एकाग्र नहीं हो सकता.

2. अर्गला स्तोत्र: भाग्य के द्वार खोलने वाली अर्गला

‘अर्गला’ का अर्थ होता है ‘किवाड़ या दरवाजे की सिटकनी (कुंडी)’.मान्यता है कि जीवन में आने वाली बाधाएं, जो हमारे भाग्य के द्वार को बंद कर देती हैं, उन्हें अर्गला स्तोत्र के मंत्र खोलते हैं. इसमें बार-बार “रूपं देहि, जयं देहि, यशो देहि, द्विषो जहि” अर्थात हमें रूप, विजय, यश प्रदान करें और शत्रुओं का नाश करें” की प्रार्थना की जाती है. यह भौतिक और आध्यात्मिक सफलता के योग्य बनाता है.

3. कीलक स्तोत्र: मंत्रों की शक्ति को जाग्रत करना

‘कीलक’ का अर्थ है ‘कील’ या ‘लॉक’ होता है. मान्यता है कि भगवान शिव ने सप्तशती के मंत्रों को ‘कीलित’ यानी गुप्त कर दिया था, ताकि कोई इनका दुरुपयोग न कर सके. कीलक का पाठ उन बंद मंत्रों को खोलने की प्रक्रिया है. इसके बिना मंत्रों का प्रभाव पूर्ण रूप से सिद्ध नहीं होता.

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