अक्षय तृतीया पर दान क्यों है खास? जानें पौराणिक कथाओं में छिपा रहस्य
Published by : Neha Kumari Updated At : 19 Apr 2026 7:55 AM
अक्षय तृतीया पर दान करते हुए सांकेतिक तस्वीर (एआई)
Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया के दिन दान करने का विशेष महत्व है. इस दिन लोग अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को दान करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों किया जाता है? अगर हां, तो यह खबर आपके लिए है. आइए, एक कथा के माध्यम से इसके पीछे का रहस्य जानते हैं.
Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया को ‘आखा तीज’ के नाम से भी जाना जाता है. ‘अक्षय’ शब्द का अर्थ है- जिसका कभी नाश न हो. हिंदू धर्म में यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इस दिन शुरू किया गया कोई भी शुभ कार्य कभी नष्ट नहीं होता है. साल 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी. इस दिन लोग भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. साथ ही, इस दिन खरीदारी करने और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व होता है. कहा जाता है कि इस दिन किया गया दान जन्म-जन्मांतर तक फल देता है.
पौराणिक कथा
धर्मदास की श्रद्धा
प्राचीन समय में धर्मदास नाम का एक वैश्य (व्यापारी) रहता था. वह बहुत गरीब था और हमेशा अपने बड़े परिवार के पालन-पोषण को लेकर चिंतित रहता था. गरीब होने के बावजूद उसका मन बहुत साफ था और देवताओं व ब्राह्मणों के प्रति उसकी गहरी श्रद्धा थी.
अक्षय तृतीया का संकल्प
एक बार धर्मदास ने अक्षय तृतीया के व्रत का महत्व सुना. जब यह पर्व आया, तो उसने सुबह जल्दी उठकर गंगा स्नान किया. देवी-देवताओं की विधि-विधान से पूजा की और अपनी क्षमता के अनुसार दान सामग्री का प्रबंध किया. उसने ब्राह्मणों को जल से भरे घड़े, पंखे, जौ, सत्तू, चावल, नमक, गुड़, घी और वस्त्र जैसी चीजों का दान किया.
परिवार का विरोध और अटूट विश्वास
धर्मदास की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इसलिए उसकी पत्नी और परिवार वालों ने उसे इतना सारा दान करने से रोका. उन्हें डर था कि अगर सब कुछ दान कर दिया, तो घर का खर्च कैसे चलेगा. लेकिन धर्मदास पीछे नहीं हटे. उसने हर साल पूरी श्रद्धा के साथ अक्षय तृतीया पर दान और पुण्य का कार्य करना जारी रखा.
भक्ति का फल
समय बीतता गया. धर्मदास बूढ़ा और बीमार भी हो गया, लेकिन उसकी भक्ति कम नहीं हुई. अपनी इसी निस्वार्थ श्रद्धा के कारण वह अगले जन्म में कुशावती नगर का एक बहुत ही भाग्यशाली और प्रतापी राजा बना. वह इतना वैभवशाली था कि स्वयं त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) ब्राह्मण का रूप धारण कर उसके यज्ञ में शामिल होने आते थे.
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By Neha Kumari
नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.
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