घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में हो पुस्तकों का संग्रह
Updated at : 28 Dec 2019 6:34 AM (IST)
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सद्गुरुश्री स्वामी आनंद जी Qक्या पूजा-पाठ भाग्य बदल सकता है? -विष्णु ओझा, पटना सिर्फ कर्म ही भाग्य का निर्माण करते हैं. प्रयास, उद्यम या उपायों द्वारा स्वयं की असीम क्षमता को पहचान लेने से अवश्य हमारे जीवन में बदलाव अवश्य संभव है, पर कोई उपाय हमारे बदले में हमारी किस्मत पलट देगा, यह सोच बेमानी […]
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सद्गुरुश्री स्वामी आनंद जी
Qक्या पूजा-पाठ भाग्य बदल सकता है?
-विष्णु ओझा, पटना
सिर्फ कर्म ही भाग्य का निर्माण करते हैं. प्रयास, उद्यम या उपायों द्वारा स्वयं की असीम क्षमता को पहचान लेने से अवश्य हमारे जीवन में बदलाव अवश्य संभव है, पर कोई उपाय हमारे बदले में हमारी किस्मत पलट देगा, यह सोच बेमानी है. उपासना अपनी आंतरिक ऊर्जा को सक्रिय करने की तकनीक है, जिससे परिस्थितियों का सामना करने के लिए मानसिक और आंतरिक क्षमता जरूर हासिल की जा सकती है. उपाय भी हमारे भीतर समाहित होकर कमोबेश यही कार्य करते हैं. सनद रहे, अपनी योग्यता में इजाफा करके कर्म की अग्रसर होने से बड़ा कोई उपाय नहीं है.
Qमां के पूर्व मित्र से मुझे लगाव गया है. मुझे पता नहीं था कि मां कभी स्वयं भी उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ी थीं. वह मुझसे 25 साल बड़े हैं. मुझे क्या करना चाहिए. जन्म तिथि- 19.10.1997, जन्म समय-18.03, जन्म स्थान- मुंगेर.
-निकिता यादव, मुंगेर
आपकी राशि वृष और लग्न मेष है. आपके अष्टम भाव में मंगलदेव बैठ कर जहां आपको मांगलिक बना रहे हैं, वहीं साथ में शुक्र की युति बेमेल संबंधों से हानि का संकेत दे रही है. साथ में पतिभाव में सूर्य विराज कर स्थिति को विषम बना रहे हैं.
सूर्य जहां आसीन होते हैं, वहां के सुख पर नकारात्मक असर डालते हैं. यह योग दाम्पत्य सुख के साथ मान-सम्मान में पलीता लगा रहे हैं. आपके ग्रह योग सीधे शब्दों में जिंदगी को न उलझाने की अनुशंसा करते हैं. जीवन में आपको टेढ़े-मेढ़े नहीं, सीधे मार्ग का अनुसरण करना चाहिए. वैवाहिक जीवन के भविष्य के विश्लेषण के लिए वर-वधु दोनों का जन्म विवरण अनिवार्य है. आपके मित्र की पूर्व में आपकी मां से मित्रता और दोगुनी उम्र का प्रश्न ज्योतिषिय परिधि के बाहर है. मैं आपको विवाह से पहले अपने करियर पर ध्यान देने की सलाह देता हूं.
Qघर में लाइब्रेरी किस दिशा में होनी चाहिए?
– रानी पोद्दार, जमशेदपुर
यदि आप बड़े शहरों के अपार्टमेंट्स यानी महानगरों के फ़्लैट्स में रहते हैं, तो वहां किताबों के संग्रह की सही दिशा इशान्य कोण के कक्ष का दक्षिण पश्चिम कोना है.
अगर इशान्य कोण यानी उत्तर-पूर्व में स्थान उपलब्ध न हो, तो किसी भी कक्ष के दक्षिण-पश्चिम कोने पर पुस्तकों के रखने की व्यवस्था की जा सकती है, पर यदि आप स्वयं के बहुमंज़िला मकान में रहते हो, तो वहां ऊपर की मंजिल में पूर्व, उत्तर-पूर्व और पश्चिम दिशा के कक्ष का चुनाव किया जा सकता है, पर पुस्तकों का संग्रह दक्षिण-पश्चिम दिशा में ही करना मुफ़ीद रहेगा.
पुस्तकों की संख्या यदि ज़्यादा हो तो इसका विस्तार 150 अंश से 300 अंश तक किया जा सकता है. किसी भी सूरत में पुस्तकों का भंडारण शून्य से 90 अंश के मध्य नहीं होना चाहिए. अंश यानी डिग्रियों की स्थिति की जानकारी किसी भी कम्पास यानी क़ुतुबनुमा से ली जा सकती है.
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