पंचक में क्यों नहीं किये जाते हैं शुभ कार्य
Updated at : 01 Jun 2019 1:30 AM (IST)
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श्रीपति त्रिपाठी, ज्योतिषाचार्य पंचक को हिंदू पंचाग के अनुसार बहुत अशुभ काल माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दौरान शुभ कार्य से बचना चाहिए और कुछ उपाय करके इसके बुरे प्रभाव को दूर करना चाहिए, ताकि बड़ी समस्या से बचा जा सके. धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद एवं रेवती कुछ ऐसे ही […]
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श्रीपति त्रिपाठी, ज्योतिषाचार्य
पंचक को हिंदू पंचाग के अनुसार बहुत अशुभ काल माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दौरान शुभ कार्य से बचना चाहिए और कुछ उपाय करके इसके बुरे प्रभाव को दूर करना चाहिए, ताकि बड़ी समस्या से बचा जा सके. धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद एवं रेवती कुछ ऐसे ही अशुभ नक्षत्रों के नाम हैं, जिन्हें काफी अशुभ माना जाता है.
धनिष्ठा के प्रारंभ से लेकर रेवती के अंत तक का समय काफी अशुभ माना गया है, इसे पंचक कहा जाता है. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इन पांच दिनों में न तो दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करनी चाहिए, न घर की छत या खाट बनवानी चाहिए और न ही ईंधन का सामान इकट्ठा करना चाहिए.
ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार पंचक भी अलग-अलग प्रकार के होते हैं, जैसे- रोग पंचक, राज पंचक, अग्नि पंचक, मृत्यु पंचक, चोर पंचक.
रोग पंचक : अगर पंचक का प्रारंभ रविवार से हो रहा होता है, तो यह रोग पंचक कहा जाता है. इसके प्रभाव में आकर व्यक्ति शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करता है. इस दौरान किसी भी प्रकार का शुभ कार्य निषेध माना गया है. मांगलिक कार्यों के लिए यह पांच दिन अनुपयुक्त हैं.
राज पंचक : सोमवार से शुरू हुआ पंचक राज पंचक होता है, यह पंचक काफी शुभ माना जाता है. इस दौरान सरकारी कार्यों में सफलता हासिल होती है और बिना किसी बाधा के संपत्ति से जुड़े मामलों का निदान होता है.
अग्नि पंचक : मंगलवार से शुरू हुए पंचक के दौरान आग लगने का भय रहता है. इसे शुभ नहीं माना जाता. इस दौरान औजारों की खरीददारी, निर्माण या मशीनरी का कार्य नहीं करना चाहिए. जबकि इस दौरान कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में आगे बढ़ने से सफलता मिलने की संभावना होती है.
मृत्यु पंचक : शनिवार से शुरू हुआ पंचक सबसे ज्यादा घातक होता है, जिसे मृत्यु पंचक कहते हैं. इस दिन किसी कार्य की शुरुआत करने से व्यक्ति को मृत्यु जितनी घातक परेशानियों से गुजरना पड़ता है. चोट लगने, दुर्घटना होने और मृत्यु तक का भय रहता है.
चोर पंचक : शुक्रवार से शुरू हुए पंचक को चोर पंचक कहते हैं. इस दौरान यात्रा नहीं करनी चाहिए. धन से जुड़ा कोई कार्य भी पूर्णत: निषेध माना गया है.
अगर पंचक बुधवार या बृहस्पतिवार से प्रारंभ हो रहे हैं, तो उन्हें ज्यादा अशुभ नहीं मानते. पंचक के मुख्य निषेध कर्मों को छोड़कर कोई भी कार्य कर सकते है.
खास बात : विद्वानों के अनुसार पंचक के समय चारपाई नहीं बनवानी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से कोई बड़ा संकट आ सकता है. धनिष्ठा नक्षत्र के दौरान आग से जुड़े कोई भी कार्य करने से बचना चाहिए, इससे आग लगने का खतरा रहता है.
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