शारदीय नवरात्र का शुभारंभ कल से, रत्नजड़ित नौका पर सवार होकर बेड़ा पार करेंगी मां दुर्गा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Oct 2018 7:58 AM
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रांची : शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 10 अक्तूबर से होगा़ इस बार मां का आगमन नाव और गमन हाथी पर हो रहा है, जिसे शुभ माना जा रहा है़ इस दिन प्रतिपदा सुबह 7.56 बजे तक ही है. हालांकि उदया तिथि में प्रतिपदा मिलने के कारण पूरे दिन यह तिथि मान्य होगी. इस दिन अभिजीत […]
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रांची : शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 10 अक्तूबर से होगा़ इस बार मां का आगमन नाव और गमन हाथी पर हो रहा है, जिसे शुभ माना जा रहा है़ इस दिन प्रतिपदा सुबह 7.56 बजे तक ही है. हालांकि उदया तिथि में प्रतिपदा मिलने के कारण पूरे दिन यह तिथि मान्य होगी.
इस दिन अभिजीत मुहूर्त दिन के 11.37 बजे से 12.23 बजे तक है. यह भी कलश स्थापना के लिए उपयुक्त समय है. वाराणसी पंचांग के अनुसार 7.56 बजे के बाद से द्वितीया लग जायेगी. इसलिए प्रतिपदा युक्त द्वितीया में भी कलश की स्थापना की जा सकती है. चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग में नवरात्र आरंभ होने के कारण कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त श्रेष्ठकर है. मिथिला पंचांग के अनुसार भी मां का आगमन नौका और गमन हाथी पर हो रहा है.
आगमन और प्रस्थान दोनों शुभ माना गया है. इस पंचांग के अनुसार कलश स्थापना के दिन से ही मां का आगमन शुरू हो जाता है. कलश स्थापित कर मां के अलावा अन्य देवी देवता का आह्वान किया जाता है. इस दिन सूर्योदय प्रातः 5: 47 पर होगा, इसके बाद से पूजा अर्चना शुरू हो जायेगी. प्रतिपदा सुबह 8.06 बजे तक है.
इस नवरात्रि पर मां दुर्गा रत्नजड़ित नौका पर सवार होकर करेंगी बेड़ा पार
आत्मिक शक्ति के जागरण का पर्व शारदीय नवरात्रि का आगाज 10 अक्तूबर को हो रहा है़ मां दुर्गा की विदाई यानी विसर्जन 19 अक्टूबर को होगा़ देवी भागवत के अनुसार नवरात्रि पर मां का आगमन और प्रस्थान विशेष वाहन पर होता है़ देवी के आने और जाने वाले हर वाहन में भविष्य के लिए कुछ विशिष्ट संकेत छिपे होते हैं. मां दुर्गा इस वर्ष धरा पर अपनी स्वर्ण नौका पर सवार होकर पधारेंगी, जो रत्नों से जड़ी होगी. यानी इस वर्ष माता रानी अपने भक्तों के बीच उन्हें भंवसागर से पार करने के लिए तारणहार स्वरूप में अवतरित होंगी.
दुर्गा का यह वाहन कामनापूरक माना गया है. नौका विहार की मुद्रा में देवी का प्राकट्य इस नवरात्रि में साधना और उपासना से अभीष्ट सिद्धि की ओर इशारा कर रहा है. पूर्ण निष्ठा से जप, तप और आराधना से इस साल अदभुत लाभ का संयोग निर्मित हो रहा है. मगर इस इशारे में बेड़ा पार और भंवसागर दोनों छिपे हुए हैं. यानी यह वर्ष किसी भयंकर आर्थिक तूफान और तत्पश्चात उसके निवारण का संकेत दे रहा है. यह किसी विमान दुर्घटना या विमानन कंपनी के आर्थिक मुसीबत की ओर भी भी इशारा कर रहा है. नाव से मां आगमन आर्थिक कष्ट के साथ किसी प्राकृतिक आपदा का भी संकेत है.
ये किसी देश के आर्थिक चक्रव्यूह में फंसने की भी चुगली कर रहा है. 19 अक्तूबर को मां श्वेत गज पर आशीर्वाद मुद्रा में सवार होकर विदा होंगी. ऐरावत पर सवार होकर देवी का प्रस्थान ऐश्वर्य का द्योतक है. लिहाजा नवरात्रि के बाद के छह मास जल और धन धान्य की पूर्णता और अतिवृष्टि और बाद के छह महीने किसी सक्षम व्यक्ति या राष्ट्र की मदद से आर्थिक स्थिति के लिए सकारात्मक प्रतीत हो रहे हैं.
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