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सूर्यग्रहण काल के दौरान करें गीता और महामृत्युंजय मंत्र का जाप

Updated at : 17 Feb 2026 10:24 AM (IST)
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Surya Grahan 2026 MantraJaap

सूर्यग्रहण पर मंत्रों का जाप

Surya Grahan 2026: सूर्यग्रहण के दौरान गीता पाठ और महामृत्युंजय मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है. जानें इस समय इन मंत्रों का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व क्या है.

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Surya Grahan 2026: आज 17 फरवरी 2026 को साल का पहला सूर्यग्रहण लग रहा है. सूर्यग्रहण एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसे धर्म और आध्यात्मिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. जब सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा आ जाता है, तब कुछ समय के लिए सूर्य का प्रकाश ढक जाता है. सनातन परंपरा में इस समय को साधना, मंत्र जाप और आत्मचिंतन के लिए विशेष माना गया है. खासतौर पर इस दौरान भगवद्गीता और महामृत्युंजय मंत्र का जाप बहुत शुभ और फलदायी बताया गया है.

ग्रहण काल क्यों माना जाता है विशेष?

धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण के समय वातावरण में सूक्ष्म ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है. इस समय किया गया जप, तप और ध्यान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फल देता है. इसलिए ऋषि-मुनियों ने ग्रहण को आध्यात्मिक उन्नति का अवसर बताया है. नकारात्मक ऊर्जा से बचने और मन को स्थिर रखने के लिए मंत्र जाप की सलाह दी जाती है.

गीता पाठ का महत्व

भगवद्गीता हिंदू धर्म का एक प्रमुख ग्रंथ है. इसमें जीवन, कर्म, धर्म और आत्मा के गहरे सिद्धांत बताए गए हैं. सूर्यग्रहण के समय गीता का पाठ करने से मन में सकारात्मक विचार आते हैं और भय या भ्रम दूर होता है.

ग्रहण के समय कई लोगों को अनजाना डर या असहजता महसूस होती है. ऐसे में गीता के श्लोक मन को स्थिरता देते हैं. खासकर गीता का 12वां और 15वां अध्याय पढ़ना लाभकारी माना जाता है. गीता सिखाती है कि जीवन में हर परिस्थिति में धैर्य और विश्वास बनाए रखना चाहिए.

ग्रहण के समय गीता पढ़ने से व्यक्ति अपने कर्मों पर विचार करता है और आत्मशुद्धि की ओर कदम बढ़ाता है. यह समय आत्मचिंतन का होता है, और गीता का संदेश हमें सही मार्ग दिखाता है.

महामृत्युंजय मंत्र का महत्व

ऋग्वेद में वर्णित महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव को समर्पित है। यह मंत्र इस प्रकार है –

“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”

यह मंत्र जीवन में आने वाले भय, रोग और संकट को दूर करने वाला माना जाता है. सूर्यग्रहण के समय इस मंत्र का जाप करने से मानसिक शक्ति बढ़ती है और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है. धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण काल में वातावरण संवेदनशील होता है. ऐसे समय में शिव मंत्र का उच्चारण सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. जो लोग स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रहे हों, उनके लिए यह मंत्र विशेष लाभकारी बताया गया है. महामृत्युंजय मंत्र का जाप 108 बार करना शुभ माना जाता है. यदि संभव हो तो रुद्राक्ष की माला से जप करें और शांत स्थान पर बैठकर ध्यान लगाएं.

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ग्रहण के समय क्या करें?

  • सूर्यग्रहण के दौरान स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें. पूजा स्थान को साफ रखें और दीपक जलाकर मंत्र जाप करें. गीता पाठ या महामृत्युंजय मंत्र का जप करते समय मन में श्रद्धा और एकाग्रता होनी चाहिए.
  • ग्रहण समाप्त होने के बाद फिर से स्नान करना और घर में गंगाजल छिड़कना शुद्धिकरण के लिए अच्छा माना जाता है. जरूरतमंदों को दान देना भी पुण्यकारी माना गया है.

आध्यात्मिक लाभ

  • गीता और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ केवल धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह मन को शांति और स्थिरता देता है. सूर्यग्रहण जैसे विशेष समय में जब प्रकृति में बदलाव होता है, तब ये मंत्र व्यक्ति को अंदर से मजबूत बनाते हैं.
  • गीता हमें सिखाती है कि हर परिस्थिति में संतुलन बनाए रखें, जबकि महामृत्युंजय मंत्र हमें भय और संकट से मुक्त होने की प्रेरणा देता है.
  • इस प्रकार, सूर्यग्रहण का समय डरने का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना और आत्मबल बढ़ाने का अवसर है. श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया जप निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम देता है.
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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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