मजबूत इरादों वाली : झारखंड की वे महिलाएं जिन्होंने सामाजिक सरोकार के कार्यों में किया अपना आत्मविश्वास बुलंद
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 23 Feb 2023 11:19 AM
झारखंड में कई ऐसी महिलाएं हैं, जो सामाजिक संगठनों में काम कर रहा हैं. सिर्फ काम ही नहीं संगठनों की अगुवाई भी कर रही हैं. जरूरतमंदों के आंगन में खुशियां लाने की कोशिश में जुटी हैं
रांची, लता रानी : कभी महिलाएं किसी रचनात्मक और सकारात्मक कार्य करने में भी संकोच करती थी. आज वह आत्मविश्वास से भरी हुई हैं. मजबूती इतनी की सामाजिक सरोकार में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं. जरूरतमंदों तक मदद पहुंचा रही हैं. संगठित हैं. विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़कर सामाज सेवा में अपनी अहम भागीदारी निभा रही हैं. जरूरतमंदों के आंगन में खुशियां लाने की कोशिश में जुटी हैं. आज की यह रिपोर्ट उन सामाजिक संगठनों पर आधारित है, जिनकी अगुवाई महिलाएं कर रही हैं.
डाॅक्टर्स वाइव्स एसोसिएशन यानी दवा का गठन 2006 में हुआ, तब सदस्यों की संख्या 30 थी. आज 200 महिलाएं कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं. इसमें डॉ शोभा चक्रवर्ती, उषा रानी, सुषमा प्रिया और कुमकुम विद्यार्थी आदि का अहम योगदान है. यह संस्था हर माह कम से कम 10 हजार रुपये की चैरिटी करती है. अगस्त 2022 में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में दो लाख रुपये दिये. करुणा आश्रम को जरूरी चीजें दी गयीं. समय-समय पर बच्चों को शिक्षण सामग्री भी दी जाती है. दो एकल विद्यालय को 44 हजार रुपये दिये. सामाजिक सेवा में अनुदान और महिला उद्यमियों को मंच देने के लिए 2022 में दवा मेले की शुरुआत हुई. इससे प्राप्त आय को सामाजिक सरोकार में लगाया जा रहा है. बच्चों की शिक्षा में आर्थिक मदद दी जा रही है.
आइएएस ऑफिसर्स वाइव्स एसोसिएशन, जेसोवा का गठन वर्ष 2001 में हुआ. तब सदस्यों की संख्या करीब 40 थी. वर्तमान में 100 से ज्यादा सदस्य राज्य भर में सेवा कार्य में जुटी हुई हैं. जरूरतमंदों तक आर्थिक मदद पहुंचा रही हैं. सामाजिक कार्यों के लिए 2005 में इप्सोवा दिवाली मेला की शुरुआत की गयी. इस मेले से प्राप्त आय से साल भर जरूरतमंदों की मदद दी जाती है. वर्ष 2022 के इप्साेवा मेले में जन सराेकार के तहत 11.55 लाख रुपये की सहायता दी गयी. इसके तहत मुख्यमंत्री के हाथों वीर नारियों, कैंसर पीड़ित शांभवी, एसिड अटैक पीड़िता काजल कुमारी और ओलिंपिक में भारत का मान बढ़ानेवाली आशा किरण लकड़ा को चेक दिये गये. यह एसाेसिएशन रांची के 10 बच्चों को गोद लेकर उनकी पूरी शिक्षा का खर्च उठा रही है.
स माज कल्याण और पुलिस परिवार के उत्थान के उद्देश्य से वर्ष 2002 में इप्सोवा का गठन हुआ. यहां संस्था स्थानीय कलाकारों और बुनकरों को मंच देने में भी अहम भूमिका निभा रही है. इस लिए हर वर्ष दिवाली मेला लगाया जाता है. पुलिस परिवार की बच्चियों काे सरस्वती स्कॉलरशिप दी जाती है. इप्सोवा के सामाजिक सेवा कार्य के अंतर्गत धनबाद में तरुणा कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इसके तहत बच्चियों को मेंसुरेंशन हेल्थ को लेकर जागरूक किया जाता है. आयरन, फॉलिक एसिड और पैड का वितरण किया जाता रहा. वहीं महिला सिपाहियों के लिए सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस कैंप लगाया जाता है. डायन बिसाही कुप्रथा को दूर करने के लिए भी यह संस्था जागरूकता कार्यक्रम चलाती है.
के कार्यों से जुड़ा हुआ है फोवा
एसोसिएशन की स्थापना 1992 में हुई है. प्राथमिकता है सामाजिक सरोकार व वन विभाग परिवार को एक मंच पर लाना. उषा सिन्हा और इंदिरा दीवान की अगुवाई में इसका गठन हुआ. वर्तमान में पूरे राज्य में 60 सदस्य एक साथ मिलकर काम रही हैं. एसोसिएशन के माध्यम से समाज के वंचित लोगों को मुख्य धारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है. इस कड़ी में 2018 में वन विभाग से जुड़े कलाकारों को मंच देने के लिए वन मेला का आयोजन किया गया. वन से जुड़े उत्पादों की प्रदर्शनी लगायी गयी.
स्वयंसिद्ध क्लब. क्लब की स्थापना तीन वर्ष पहले हुई. शुरुआत में 10 महिलाएं जुड़ी हुई थीं. आज 50 महिलाएं साथ काम कर रही हैं. यह संगठन जरूरतमंदों की सेवा के लिए तत्पर रहता है. पहली प्राथमिकता है महिला स्वयं सहायता समूहों की मदद. महिला समूहों को जो भी आवश्यकता होती है, उसे पूरा करने की कोशिश की जाती है. क्लब शिक्षा के क्षेत्र में भी काम कर रहा है. आदिवासी कल्याण संस्था के लिए यह क्लब काम कर रहा है. बच्चियों के स्वास्थ्य के लिए आशा होम, संत मिखाइल ब्लाइंड स्कूल में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन लगायी है.
नेशनल ह्यूमन क्राइम कंट्रोल ब्यूराे महिला शाखा, झारखंड चैप्टर की शुरुआत 2019 में हुई. यह संस्था पूरे झारखंड की महिलाओं के लिए काम कर रही है. खास कर वैसी महिलाएं जिन्हें आर्थिक परेशानी है. जिन्हें अपने अधिकार की जानकारी नहीं है, उन महिलाओं की समस्या को दूर करने में संस्था अहम भूमिका निभा रही है. नि:शुल्क कानूनी सहायता मिल जाती है. जरूरतमंद महिलाओं को स्वरोजगार से भी जाेड़ा जाता है. आर्थिक मदद दी जाता है. समय-समय पर रक्तदान शिविर भी लगाया जाता है.
मैं श्रद्धानंद प्राइमरी स्कूल में कक्षा चौथी की छात्रा हूं. पिताजी की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण मेरी पढ़ाई नहीं हो पा रही थी. ऐसे में जेसोवा ने मदद की. पांच सालों से मेरी पढ़ाई के लिए जेसाेवा से आर्थिक मदद मिल रही है. साथ ही मेरी दो दोस्तों को इसका लाभ मिल रहा है.
-काजल वर्मा, छात्रा
हमारे घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. इस कारण मेरी पढ़ाई में परेशानी आ रही थी. हालांकि इप्सोवा द्वारा बेटियों की शिक्षा के लिए चलायी जा रही सरस्वती स्कॉलरशिप का लाभ मुझे मिला. 2018-19 के लिए इप्सोवा की ओर से मुझे दो वर्ष की स्कॉलरशिप मिली.
-रुचि राई, छात्रा
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