सोना झरिया मिंज बनी सिद्धो-कान्हो विश्वविद्यालय की कुलपति

कोरोना युग में जब चारों ओर निराशा के बादल छाये हुए हैं, एक खबर ने लोगों में नयी ऊर्जा का संचार किया और खुशी दी है. सोना झरिया मिंज को राज्यपाल द्रौपदी मुरमू ने गुरुवार को सिद्धो-कान्हो विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है.
रांची : कोरोना युग में जब चारों ओर निराशा के बादल छाये हुए हैं, एक खबर ने लोगों में नयी ऊर्जा का संचार किया और खुशी दी है. सोना झरिया मिंज को राज्यपाल द्रौपदी मुरमू ने गुरुवार को सिद्धो-कान्हो विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है. राज्यपाल ने कल तीन विश्वविद्यालय के कुलपतियों की नियुक्ति की जिनमें विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति मुकुल नारायण देव और नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राम लखन सिंह बनाये गये.
सोना झरिया मिंज को कुलपति बनाया जाना ऐतिहासिक है. सोना झरिया मिंज जेएनयू की छात्रा रही हैं और वर्तमान में वहीं पर ‘स्कूल अॅाफ कंप्यूटर एंड सिस्टम साइंस’ विभाग में प्रोफेसर हैं. वे जेएनयू में टीचर एसोसिएशन की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. सोना झरिया मिंज ने तमिलनाडु के क्रिश्चयन कॉलेज से गणित में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. उसके बाद उन्होंने जेएनयू से दर्शनशास्त्र में एमफील और पीएचडी किया. जेएनयू में प्रोफेसर नियुक्त होने से पहले उन्होंने मध्यप्रदेश के बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय और मदुरई के कामराज यूनिवर्सिटी में भी असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम किया. पिछले 28 साल से वे जेएनयू में काम कर रही हैं.
सोना झरिया मिंज झारखंड के प्रसिद्ध स्वतंत्रा सेनानी निर्मल मिंज की बेटी हैं. सिद्धो-कान्हो विश्वविद्यालय की स्थापना 1992 में तात्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री लालू यादव ने की थी.
Posted By : Rajneesh Anand
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










