ePaper

पीएम मोदी ने 'मन की बात' में किया झारखंड के गोमो रेलवे स्टेशन का किया जिक्र, जानिए क्या है इसकी कहानी

Updated at : 31 Jul 2022 12:57 PM (IST)
विज्ञापन
पीएम मोदी ने 'मन की बात' में किया झारखंड के  गोमो रेलवे स्टेशन का किया जिक्र, जानिए क्या है इसकी कहानी

पीएम मोदी ने आज अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में धनबाद के गोमो रेलवे स्टेशन का जिक्र किया. देश में चल रहे आजादी के अमृत महोत्सव के तहत गोमो के नेताजी सुभाष चंद्र बोस रेलवे स्टेशन की चर्चा की. कहा कि आजादी के समय नेताजी ने अंगरेजों को चकमा दिये थे. जानिए क्या है पूरी कहानी....

विज्ञापन

Ranchi News: पीएम मोदी ने आज अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में धनबाद के गोमो रेलवे स्टेशन का जिक्र किया. देश में चल रहे आजादी के अमृत महोत्सव के तहत गोमो के नेताजी सुभाष चंद्र बोस रेलवे स्टेशन की चर्चा की. कहा कि आजादी के समय नेताजी ने अंगरेजों को चकमा दिये थे. नेताजी की कई यादें गोमो से जुड़ी हैं. धनबाद का गोमो स्टेशन अपने साथ ऐसे घटनाक्रम को जोड़े हुए है, जिसे ‘महानिष्क्रमण’ कहा जाता है. जानिए क्या है गोमो स्टेशन (जिसे अब सुभाषचंद्र बोस स्टेशन के नाम से जाना जाता है) की पूरी कहानी….

18 जनवरी 1941 को गोमो स्टेशन से पकड़े थे पेशावर मेल

गोमो स्टेशन की कहानी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी हुई है. यही वो स्टेशन है, जहां से सुभाष चंद्र बोस निकले तो कभी अंग्रेजों के हाथ नहीं आए. उनके गोमो स्टेशन से ट्रेन पकड़ कर निकलने की प्रक्रिया को ‘महानिष्क्रमण’ कहा जाता है. 17 जनवरी 1941 को सुभाष चंद्र बोस अपने भतीजे शिशिर चंद्र बोस के घर बेबी ऑस्ट्रियन कार(बीएलए/7169) से पहुंचे थे. वे कोलकाता से बरारी आए थे. जिसका चित्र बांग्ला पुस्तक महानिष्क्रमण में छपा है. वह अपने दो भतीजे और बहू के साथ सीधे गोमो स्टेशन पहुंचे थे. नेताजी 18 जनवरी 1941 को गोमो से महानिष्क्रमण के लिए पेशावर मेल (अब कालका मेल) पकड़े थे. पेशावर मेल वही ट्रेन है, जो बाद में कालका मेल और फिर नेताजी एक्सप्रेस कहलाती है.

चकमा देकर निकल गये थे अपने आवास से

अंग्रेजों ने रिहा करने के बाद नेताजी को एल्गिन रोड स्थित उनके आवास में रहने का आदेश दिया था. इससे भी अंग्रेजों का मन नहीं भरा तो उनके आवास पर कड़ा पहरा बैठा दिया गया था. उक्त मामले में 27 जनवरी 1941 को सुनवाई होनी थी. जिसमें नेताजी को कठोर सजा मिलने वाली थी. नेताजी को इस बात की भनक लग गई थी. वह आवास पर लगे पहरे को आसानी से भेद कर 16 जनवरी की रात्रि निकलकर बंगाल की सरहद पार करने में कामयाब हो गए थे.

तबीयत खराब होने पर सशर्त किये गये थे रिहा

जानकारी के अनुसार 02 जुलाई 1940 को हॉलवेल सत्याग्रह के दौरान भारत रक्षा कानून की धारा 129 के तहत नेताजी को प्रेसीडेंसी जेल भेजा गया था. नेताजी गिरफ्तारी से नाराज होकर 29 नवंबर से अनशन पर बैठ गए थे. जिससे उनकी तबीयत खराब होने लगी थी. उन्हें इस शर्त पर रिहा किया गया था कि तबीयत ठीक होने पर फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जायेगा.

2009 में हुआ था स्टेशन का पुनर्नामकरण

धनबाद के समाजसेवी निभा दत्ता ने गोमो स्टेशन का नाम नेताजी सुभाषचंद्र बोस के नाम पर करने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी थी. गृह मंत्रालय के आदेश पर गोमो स्टेशन का नाम नेताजी सुभाषचंद्र बोस जंक्शन गोमोह रखा गया. पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने 23 जनवरी 2009 में गोमो स्टेशन के बदले हुए नाम का अनावरण किया था.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola