National Sports Day: झारखंड के 12,940 स्कूलों में नहीं हैं खेल के मैदान, स्पोर्ट्स टीचर का भी भारी अभाव

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 29 Aug 2023 7:22 AM

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हाइस्कूल व प्लस टू स्कूलों में से केवल हाइस्कूल में ही शिक्षक के पद सृजित हैं. राज्य में कुल 635 प्लस टू स्कूल हैं. इनमें से 59 स्कूल एकीकृत बिहार के समय के हैं.

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झारखंड के 12,940 स्कूलों में खेल के मैदान नहीं हैं. पूरे देश की बात करें, तो देशभर के 3,43,148 स्कूलों में खेल के मैदान नहीं हैं. केंद्र सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट में दर्ज आंकड़ों में इसका जिक्र है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने ये आंकड़े ‘यू-डायस 2021-2022’ के तहत देश भर के सरकारी और निजी स्कूलों से मिली रिपोर्ट के आधार पर जुटाये हैं. रिपोर्ट बताती है कि राज्य के कुल 44,855 सरकारी और निजी स्कूलों में से 31,915 में ही खेल के मैदान हैं. उधर, देश भर के कुल 14,89,115 स्कूलों में से 11,45,967 में ही खेल के मैदान हैं. राज्य के स्कूलों में हुई नियुक्तियों के आकलन से यह बात पता चलती है कि सरकारी स्कूलों में खेल शिक्षकों की भी भारी कमी है. राज्य के सरकारी मध्य विद्यालयों में तो खेल शिक्षक का पद ही नहीं है.

हाइस्कूल व प्लस टू स्कूलों में से केवल हाइस्कूल में ही शिक्षक के पद सृजित हैं. राज्य में कुल 635 प्लस टू स्कूल हैं. इनमें से 59 स्कूल एकीकृत बिहार के समय के हैं. शेष स्कूल झारखंड गठन के बाद खुले हैं. राज्य गठन के बाद खुले प्लस टू स्कूलों में भी खेल शिक्षक के पद सृजित नहीं किये गये हैं.

‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ के तहत स्कूलों में खेलकूद की गतिविधियों को अनिवार्य बनाया गया है. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा भी स्कूलों में खेलकूद को लेकर दिशा-निर्देश दिये गये हैं. खेलकूद को स्कूलों के रुटीन में शामिल किया गया है. राज्य के हाइस्कूल में वर्तमान में 832 खेल शिक्षक हैं. इनमें से 184 की नियुक्ति इस वर्ष मई में हुई है.

खेलकूद की सामग्री खरीदने के लिए मिले 18 करोड़ : केंद्र और राज्य सरकार की ओर से स्कूलों को समय-समय पर खेलकूद के सामान खरीदने के लिए राशि दी जाती है. पिछले वर्ष ही राज्य के सरकारी स्कूलों को 18 करोड़ रुपये दिये गये थे.

दिक्कत यह हे कि स्कूलों को खेल सामग्री की खरीद के मद में राशि आवंटित करने से पहले यह नहीं देखा जाता है कि स्कूल में बच्चोें के खेलने की सुविधा है भी या नहीं. हालत यह है कि जिन स्कूलों में खेल का मैदान नहीं हैं, वहां भी क्रिकेट के, फुटबॉल, जेवलिन, शॉटपुट जैसे खेलों के लिए सामग्री क्रय का निर्देश जारी कर दिया जाता है. निर्देश के आलोक में स्कूलों द्वारा सामग्री का क्रय तो कर लिया जाता है, लेकिन इसका उपयोग नहीं हो पाता है.

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